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Uttarakhand : सरकारी डॉक्टर अब शाम को सरकारी अस्पताल में देख सकेंगे निजी मरीज, मिली छूट

उत्तराखंड सरकार ने सरकारी डॉक्टरों को शाम के वक्त सरकारी अस्पतालों के भीतर ही न्यूनतम फीस पर निजी प्रैक्टिस करने की सशर्त अनुमति देने की तैयारी कर ली है। इस नई नीति के तहत डॉक्टरों को बाहर की दवा लिखने पर रोक रहेगी और सभी जरूरी ऑपरेशन सरकारी अस्पताल परिसर में ही करने होंगे।

Uttarakhand government doctors permitted private practice in hospitals in evening

HIGHLIGHTS

  • सरकारी अस्पतालों में शाम को निजी प्रैक्टिस की छूट
  • मरीजों से ली जाने वाली फीस न्यूनतम तय होगी
  • बाहर की दवा लिखने पर पूरी तरह पाबंदी
  • सभी जरूरी ऑपरेशन केवल सरकारी अस्पताल में होंगे

दून हॉराइज़न, देहरादून (20 अगस्त 2026): उत्तराखंड के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं के ढांचे को दुरुस्त करने के लिए सरकार ने डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस को लेकर बड़ा नीतिगत बदलाव किया है। सरकारी डॉक्टरों को अब शाम के समय सरकारी अस्पताल परिसर के भीतर ही बैठकर निजी प्रैक्टिस करने की छूट दी जा रही है।

राज्य में लंबे समय से सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर पूरी तरह रोक लगी हुई थी। इस रोक की एवज में चिकित्सा अधिकारियों को उनके मासिक वेतन के साथ नॉन प्रैक्टिस अलाउंस यानी एनपीए का नियमित भुगतान किया जाता है।

स्वास्थ्य विभाग की जांच और ग्राउंड रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया कि एनपीए लेने के बावजूद कई चिकित्सक गुपचुप तरीके से अपने निजी आवासों या बाहरी निजी क्लीनिकों में प्रैक्टिस कर रहे थे। इस अनियंत्रित व्यवस्था पर लगाम लगाने के लिए प्रशासन ने अब डॉक्टरों को अस्पताल के भीतर ही शाम के समय अधिकृत रूप से मरीज देखने का विकल्प दिया है।

यह पूरी व्यवस्था चिकित्सकों के लिए अनिवार्य नहीं बल्कि पूरी तरह ऐच्छिक रखी गई है। जो डॉक्टर शाम को अस्पताल में अपनी सेवाएं देना चाहेंगे, उन्हें मरीजों से केवल शासन द्वारा निर्धारित न्यूनतम परामर्श शुल्क लेने की इजाजत होगी।

स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय विभागीय बैठक में इस नीतिगत मसौदे को मंजूरी दी गई। स्वास्थ्य विभाग इस प्रस्ताव को अंतिम मुहर के लिए जल्द ही राज्य कैबिनेट की बैठक में पेश करने जा रहा है।

प्रस्तावित नियमों के तहत तीन बेहद सख्त शर्तें लागू की गई हैं। चिकित्सक किसी भी मरीज को बाहर की दवा नहीं लिखेंगे और अस्पताल में उपलब्ध दवाएं ही दी जाएंगी।

इलाज के दौरान यदि किसी मरीज को सर्जरी या किसी बड़े चिकित्सीय प्रोसीजर की आवश्यकता पड़ती है, तो वह ऑपरेशन अनिवार्य रूप से उसी सरकारी अस्पताल में किया जाएगा। किसी भी डॉक्टर को अस्पताल परिसर से बाहर निजी क्लीनिक संचालित करने की छूट नहीं मिलेगी।

पर्वतीय और दूरदराज के क्षेत्रों में दोपहर 2 बजे ओपीडी का समय समाप्त होते ही सरकारी अस्पताल पूरी तरह खाली हो जाते थे। 2 बजे के बाद आने वाले मरीजों को आपातकालीन स्थिति में या तो निजी डॉक्टरों के महंगे क्लीनिकों का रुख करना पड़ता था या बिना इलाज लौटना पड़ता था।

अस्पतालों की खाली पड़ी इमारतों और संसाधनों का शाम के समय पूरा उपयोग होगा। दूरदराज के कस्बों और गांवों से आने वाले सामान्य मरीजों को शाम के वक्त भी सरकारी अस्पताल की चौखट पर विशेषज्ञ डॉक्टरों का परामर्श बेहद कम खर्च पर मिल सकेगा।

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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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