देहरादून, 01 अप्रैल (दून हॉराइज़न)। राजभवन के लोक भवन परिसर में बुधवार को एक गरिमामयी समारोह आयोजित किया गया, जहां सितंबर 2025 की विनाशकारी आपदा में जान की बाजी लगाने वाले अफसरों और कर्मचारियों का सम्मान हुआ। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने इन कर्मवीरों की कर्तव्यनिष्ठा को पूरे प्रदेश के प्रशासनिक अमले के लिए प्रेरणा का केंद्र बताया।
सहस्त्रधारा-कार्लीगाड बेल्ट में 15 और 16 सितंबर 2025 की उस भयावह रात को कोई नहीं भूल सकता, जब बादल फटने के बाद मलबे और पानी के सैलाब ने रिहायशी इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया था। उस वक्त प्रशासनिक मशीनरी ने जिस तत्परता से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया, उसने न केवल जनहानि को कम किया बल्कि रिकवरी के मामले में नए मानक स्थापित किए।

राज्यपाल ने इस ऐतिहासिक राहत कार्य के पीछे जिलाधिकारी सविन बंसल के विजन और लीडरशिप की विशेष रूप से प्रशंसा की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि एक ‘फ्रंटलाइन लीडर’ के तौर पर बंसल ने चुनौतियों के बीच जिस तरह टीम को प्रेरित किया और समन्वय बिठाया, वह काबिले तारीफ है। अधिकारियों के मनोबल को बढ़ाने की इस पहल को भविष्य की आपदाओं के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच माना जा रहा है।


सम्मानित होने वाली सूची में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह से लेकर ग्राउंड जीरो पर तैनात लाइनमैन तक शामिल रहे। राज्यपाल ने अपर जिलाधिकारी कृष्ण कुमार मिश्रा, उप जिलाधिकारी हर गिरि और अपर उप जिलाधिकारी (न्यायिक) कुमकुम जोशी को उनकी सक्रियता के लिए पदक और प्रशस्ति पत्र भेंट किए। आपदा की घड़ी में कानून व्यवस्था और सुरक्षा के मोर्चे पर डटे पुलिस उपाधीक्षक मनोज कुमार असवाल भी सम्मानितों में प्रमुख रहे।

चिकित्सा और सूचना विभाग के योगदान को भी रेखांकित किया गया। वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. एम.ए. भट्ट, कनिष्ठ सहायक (सूचना) इंद्रेश कोठारी, यूपीसीएल के लाइनमैन अमन और लोक निर्माण विभाग के कनिष्ठ अभियंता प्रदीप शाही को उनके समर्पण के लिए मंच पर स्थान मिला। राज्यपाल ने जोर दिया कि आपदा के वक्त अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना समाज की सेवा करना ही सबसे बड़ा राष्ट्रधर्म है।
समारोह के दौरान सचिव राज्यपाल रविनाथ रामन और अपर सचिव रीना जोशी ने भी टीम की कार्यप्रणाली पर संतोष व्यक्त किया। इस सम्मान समारोह ने स्पष्ट संदेश दिया कि संकट के समय मैदान में उतरने वाले हर हाथ की पहचान सरकार और राजभवन के पास सुरक्षित है। कार्यक्रम के अंत में राज्यपाल ने आपदा प्रबंधन और ‘अर्ली वार्निंग सिस्टम’ को और अधिक सशक्त करने की आवश्यकता पर बल दिया।









