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उत्तराखंड : अस्पताल पहुंचे परिजनों के उड़े होश, मूक-बधिर नाबालिग निकली गर्भवती; पुलिस सुरक्षा में इलाज जारी

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Harpreet Singh Updated Fri, 25 Sep 2026 07:34 PM IST

पिथौरागढ़ में बीमारी के इलाज के लिए जिला अस्पताल लाई गई मूक-बधिर किशोरी के गर्भवती होने का खुलासा हुआ है। पुलिस ने पीड़िता को सुरक्षा देकर जांच शुरू कर दी है।

Pithoragarh Divyang Minor Pregnant Case

मुख्य बातें

  • जिला अस्पताल में जांच के दौरान मूक-बधिर किशोरी गर्भवती पाई गई।
  • 24 सितंबर को तबीयत बिगड़ने के बाद परिजन अस्पताल लेकर पहुंचे थे।
  • पिथौरागढ़ पुलिस ने पीड़िता को तत्काल सुरक्षा कवर (Police Protection) मुहैया कराया।
  • मामले की पड़ताल के लिए उपनिरीक्षक बबीता टम्टा को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया।
  • परिजनों की तहरीर के बिना भी पुलिस नियमानुसार जीरो एफआईआर दर्ज करेगी।

दून हॉराइज़न, पिथौरागढ़ (25 सितंबर) : उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ में मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाला एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। यहां बोलने में असमर्थ और गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से जूझ रही एक नाबालिग किशोरी के गर्भवती होने की पुष्टि हुई है। परिजन उसे रूटीन इलाज समझकर अस्पताल लाए थे, लेकिन मेडिकल रिपोर्ट सामने आते ही उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। घटना की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचना दी।

अस्पताल की जांच में खुला खौफनाक राज

मिली जानकारी के मुताबिक पीड़ित किशोरी मूक-बधिर (Hearing and Speech Impaired) है और उसे अक्सर मिर्गी के दौरे पड़ते हैं। बीते 24 सितंबर को अचानक उसकी शारीरिक स्थिति बिगड़ने लगी। अत्यधिक पेट दर्द और कमजोरी की शिकायत पर परिजन घबराकर उसे सीधे पिथौरागढ़ जिला चिकित्सालय ले गए।

डॉक्टरों ने जब प्राथमिक जांच के बाद आवश्यक मेडिकल और अल्ट्रासाउंड टेस्ट किए, तो किशोरी के गर्भवती होने का पता चला। यह खबर सुनते ही अस्पताल परिसर में मौजूद परिजन गहरे सदमे में आ गए। किसी को अंदाजा नहीं था कि बीमारी की आड़ में बच्ची के साथ इतना घिनौना कृत्य हुआ होगा।

पुलिस एक्शन: अस्पताल में सुरक्षा और जांच टीम गठित

अस्पताल प्रबंधन की आपात सूचना मिलते ही पिथौरागढ़ कोतवाली पुलिस तुरंत हरकत में आई। पुलिस अधिकारियों की एक टीम फौरन जिला अस्पताल पहुंची और ड्यूटी डॉक्टरों के साथ-साथ परिजनों से बंद कमरे में प्राथमिक बातचीत की।

पिथौरागढ़ के कोतवाल ललित मोहन जोशी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उपनिरीक्षक (Sub-Inspector) बबीता टम्टा को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। चूंकि पीड़िता विशेष रूप से सक्षम है और सदमे में है, इसलिए विशेषज्ञों व काउंसलर्स की मदद लेने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है ताकि कानूनी बयान दर्ज करने में आसानी हो।

जीरो एफआईआर और कानूनी प्रक्रिया

परिजनों के गहरे सदमे में होने के कारण कोतवाली में अभी तक कोई औपचारिक लिखित तहरीर नहीं दी गई है। हालांकि, कानूनन ऐसे मामलों में पुलिस शिकायत का इंतजार नहीं कर सकती। कोतवाल ललित मोहन जोशी ने स्पष्ट किया कि मामले में नियमानुसार तुरंत जीरो एफआईआर (Zero FIR) दर्ज करने की कार्रवाई की जा रही है, जिससे जांच में कोई कानूनी अड़चन न आए।

सुरक्षा के लिहाज से पीड़िता को अस्पताल में ही 24 घंटे का पुलिस पहरा उपलब्ध कराया गया है। अज्ञात आरोपी की शिनाख्त के लिए पुलिस परिजनों की सामान्य दिनचर्या और हाल के दिनों में किशोरी के संपर्क में आए लोगों का ब्योरा जुटा रही है।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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