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Uttarakhand SIR : 19 लाख विसंगतियों पर बूथ स्तर पर होगी सुनवाई, 15 सितंबर को आएगी अंतिम सूची

उत्तराखंड में एसआईआर के तहत अंतिम वोटर लिस्ट की विसंगतियों को दूर करने के लिए बूथ स्तर पर आपत्तियों की सुनवाई शुरू कर दी गई है। राज्य में 19 लाख से अधिक मतदाताओं के विवरण में गड़बड़ी मिलने के बाद नोटिस जारी किए जा रहे हैं, और अंतिम वोटर लिस्ट 15 सितंबर को प्रकाशित की जाएगी।

Uttarakhand SIR : 19 लाख विसंगतियों पर बूथ स्तर पर होगी सुनवाई, 15 सितंबर को आएगी अंतिम सूची

HIGHLIGHTS

  • उत्तराखंड में 19 लाख से ज्यादा वोटरों के विवरण में विसंगतियां।
  • आपत्तियों की सुनवाई और समाधान सीधे बूथ स्तर पर होगा।
  • अंतिम वोटर सूची सीईओ कार्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध है।
  • अंतिम वोटर लिस्ट का प्रकाशन आगामी 15 सितंबर को होगा।

देहरादून, 31 जुलाई, 2026 (दून हॉराइज़न)।

Uttarakhand SIR : उत्तराखंड में विशेष मतदाता पुनरीक्षण यानी एसआईआर के तहत अनंतिम वोटर लिस्ट पर मिलने वाली आपत्तियों की सुनवाई और उनका समाधान सीधे बूथ स्तर पर ही किया जाएगा। बूथ लेवल ऑफिसर के फैसले से असंतुष्ट होने की स्थिति में सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी, जिला निर्वाचन अधिकारी और मुख्य निर्वाचन अधिकारी के स्तर तक अपील करने का पूरा प्रावधान तय किया गया है।

अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय जोगदंडे ने एसआईआर की अब तक की प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक करते हुए बताया कि राज्यभर में इस प्रक्रिया के दौरान 19 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम, उम्र और अन्य विभिन्न विवरणों में गंभीर विसंगतियां पाई गई हैं। इन सभी मामलों में संबंधित मतदाताओं को औपचारिक रूप से नोटिस जारी करने की कार्रवाई तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है।

मैदानी क्षेत्रों के मतदाताओं की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए बूथ स्तर पर या फिर बूथ के बेहद नजदीक विशेष कैंप आयोजित करने के स्पष्ट निर्देश सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों और निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों को दे दिए गए हैं। नोटिस की सुनवाई के दौरान बूथों पर बीएलओ के साथ अन्य संबंधित कर्मचारी भी अनिवार्य रूप से मौजूद रहेंगे ताकि दस्तावेजों की जांच में कोई विलंब न हो।

बीएलओ मतदाता के सभी जरूरी दस्तावेजों की बारीकी से जांच करने के बाद अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेंगे। नोटिस मिलने वाले व्यक्तियों को अपने तमाम मूल दस्तावेज और जवाब सीधे बूथ पर ही जमा कराने होंगे ताकि वोटर लिस्ट को समय रहते पूरी तरह दुरुस्त किया जा सके।

राज्य के सभी मतदान केंद्रों पर अनंतिम वोटर लिस्ट पहले ही उपलब्ध कराई जा चुकी है। इसके अलावा कोई भी नागरिक मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की आधिकारिक वेबसाइट http://www.ceo.uk.gov.in पर जाकर ऑनलाइन माध्यम से भी पूरी ड्राफ्ट वोटर सूची की जांच कर सकता है।

नए मतदाताओं के नाम सूची में जुड़वाने के लिए फार्म-6 भरना होगा जबकि किसी भी प्रकार की त्रुटि के सुधार के लिए फार्म-7 या फार्म-8 भरकर सीधे अपने क्षेत्र के बीएलओ के पास जमा कराना होगा। मतदाता अपने दावे और आपत्तियां आगामी 13 अगस्त तक दर्ज करा सकेंगे।

एसआईआर प्रक्रिया पूरी होने के बाद पिछले महीने की 14 तारीख को जारी की गई अनंतिम वोटर लिस्ट के आंकड़ों के मुताबिक राज्य में वर्तमान समय में कुल 71 लाख 33 हजार 785 वोटर दर्ज हैं। इन कुल मतदाताओं में से लगभग 5.26 लाख मतदाता अनमैप की श्रेणी में शामिल हैं।

यदि कोई नागरिक बूथ लेवल ऑफिसर के निर्णय से किसी भी प्रकार की असहमति जताता है तो वह सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी के समक्ष अपनी अपील प्रस्तुत कर सकता है। एईआरओ के फैसले के खिलाफ अगले 15 दिनों के भीतर जिला निर्वाचन अधिकारी कार्यालय में अपील दाखिल की जा सकती है।

यदि जिला निर्वाचन अधिकारी के स्तर पर भी मामले में संतोषजनक सहमति नहीं बन पाती है तो पीड़ित पक्ष को आगामी 30 दिनों के भीतर मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय में अपील करनी होगी। नियमों के अनुसार एसआईआर से जुड़े सभी स्तरों पर एक सप्ताह के भीतर ही अपील का अंतिम निस्तारण करना अनिवार्य होगा।

वोटर लिस्ट की तमाम विसंगतियों को दूर करने के लिए चलाए जा रहे एसआईआर के इस दूसरे चरण में प्रदेश के नौ जिलों के भीतर प्रशासनिक कार्रवाई की रफ्तार काफी धीमी बनी हुई है। इन सुस्त जिलों में 4.7 प्रतिशत से लेकर अधिकतम 39.9 प्रतिशत मतदाताओं को ही अभी तक नोटिस जारी किए जा सके हैं।

विभागीय आंकड़ों के अनुसार आपत्तियां और सुझाव दर्ज कराने के लिए अब केवल 14 दिन का सीमित वक्त ही शेष बचा है। इतने कम दिनों के भीतर बीस लाख से ज्यादा मतदाताओं को नोटिस तामील कराकर उनके दावे और आपत्तियां समेटना विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।

विवरण विसंगति वाले 19 लाख और अनमैप श्रेणी के 5.25 लाख वोटरों को मिलाकर कुल 24.29 लाख मतदाताओं में से अभी तक बमुश्किल चार लाख लोगों को ही नोटिस जारी हो पाए हैं। अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने स्पष्ट किया है कि नोटिस जारी करने की इस सुस्त प्रक्रिया को अब एक बड़े अभियान की तर्ज पर तेज करने के कड़े निर्देश जारी किए गए हैं।

समीक्षा के दौरान सामने आया है कि अल्मोड़ा, चंपावत और पौड़ी जिलों में नोटिस बांटने का काम सबसे तेज गति से आगे बढ़ रहा है। इसके विपरीत रुद्रप्रायग, टिहरी और उत्तरकाशी जैसे पहाड़ी जिले इस मामले में काफी पीछे चल रहे हैं।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि देहरादून, हरिद्वार, उधम सिंह नगर और नैनीताल जैसे भौगोलिक रूप से अपेक्षाकृत सुगम और मैदानी जिलों में भी नोटिस जारी करने की औसत गति बेहद धीमी पाई गई है।

पहचान पत्र के सत्यापन के लिए सरकार, पीएसयू कर्मचारी और पेंशनभोगियों को जारी किए गए आधिकारिक पहचान पत्र या फिर पेंशन भुगतान पत्र को पूरी तरह मान्य किया गया है। इसके अलावा एक जुलाई 1987 से पहले सरकार, स्थानीय प्राधिकरण, बैंक, डाकघर, एलआईसी या पीएसयू द्वारा जारी किए गए वैध पहचान पत्र और प्रमाणपत्र भी स्वीकार किए जाएंगे।

सक्षम प्राधिकारी की तरफ से जारी जन्म प्रमाण पत्र, भारत का वैध पासपोर्ट, किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड या विश्वविद्यालय से प्राप्त हाईस्कूल व अन्य शैक्षिक प्रमाणपत्र सत्यापन के लिए मान्य होंगे।

सक्षम राज्य प्राधिकारी द्वारा जारी स्थायी निवास प्रमाणपत्र, वन अधिकार प्रमाणपत्र, ओबीसी, एससी तथा एसटी वर्ग से संबंधित प्रमाणपत्र भी वैध माने जाएंगे।

राष्ट्रीय परिवार रजिस्टर, राज्य का आधिकारिक सरकारी परिवार रजिस्टर तथा सरकार की ओर से जारी भूमि या मकान आवंटन से जुड़ा प्रमाणपत्र भी मतदाता पहचान के सत्यापन के लिए पूरी तरह वैध दस्तावेज माना गया है।

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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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