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पुराने जमाने की ये एक आदत आपको रखेगी 100 साल तक फिट, विज्ञान ने भी माना इसका लोहा

जमीन पर बैठकर खाना खाने की पारंपरिक भारतीय पद्धति न केवल सांस्कृतिक है, बल्कि विज्ञान के नजरिए से सेहत का पावरहाउस भी है। यह मुद्रा वजन घटाने, पाचन सुधारने और जोड़ों के दर्द को दूर रखने में संजीवनी का काम करती है।

Benefits Of Eating On The Floor

HIGHLIGHTS

  • सुखासन या अर्ध पद्मासन की मुद्रा में बैठने से मेटाबॉलिज्म तेज होता है और मोटापा घटता है।
  • आगे झुककर खाना खाने की प्रक्रिया 'वेगस नर्व' को एक्टिव करती है, जिससे ओवरईटिंग नहीं होती।
  • घुटनों और कूल्हों के जोड़ों की नेचुरल लुब्रिकेशन बनी रहती है, जिससे अर्थराइटिस का खतरा कम होता है।

देहरादून, 05 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। मॉर्डन लाइफस्टाइल और डाइनिंग टेबल के दौर में हम अपनी जड़ों को भूलते जा रहे हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि जमीन पर बैठकर भोजन करना (Benefits Of Eating On The Floor) महज एक ‘आउटडेटेड’ रिवाज नहीं बल्कि लंबी उम्र का फॉर्मूला है।

पुरानी पीढ़ी के लोग डाइनिंग टेबल के बजाय फर्श पर बैठकर भोजन करते थे और यही वजह थी कि उन्हें बुढ़ापे तक घुटनों और रीढ़ की हड्डी की समस्याएं परेशान नहीं करती थीं। आजकल हर तीसरा व्यक्ति जोड़ों के दर्द और खराब डाइजेशन से जूझ रहा है।

मेडिकल साइंस के अनुसार, जब हम जमीन पर सुखासन की मुद्रा में बैठते हैं, तो यह सीधे तौर पर हमारे नर्वस सिस्टम और बॉडी पोस्चर पर सकारात्मक असर डालता है। आइए विस्तार से समझते हैं कि यह छोटी सी आदत आपकी लाइफस्टाइल को कैसे बदल सकती है।

1. नेचुरल वेट लॉस और कैलोरी बर्न

भोजन के लिए जमीन पर बैठना और फिर उठना एक प्रकार का अर्ध पद्मासन या योगिक क्रिया बन जाता है। जब आप इस मुद्रा में होते हैं, तो आपका दिमाग शांत रहता है और आप भोजन को धीरे-धीरे चबाकर खाते हैं।

इससे मस्तिष्क को तृप्ति का संकेत (Satiety signal) जल्दी मिलता है, जिससे आप जरूरत से ज्यादा खाना नहीं खाते। यह प्रक्रिया शरीर में अनावश्यक वसा (Fat) को जमा होने से रोकती है।

2. पाचन तंत्र के लिए वरदान

जमीन पर बैठकर खाते समय हम स्वाभाविक रूप से भोजन उठाने के लिए आगे झुकते हैं और फिर वापस अपनी स्थिति में आते हैं। पेट की मांसपेशियों का यह निरंतर मूवमेंट पाचन रसों (Digestive juices) के स्राव को तेज करता है।

यह गति पेट को संकेत देती है कि वह पाचन के लिए तैयार रहे, जिससे भारी खाना भी आसानी से पच जाता है और गैस या एसिडिटी की समस्या नहीं होती।

3. हार्ट हेल्थ और ब्लड सर्कुलेशन

जब हम कुर्सी पर बैठते हैं, तो रक्त का प्रवाह पैरों की ओर अधिक होता है। इसके विपरीत, जमीन पर पालथी मारकर बैठने से खून का संचार हृदय और पेट के अंगों की तरफ बेहतर होता है।

इससे हृदय पर दबाव कम पड़ता है और धमनियों में रक्त का प्रवाह सुचारू रहता है। बेहतर सर्कुलेशन का मतलब है कि हृदय को भोजन पचाने के लिए अतिरिक्त मेहनत नहीं करनी पड़ती।

4. मांसपेशियों की फ्लेक्सिबिलिटी और दर्द से राहत

इस मुद्रा में बैठने से हमारे पेट, पीठ के निचले हिस्से और कूल्हों की मांसपेशियों में हल्का खिंचाव आता है। यह खिंचाव शरीर को लचीला बनाता है और लंबे समय तक बैठने के कारण होने वाले पीठ दर्द से छुटकारा दिलाता है।

आजकल की डेस्क जॉब्स के कारण होने वाली जकड़न को दूर करने के लिए यह सबसे सरल ‘स्ट्रेचिंग’ एक्सरसाइज है।

घुटनों की उम्र बढ़ाता है यह तरीका

घुटनों के दर्द का एक बड़ा कारण उनका लगातार निष्क्रिय रहना या गलत एंगल पर मुड़ना है। जमीन पर बैठकर भोजन करते समय घुटने पूरी तरह मुड़ते हैं, जिससे उनकी फ्लेक्सिबिलिटी बनी रहती है।

यह जोड़ों के भीतर मौजूद ‘साइनोवियल फ्लूइड’ को सक्रिय रखता है, जो हड्डियों के बीच ग्रीस का काम करता है। इससे भविष्य में अर्थराइटिस या घुटने बदलने की नौबत नहीं आती।


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Gudiya Sagar

गुड़िया सागर 'दून हॉराइज़न' की मल्टीमीडिया और ट्रेंडिंग न्यूज़ प्रोड्यूसर हैं। वे करियर, वायरल खबरों और वीडियो जर्नलिज्म में विशेष विशेषज्ञता रखती हैं। डिजिटल मीडिया के बदलते ट्रेंड्स और युवाओं की पसंद को समझना गुड़िया की सबसे बड़ी ताकत है। सरकारी नौकरियों, शिक्षा और करियर से जुड़ी हर अहम जानकारी वे पूरी फैक्ट-चेकिंग के बाद ही युवाओं तक पहुंचाती हैं। इंटरनेट पर वायरल हो रही भ्रामक खबरों की सच्चाई (Fact Check) सामने लाने और वीडियो फॉर्मेट में निष्पक्ष खबरें पेश करने के लिए गुड़िया को पत्रकारिता जगत में विशेष रूप से जाना जाता है।

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