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Uttarkashi Dev Doli Dispute : सोमेश्वर देवता की डोली यात्रा में भेदभाव का आरोप, उत्तरकाशी कोर्ट पहुंचे ग्रामीण

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Harpreet Singh Updated Wed, 27 May 2026 04:49 PM IST

उत्तरकाशी के भराण गांव में गंगा दशहरे पर सोमेश्वर देवता की देव डोली यात्रा में दलित समाज को शामिल होने से रोकने पर गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। इससे नाराज होकर पीड़ित पक्ष के लोग कानूनी मदद के लिए जिला न्यायालय पहुंचे और सामाजिक भेदभाव जारी रहने पर धर्म परिवर्तन करने की चेतावनी दी।

Uttarkashi Dev Doli Dispute : सोमेश्वर देवता की डोली यात्रा में भेदभाव का आरोप, उत्तरकाशी कोर्ट पहुंचे ग्रामीण

मुख्य बातें

  • गंगा दशहरे पर गंगोत्री धाम जाने वाली सोमेश्वर देवता की डोली में दलित समाज को शामिल करने पर कुछ ग्रामीणों ने आपत्ति जताई।
  • पीड़ित पक्ष ने जिला बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं से मुलाकात कर याचिका दायर करने की मांग की, जिसके बाद वकीलों ने मध्यस्थता की।
  • मामले के तूल पकड़ने पर गांव में पंचायत बुलाई गई, जहां भविष्य के सभी सार्वजनिक कार्यक्रमों में सभी वर्गों की भागीदारी का निर्णय लिया गया।

उत्तरकाशी, 27 मई 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के अंतर्गत आने वाले भराण गांव में गंगा दशहरे के पावन अवसर पर पारंपरिक देव डोली यात्रा के दौरान सामाजिक भेदभाव (Uttarkashi Dev Doli Dispute) का एक गंभीर मामला सामने आया है। गांव के आराध्य सोमेश्वर देवता की देव डोली को गंगोत्री धाम ले जाने के आयोजन में दलित समाज के लोगों को शामिल होने से कथित रूप से रोका गया।

इस घटना से आक्रोशित होकर पीड़ित समाज के लोग सोमवार देर शाम कानूनी सहायता के लिए जिला मुख्यालय स्थित न्यायालय परिसर पहुंचे। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें अपने ही आराध्य की पूजा करने से वंचित किया जा रहा है और यदि यह भेदभाव बंद नहीं हुआ, तो वे धर्म परिवर्तन करने के साथ ही अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।

चंदे की रकम और भागीदारी को लेकर उपजा विवाद

परंपरा के अनुसार, गंगा दशहरा पर भराण गांव से सोमेश्वर देवता की डोली गंगोत्री धाम जाती है। इस बार इस धार्मिक अनुष्ठान के आयोजन के लिए गांव के प्रत्येक परिवार से 400 रुपये की सहयोग राशि (चंदा) एकत्रित की जा रही थी। जब दलित समाज के लोग अपनी सहयोग राशि देने पहुंचे, तो गांव के कुछ लोगों ने इस पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई।

आरोप है कि विरोध करने वाले लोगों ने पीड़ित पक्ष को साथ चलने से मना कर दिया और अपनी डोली अलग से ले जाने को कहा। इसी बात से नाराज होकर मनोज कुमार, गोरख लाल, चमन लाल, चैत लाल, विशु लाल सहित कई ग्रामीण उत्तरकाशी कोर्ट परिसर पहुंचे और बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों से याचिका दायर करने की मांग की। हालांकि, अधिवक्ताओं ने उन्हें उचित कार्रवाई और समझौते का आश्वासन देकर फिलहाल शांत कराया।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की प्रतिक्रिया

इस पूरे घटनाक्रम पर मातली क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य हीरा लाल ने कहा कि किसी भी सार्वजनिक या धार्मिक कार्यक्रम में इस तरह का भेदभाव पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने बताया कि पूर्व में ग्रामीण देव डोली के साथ यमुनोत्री, गंगोत्री और डोडीताल जाते रहे हैं और गांव में ऐसा विवाद पहली बार देखा गया है। वहीं, गांव के ही विशन सिंह राणा ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि संविधान में सबको बराबर का अधिकार है।

विवाद के बाद बैठी पंचायत, लिया गया यह फैसला (Uttarkashi Dev Doli Dispute)

मामले के तूल पकड़ने के बाद गंगोत्री से देव डोली के वापस लौटने पर भराण गांव में एक विशेष पंचायत का आयोजन किया गया। इस बैठक में गांव के प्रबुद्ध जनों और दोनों पक्षों के बीच वार्ता हुई। पंचायत में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि भविष्य में होने वाले किसी भी सार्वजनिक या धार्मिक कार्यक्रम में गांव के सभी ग्रामीणों की समान और महत्वपूर्ण भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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