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Traffic Jam : उत्तराखंड को ट्रैफिक जाम से मिलेगी मुक्ति, इन 7 शहरों में बनेंगे टनल बाईपास

मसूरी के प्रवेश बैरियरों पर ईको टैक्स वसूली अब पूरी तरह से फास्टैग के जरिए होगी। लोक निर्माण विभाग ने राज्य के सात प्रमुख शहरों को जाम से मुक्ति दिलाने के लिए टनल बाईपास बनाने की डीपीआर पर काम तेज कर दिया है।

Traffic Jam : उत्तराखंड को ट्रैफिक जाम से मिलेगी मुक्ति, इन 7 शहरों में बनेंगे टनल बाईपास

HIGHLIGHTS

  • कोल्हूखेत बैरियर पर फास्टैग से कटेगा ईको टैक्स
  • स्थानीय नागरिकों को मिलेगी टैक्स में पूरी रियायत
  • पहाड़ के 7 शहरों में बनेंगे अंडरग्राउंड टनल बाईपास
  • सोनप्रयाग से चौमासी तक नई टनल का प्रस्ताव मंजूर

देहरादून, 28 जून 2026 (दून हॉराइज़न)।

Traffic Jam : पर्यटकों की भारी भीड़ और रोजाना लगने वाले लंबे ट्रैफिक जाम से निपटने के लिए मसूरी के कोल्हूखेत समेत नगर पालिका के दो प्रवेश बैरियरों पर अब सीधे फास्टैग सिस्टम से ईको टैक्स की वसूली होगी। स्थानीय प्रशासन और स्टेकहोल्डर्स की बैठक में इस डिजिटल वसूली प्रणाली को तत्काल प्रभाव से हरी झंडी दे दी गई है। फास्टैग लेन लागू होने से टोल प्लाजा जैसी व्यवस्था बनेगी जिससे लंबी कतारें पूरी तरह खत्म हो जाएंगी।

स्थानीय नागरिकों को टैक्स से पूरी तरह रियायत मिलेगी। लेन व्यवस्था को सुधारने और ट्रैफिक को बिना रोके आगे बढ़ाने का ब्लूप्रिंट प्रशासन ने तैयार कर लिया है।

लोक निर्माण विभाग (PWD) ने उत्तराखंड के पर्वतीय शहरों और कस्बों को चोक कर रहे ट्रैफिक का स्थायी समाधान निकालने के लिए पहले चरण में सात शहरों को टनल बाईपास परियोजना के लिए चुना है। ज्यादा ट्रैफिक दबाव वाले मुख्य बाजारों से ठीक पहले अंडरग्राउंड टनल का निर्माण होगा। पहाड़ की जटिल भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए इन टनल्स का अलाइनमेंट तय किया जा रहा है। यह नई व्यवस्था भारी वाहनों को बाजार के बाहर से ही दूसरे छोर पर निकाल देगी।

पौड़ी, श्रीनगर, चमोली, लोहाघाट और पिथौरागढ़ को टनल बाईपास के लिए फाइनल किया गया है। गुप्तकाशी बाजार के भारी जाम को खत्म करने के लिए सोनप्रयाग से कालीमठ तक एक अलग अंडरग्राउंड टनल बनाई जाएगी। चमोली के लिए एक बिल्कुल नया और सुगम रूट विकसित करने के वास्ते सोनप्रयाग से सीधे चौमासी तक टनल बनाने की योजना पर भी जमीनी सर्वे तेज हो गया है।

केदारनाथ और बदरीनाथ यात्रा के दौरान हर साल संकरी सड़कों पर हजारों वाहन घंटों तक फंसते हैं। वर्ष 2026 की वर्तमान चारधाम यात्रा में भी लगातार यह समस्या चरम पर दिखी है। इन नई टनल परियोजनाओं के धरातल पर उतरने से दोनों धामों की यात्रा का समय काफी घट जाएगा। पहाड़ों पर भूस्खलन के भारी खतरे के बीच यह भूमिगत टनल सुरक्षित आवागमन का नया विकल्प बनेंगी।

देहरादून से कनेक्टिविटी को आसान बनाने वाली डाटकाली टनल का मॉडल इस नई योजना का तकनीकी आधार बना है। ऑल वेदर रोड प्रोजेक्ट के तहत चंबा शहर के नीचे बनी टनल से वहां जाम की समस्या जड़ से खत्म हो चुकी है। यमुनोत्री हाईवे पर बहुचर्चित सिलक्यारा टनल का निर्माण कार्य भी अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है।

कुछ चुनिंदा टनल प्रोजेक्ट्स का प्रारंभिक सर्वे भूवैज्ञानिकों की टीम के साथ पूरा कर लिया गया है। PWD के एचओडी राजेश शर्मा ने स्पष्ट किया कि राज्य के कस्बों पर वाहनों का लोड उनकी मूल क्षमता से कई गुना अधिक हो चुका है, जिससे हाईवे पर वाहनों की रफ्तार थम जाती है। विभाग ने टनल निर्माण के लिए विस्तृत डीपीआर (DPR) बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बाकी बचे अन्य स्थानों के लिए भी नए सिरे से विभागीय प्लानिंग शुरू की जा रही है।

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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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