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जिलाधिकारी सविन बंसल की अनूठी पहल, भीख मांगने वाले बच्चों को मिल रही अब हाईटेक शिक्षा

देहरादून जिला प्रशासन ने भिक्षावृत्ति और कूड़ा बीनने वाले 325 बच्चों को रेस्क्यू कर उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा है। साधु राम इंटर कॉलेज में संचालित राज्य के पहले मॉडल इंटेंसिव केयर सेंटर में इन बच्चों को कंप्यूटर, संगीत और योग के साथ आधुनिक सुविधाएं दी जा रही हैं।

जिलाधिकारी सविन बंसल की अनूठी पहल, भीख मांगने वाले बच्चों को मिल रही अब हाईटेक शिक्षा

HIGHLIGHTS

  • जिला प्रशासन ने अब तक 325 बच्चों को सड़कों से रेस्क्यू कर उनका भविष्य संवारा।
  • मॉडल केयर सेंटर में वातानुकूलित (AC) लाइब्रेरी और आधुनिक फर्नीचर की सुविधा।
  • आसरा, समर्पण और सरफीना एनजीओ के सहयोग से चल रहा है पुनर्वास अभियान।

देहरादून, 07 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन और जिलाधिकारी सविन बंसल की सक्रियता से देहरादून की सड़कों पर भीख मांगने और कूड़ा बीनने वाले बच्चों की जिंदगी में बड़ा बदलाव आया है। साधु राम इंटर कॉलेज में स्थापित प्रदेश का पहला मॉडल इंटेंसिव केयर सेंटर अब इन वंचित बच्चों के लिए आधुनिक शिक्षा और कौशल विकास का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है।

प्रशासन की इस माइक्रो-प्लानिंग का असर अब धरातल पर दिखने लगा है। यहां केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि बच्चों को तकनीक से जोड़ने के लिए कंप्यूटर शिक्षा भी दी जा रही है। मानसिक शांति के लिए योग और रचनात्मकता निखारने के लिए संगीत व खेलकूद की गतिविधियों को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है।

सेंटर का सबसे बड़ा आकर्षण यहां तैयार की गई स्मार्ट लाइब्रेरी है। यह लाइब्रेरी पूरी तरह वातानुकूलित (AC) है, जहां बच्चों के बैठने के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया आरामदायक फर्नीचर लगाया गया है। समुचित प्रकाश व्यवस्था और ज्ञानवर्धक पुस्तकों के संग्रह ने बच्चों में पढ़ने के प्रति एक नया उत्साह पैदा किया है। आने वाले आगंतुक भी सरकारी व्यवस्था के इस कॉर्पोरेट स्टाइल मेकओवर की सराहना कर रहे हैं।

इस पूरी मुहिम के पीछे एक सघन रेस्क्यू ऑपरेशन और काउंसलिंग प्रक्रिया शामिल है। सड़कों पर भटकते बच्चों को पहले ट्रेस किया जाता है, फिर उनकी काउंसलिंग कर उन्हें अक्षर ज्ञान और तकनीकी कौशल से जोड़ा जाता है। इसके बाद इन बच्चों का औपचारिक स्कूलों में दाखिला कराया जा रहा है ताकि वे समाज की मुख्यधारा का स्थाई हिस्सा बन सकें।

आंकड़ों की बात करें तो जिला प्रशासन ने अब तक कुल 325 बच्चों को रेस्क्यू किया है। इसमें 91 बच्चे ऐसे थे जो भिक्षावृत्ति में लिप्त थे, जबकि 97 बच्चे बाल मजदूरी और 137 बच्चे कूड़ा बीनने के काम में लगे हुए थे। वर्तमान में इस विशेष इंटेंसिव केयर सेंटर में 25 बच्चों को सघन प्रशिक्षण और शिक्षा दी जा रही है।

इस प्रोजेक्ट के सफल संचालन के लिए जिला प्रशासन ने स्वैच्छिक समूहों—आसरा, समर्पण और सरफीना के साथ एमओयू (MoU) साइन किया है। केंद्र की नियमित मॉनिटरिंग खुद जिलाधिकारी कार्यालय द्वारा की जाती है और इसका पूरा वित्तीय भार जिला प्रशासन स्वयं उठा रहा है। बच्चों के शारीरिक स्वास्थ्य के लिए आरबीएसके (RBSK) की टीम नियमित अंतराल पर हेल्थ चेकअप भी करती है।

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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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