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Uttarakhand Madrasa : उत्तराखंड के 400 मदरसों को बड़ी राहत, अब जिला स्तर पर ही मिल जाएगी मान्यता

उत्तराखंड सरकार ने राज्य के 400 मदरसों को बड़ी राहत देते हुए कक्षा 1 से 8 तक की मान्यता प्रक्रिया को जिला स्तर पर सरल कर दिया है। धामी कैबिनेट ने अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम में संशोधन के लिए अध्यादेश लाने की मंजूरी दे दी है, जिससे अब इन मदरसों को रामनगर बोर्ड की अनिवार्य संबद्धता से छूट मिल गई है।

Uttarakhand Madrasa : उत्तराखंड के 400 मदरसों को बड़ी राहत, अब जिला स्तर पर ही मिल जाएगी मान्यता

HIGHLIGHTS

  • कक्षा 1 से 8 तक के मदरसों को अब जिला स्तरीय शिक्षा समिति से मान्यता मिल सकेगी।
  • केवल कक्षा 9 से 12 तक संचालित होने वाले 52 मदरसों के लिए विद्यालयी शिक्षा परिषद, रामनगर से संबद्धता अनिवार्य होगी।
  • उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम-2025 में संशोधन के लिए सरकार अध्यादेश लाएगी।

देहरादून, 30 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश में संचालित 452 मदरसों के लिए मान्यता के नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए करीब 400 संस्थानों को राहत दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में निर्णय लिया गया कि कक्षा 1 से 8 तक संचालित होने वाले मदरसों को अब विद्यालयी शिक्षा परिषद, रामनगर के चक्कर नहीं काटने होंगे। इन मदरसों को अब जिला स्तरीय शिक्षा समिति या शासन द्वारा तय सक्षम अधिकारी के स्तर से ही मान्यता मिल जाएगी।

अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा तैयार इस प्रस्ताव को कैबिनेट ने अपनी मुहर लगा दी है। सरकार अब ‘उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम-2025’ में संशोधन के लिए जल्द ही एक अध्यादेश लाएगी। इस फैसले से उन छोटे मदरसों को बड़ी प्रशासनिक सुविधा मिलेगी जो केवल प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर तक ही शिक्षा प्रदान कर रहे हैं।

अधिनियम में संशोधन की क्यों पड़ी जरूरत?

अक्टूबर 2025 में अधिसूचित किए गए ‘उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम’ के तहत पहले सभी अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों (कक्षा 1 से 12 तक) के लिए विद्यालयी शिक्षा परिषद, रामनगर से संबद्धता लेना अनिवार्य किया गया था। हालांकि, राज्य के 452 पंजीकृत मदरसों में से लगभग 400 मदरसे ऐसे हैं जहां केवल कक्षा 8 तक की ही पढ़ाई होती है। इन मदरसों की व्यावहारिक दिक्कतों और उनके अनुरोध को देखते हुए सरकार ने नियमों को लचीला बनाने का निर्णय लिया है।

अधिकारियों का पक्ष और नई व्यवस्था

अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में राज्य में केवल 52 मदरसे ऐसे हैं जो कक्षा 12 तक संचालित हो रहे हैं। इन 52 संस्थानों को अनिवार्य रूप से रामनगर बोर्ड (शिक्षा परिषद) से संबद्धता लेनी होगी। शेष 400 मदरसों के लिए जिला स्तरीय व्यवस्था लागू होगी।

डॉ. धकाते के अनुसार, अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण एक ‘अंब्रेला बॉडी’ के रूप में कार्य करता है, जो सभी छह अल्पसंख्यक समुदायों के संस्थानों की उत्कृष्टता और मान्यता की निगरानी करता है। नई व्यवस्था के तहत जैसे ही मान्यता के आवेदन प्राप्त होंगे, उनका निस्तारण जिला स्तर पर तत्काल प्रभाव से किया जाएगा।

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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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