आपके किचन में रखा एलपीजी सिलेंडर सिर्फ ईंधन का साधन नहीं, बल्कि जरा सी लापरवाही में एक बड़ा खतरा भी हो सकता है। अधिकांश उपभोक्ता सिलेंडर लेते समय वजन और सील तो चेक करते हैं, लेकिन उसकी री-टेस्टिंग तारीख या ‘एक्सपायरी’ को नजरअंदाज कर देते हैं।
सिलेंडर के ऊपरी हिस्से में हैंडल के पास वाली तीन लोहे की पट्टियों में से एक पर एक विशेष कोड अंकित होता है, जैसे A-26 या C-28। यह कोड दरअसल वह समय सीमा है, जिसके बाद उस सिलेंडर की सुरक्षा जांच (Statutory Testing) अनिवार्य हो जाती है।
भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के कड़े नियमों के मुताबिक, हर सिलेंडर को एक निश्चित समय के बाद प्रेशर टेस्ट से गुजरना पड़ता है। समय बीतने के साथ सिलेंडर की मेटल बॉडी भारी दबाव के कारण कमजोर पड़ने लगती है, जिससे लीकेज या ब्लास्ट की संभावना बढ़ जाती है।
कोड को डिकोड करना सीखें
सिलेंडर पर लिखे अक्षरों का सीधा संबंध महीनों से होता है। साल को चार हिस्सों में बांटा गया है:
A: जनवरी से मार्च तक।
B: अप्रैल से जून तक।
C: जुलाई से सितंबर तक।
D: अक्टूबर से दिसंबर तक।
अक्षरों के बाद लिखे अंक साल बताते हैं। उदाहरण के लिए, यदि सिलेंडर पर B-26 लिखा है, तो इसका मतलब है कि जून 2026 के बाद वह सिलेंडर असुरक्षित श्रेणी में आ जाएगा और उसे टेस्टिंग के लिए भेजा जाना अनिवार्य है।
सुरक्षा का ‘गोल्डन रूल’
सिलेंडर डिलीवर होते समय यदि आपको लगता है कि उस पर दी गई तारीख निकल चुकी है, तो आप उसे लेने से मना कर सकते हैं। तेल कंपनियों के निर्देशानुसार, ग्राहक को एक्सपायर्ड या अनटेस्टेड सिलेंडर की डिलीवरी देना अवैध है। ऐसी स्थिति में तुरंत संबंधित गैस एजेंसी या टोल-फ्री नंबर 1906 पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए।












