दून हॉराइज़न, देहरादून (18 अगस्त 2026): उत्तराखंड में शिक्षा विभाग और अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता न लेने वाले मदरसों पर तालाबंदी की सीधी तैयारी शुरू हो गई है। राज्य सरकार ने सभी गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों को सितंबर 2026 तक हर हाल में वैधानिक मान्यता प्रक्रिया पूरी करने की अंतिम चेतावनी दी है। निर्धारित समयसीमा समाप्त होते ही बिना मान्यता संचालित संस्थानों को पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा।
उत्तराखंड वक्फ बोर्ड (Uttarakhand Waqf Board) के अध्यक्ष शादाब शम्स ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट किया है कि जो प्रबंधन कमेटियां पंजीकरण और मान्यता की प्रक्रिया में हीलाहवाली करेंगी, उन्हें तत्काल प्रभाव से भंग किया जाएगा। बोर्ड की आगामी बैठक में ऐसी लापरवाह कमेटियों को हटाकर उनकी जगह नई प्रबंधन कमेटियों को जिम्मेदारी सौंपने का आधिकारिक प्रस्ताव लाया जा रहा है।
प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार उत्तराखंड में कुल 452 मदरसे संचालित हैं। इनमें से 117 मदरसे सीधे तौर पर वक्फ बोर्ड की संपत्तियों पर चल रहे हैं। वक्फ संपत्तियों पर काबिज इन सभी 117 मदरसों को बोर्ड के साथ विधिवत पंजीकरण कराने के सख्त निर्देश जारी किए जा चुके हैं।
पूरे राज्य में अब तक महज 60 मदरसों ने अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के समक्ष मान्यता के लिए औपचारिक आवेदन दाखिल किया है। 392 मदरसों ने अब तक अनिवार्य मानकों को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया है, जिस पर बोर्ड ने कड़ा रुख अपनाया है।
बच्चों के भविष्य की सुरक्षा को इस प्रशासनिक सख्ती की मुख्य वजह बताया गया है। मदरसों में पारंपरिक धार्मिक तालीम के साथ-साथ आधुनिक वैज्ञानिक शिक्षा का समावेश अनिवार्य किया जा रहा है। इसका मकसद मदरसों से हाफिज तैयार करने के साथ-साथ डॉक्टर, इंजीनियर और प्रशासनिक अधिकारी बनने की राह खोलना है।
उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी ने वक्फ बोर्ड अध्यक्ष से मुलाकात कर पंजीकरण प्रक्रिया की मौजूदा स्थिति की समीक्षा की है। दोनों अधिकारियों के बीच मदरसों को मुख्यधारा की शिक्षा प्रणाली से जोड़ने और नई व्यवस्था को तेजी से लागू करने को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ है।
दूसरी तरफ, पूर्व मदरसा बोर्ड के भंग होने के बाद अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण में कार्यरत पुराने कर्मचारियों के समायोजन और वेतन का संकट भी सामने आया है। इन कर्मचारियों को जुलाई 2026 से मानदेय या वेतन का भुगतान नहीं हुआ है। अल्पसंख्यक निदेशक दीप्ति सिंह ने कर्मचारियों के स्थायी समायोजन और नए संगठनात्मक ढांचे की संस्तुति शासन को भेज दी है।
विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने आश्वासन दिया है कि कर्मचारियों के समायोजन की प्रशासनिक प्रक्रिया बहुत जल्द पूरी कर ली जाएगी। पूर्व मदरसा बोर्ड में निदेशक, उप रजिस्ट्रार, निरीक्षक, उर्दू अनुवादक, लेखाकार, पांच कनिष्ठ सहायक, दो अनुसेवक और एक चौकीदार कम स्वीपर के पद स्वीकृत थे। वर्तमान में निरीक्षक और एक कनिष्ठ सहायक का पद रिक्त चल रहा है, जिसे देखते हुए नए पदों के सृजन पर भी शासन स्तर पर मंथन जारी है।
वक्फ बोर्ड अध्यक्ष ने पाकिस्तानी हुक्मरानों की बयानबाजी को भी सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय मुसलमान पूरी तरह से अपने मुल्क और संविधान के प्रति समर्पित हैं, इसलिए पाकिस्तान को भारत के मुसलमानों का पैरोकार बनने का दिखावा बंद करना चाहिए।













