Bhojan Vastu Niyam : वास्तु शास्त्र में अन्न को देवता माना गया है और इसे ग्रहण करने की प्रक्रिया को एक अनुष्ठान की तरह देखा जाता है। मान्यता है कि जिस तरह हम भोजन करते हैं, उसका सीधा प्रभाव हमारे अवचेतन मन और घर की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है।
अक्सर लोग जल्दबाजी में कहीं भी बैठकर भोजन कर लेते हैं, लेकिन अनजाने में की गई ये गलतियां वास्तु दोष का कारण बनती हैं।
इन दिशाओं का रखें विशेष ध्यान
भोजन करते समय आपकी दिशा सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। शास्त्रों के अनुसार, पूर्व दिशा (East) की ओर मुख करके भोजन करने से बीमारियां दूर होती हैं और आयु बढ़ती है। वहीं, उत्तर दिशा (North) की ओर मुख करके खाना खाने से धन, विद्या और आध्यात्मिक शक्ति की प्राप्ति होती है।
इसके विपरीत, दक्षिण दिशा को यम की दिशा माना गया है; इस तरफ मुख करके भोजन करने से दुर्भाग्य और मानसिक तनाव बढ़ता है। पश्चिम दिशा की ओर मुख करके भोजन करने से व्यक्ति पर कर्ज का बोझ बढ़ सकता है।
जमीन पर बैठकर भोजन के लाभ
आधुनिक दौर में डाइनिंग टेबल का चलन बढ़ा है, लेकिन वास्तु और आयुर्वेद दोनों ही जमीन पर बैठकर भोजन करने की सलाह देते हैं। जब हम पालथी मारकर (सुखासन) बैठते हैं, तो हमारा मस्तिष्क स्वाभाविक रूप से शांत हो जाता है।
यह मुद्रा पाचन अग्नि को प्रदीप्त करती है, जिससे भोजन आसानी से पचता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी, इस मुद्रा में बैठने से हृदय पर दबाव कम पड़ता है और रक्त संचार बेहतर होता है।
भोजन के दौरान मानसिक स्थिति

भोजन केवल शरीर की भूख मिटाने के लिए नहीं, बल्कि आत्मा की तृप्ति के लिए भी है। खाते समय टीवी देखना, स्मार्टफोन का इस्तेमाल करना या किसी से बहस करना नकारात्मक ऊर्जा को आमंत्रित करता है।
यदि आप क्रोध या तनाव में भोजन करते हैं, तो वह शरीर के लिए ‘विष’ के समान कार्य करता है। शांत मन से और चबा-चबा कर खाया गया भोजन ही शरीर को पूर्ण पोषण देता है।
थाली और अन्न का सम्मान
वास्तु के अनुसार, परोसी गई थाली का अनादर कभी नहीं करना चाहिए। भोजन शुरू करने से पहले अन्न देवता और ईश्वर का आभार व्यक्त करना घर में बरकत लाता है।
जूठी थाली को कभी भी बिस्तर पर या उसके पास नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि इससे राहु का दोष लगता है और घर में कलह की स्थिति पैदा होती है। रात के समय जूठे बर्तन रसोई में छोड़ना लक्ष्मी के आगमन में बाधा डालता है।











