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Bageshwar School Ghost Temple : बागेश्वर के स्कूल में बना ‘भूत’ का मंदिर, अंधविश्वास की हद देख दंग रह गई डीएम

बागेश्वर के कौसानी स्थित राजकीय इंटर कॉलेज में 'भूत मंदिर' के निर्माण पर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। 35 साल पुराने अंधविश्वास के नाम पर बच्चों से चंदा वसूलकर यह ढांचा खड़ा किया गया है।

Bageshwar School Ghost Temple : बागेश्वर के स्कूल में बना 'भूत' का मंदिर, अंधविश्वास की हद देख दंग रह गई डीएम

HIGHLIGHTS

  • स्कूल परिसर में नेपाली मजदूर की आत्मा के डर से मंदिर निर्माण का आरोप।
  • छात्रों से 100-100 रुपये वसूलकर कुल 21,800 रुपये जुटाए गए।
  • जिलाधिकारी ने मुख्य शिक्षा अधिकारी को मौके पर जाकर जांच के आदेश दिए।

बागेश्वर, 07 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के कौसानी में एक सरकारी स्कूल के भीतर कथित तौर पर ‘भूत मंदिर’ बनाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिस पर जिलाधिकारी आकांक्षा कोंडे ने कड़ा संज्ञान लिया है। राजकीय इंटर कॉलेज कौसानी के परिसर में अंधविश्वास की जड़ों ने इस कदर पैठ बना ली कि वहां एक मंदिरनुमा ढांचा खड़ा कर दिया गया।

जिलाधिकारी ने इस पूरे प्रकरण को शिक्षा के मंदिर की गरिमा के खिलाफ बताते हुए मुख्य शिक्षा अधिकारी (CEO) को खुद मौके पर जाकर जांच करने के सख्त निर्देश दिए हैं। प्रशासन को मिली शिकायत के मुताबिक, स्कूल में पढ़ने वाले मासूम बच्चों से ही इस निर्माण के लिए 100-100 रुपये की वसूली की गई थी।

आंकड़ों के मुताबिक, बच्चों से डरा-धमकाकर लगभग 21,800 रुपये एकत्र किए गए और फिर स्कूल परिसर में उस ढांचे का निर्माण शुरू हुआ। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि करीब 35 साल पहले स्कूल के पास ही एक नेपाली मजदूर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी।

दावा किया जा रहा है कि उसी मजदूर की ‘आत्मा’ का खौफ दिखाकर बच्चों और अभिभावकों को मानसिक रूप से प्रभावित किया गया। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि कुछ लोगों ने गुपचुप तरीके से स्कूल परिसर के पास बलि देना भी शुरू कर दिया था, जिसे प्रशासन ने सामाजिक माहौल बिगाड़ने वाली गतिविधि माना है।

अभिभावक संघ के अध्यक्ष चंदन भंडारी ने इस निर्माण को सही ठहराते हुए तर्क दिया कि बच्चों में डर का माहौल था, जिसे दूर करने के लिए बैठक के बाद यह फैसला लिया गया। भंडारी का दावा है कि मंदिर बनने और पूजा-पाठ के बाद अब बच्चे सुरक्षित महसूस कर रहे हैं और वसूली गई राशि का इस्तेमाल निर्माण कार्य में ही हुआ है।

दूसरी ओर, जिले की मुखिया आकांक्षा कोंडे ने स्पष्ट किया है कि स्कूलों में इस तरह की गतिविधियां न केवल शैक्षणिक माहौल खराब करती हैं, बल्कि बच्चों के कोमल मन पर नकारात्मक असर डालती हैं। डीएम ने चेतावनी दी है कि यदि जांच में किसी भी शिक्षक या अधिकारी की लापरवाही सामने आई, तो उनके खिलाफ तत्काल कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

शिक्षा विभाग को निर्देशित किया गया है कि वे स्कूलों में जागरूकता अभियान चलाएं ताकि अफवाहों और अंधविश्वास को जड़ से खत्म किया जा सके। फिलहाल, पूरे कौसानी क्षेत्र में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है कि आधुनिक शिक्षा के दौर में भी सरकारी संस्थानों के भीतर ‘भूत-प्रेत’ के नाम पर वसूली और निर्माण कैसे संभव हुआ।

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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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