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Vastu Tips For Making Rotis : क्या रोटियां गिनकर बनाना सही है? वास्तु शास्त्र के इस नियम को जानकर चौंक जाएंगे

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Ganga Updated Sun, 13 Sep 2026 11:17 AM IST

घर की रसोई में ठीक-ठीक नापकर रोटियां बनाना पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार सही नहीं माना जाता है। भोजन बनाते समय कुछ अतिरिक्त रोटियां रखना और सही दिशा का ध्यान रखना घर के माहौल को बेहतर बनाता है।

Vastu Tips For Making Rotis

Vastu Tips For Making Rotis : रसोई केवल खाना पकाने की जगह नहीं है, यह पूरे घर की ऊर्जा और सेहत का मुख्य आधार होती है। कई घरों में यह आम आदत होती है कि परिवार के सदस्यों की संख्या के हिसाब से बिल्कुल ठीक-ठीक गिनकर रोटियां बनाई जाती हैं।

ज्यादातर लोग ऐसा इसलिए करते हैं ताकि खाना बर्बाद न हो, लेकिन वास्तु और पारंपरिक मान्यताओं में अन्न को गिनकर बनाना उचित नहीं माना गया है।

रोटियां गिनकर बनाने से क्यों मना किया जाता है?

भारतीय परंपरा में अन्न को मां अन्नपूर्णा का स्वरूप माना गया है। जब हम हर रोटी को नाप-तोलकर बनाते हैं, तो यह अनजाने में मन में कमी या अभाव की भावना पैदा करता है।

मान्यता है कि भोजन हमेशा खुले और तृप्त मन से बनना चाहिए। जब मन में यह डर रहता है कि खाना घट न जाए, तो वह संकुचित सोच को दर्शाता है।

इसलिए बड़े-बुजुर्ग हमेशा यही सलाह देते हैं कि परिवार की जरूरत से दो-तीन रोटियां अधिक ही बननी चाहिए।

रोटी बनाते समय इन बातों का रखें ध्यान

रसोई के माहौल को शांत और सकारात्मक रखने के लिए कुछ सामान्य नियमों का पालन करना अच्छा रहता है:

पहली रोटी अलग रखें: पहली रोटी गाय या किसी बेजुबान जीव के लिए निकालना बहुत शुभ माना जाता है। इससे सेवा और दान का भाव बना रहता है।

अतिरिक्त रोटी जरूर बनाएं: एक या दो रोटी ज्यादा बनाने से अचानक आए किसी मेहमान या जरूरतमंद के काम आ सकती है।

बचा हुआ खाना फेंके नहीं: अगर रोटियां बच जाती हैं, तो उन्हें फेंकने के बजाय पक्षियों या पशुओं को खिला देना चाहिए।

शांत मन से खाना पकाएं: खाना बनाते समय गुस्सा या तनाव न रखें। शांत मन से बना भोजन परिवार के स्वास्थ्य के लिए भी बेहतर होता है।

रसोई से जुड़े कुछ अन्य जरूरी वास्तु नियम

रोटी पकाने के अलावा रसोई के बर्तनों और दिशा से जुड़े कुछ छोटे नियम भी ध्यान देने योग्य हैं:

चकले की आवाज: रोटी बेलते समय अगर चकले से तेज आवाज आती है, तो उसके नीचे एक साफ कपड़ा रख लें। इससे आवाज शांत हो जाएगी।

ताजे आटे का प्रयोग: गूंथा हुआ आटा लंबे समय तक फ्रिज में रखकर इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। हमेशा जरूरत के अनुसार ताजा आटा ही गूंथें।

गर्म तवे पर पानी न डालें: तवा जब बहुत गर्म हो, तो उस पर तुरंत ठंडा पानी डालने से बचें। उसे सामान्य रूप से ठंडा होने दें और फिर साफ करें।

दिशा का महत्व: पूर्व दिशा की तरफ मुंह करके भोजन पकाना सबसे अच्छा माना जाता है। इससे रोशनी और हवा का संतुलन भी ठीक रहता है।

परंपरा और आधुनिक जरूरत में संतुलन

आज के समय में खाने की बर्बादी रोकना बहुत जरूरी है। ऐसे में परंपरा और समझदारी का तालमेल बनाना सबसे सही तरीका है। परिवार की खुराक के हिसाब से ही आटा लें, लेकिन एक या दो रोटी अतिरिक्त जरूर बनाएं।

बची हुई रोटी को सही तरीके से किसी पशु या पक्षी को देकर आप अन्न का आदर भी कर सकते हैं और बर्बादी से भी बच सकते हैं।

Ganga

गंगा 'दून हॉराइज़न' में धर्म और ज्योतिष संवाददाता के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें वैदिक ज्योतिष, पंचांग, व्रत-त्योहार और वास्तु शास्त्र का गहरा ज्ञान और वर्षों का अनुभव है। गंगा का उद्देश्य सिर्फ दैनिक राशिफल बताना नहीं, बल्कि धर्म और अध्यात्म से जुड़ी सटीक, शोध-आधारित और प्रामाणिक जानकारी आम जनमानस तक पहुंचाना है। वह ज्योतिषीय गणनाओं और धार्मिक मान्यताओं का गहराई से विश्लेषण करती हैं। उनकी तथ्यपरक लेखनी पाठकों को अंधविश्वास से दूर रखकर एक सकारात्मक मार्गदर्शन प्रदान करती है, जिससे वे डिजिटल पाठकों के बीच एक बेहद भरोसेमंद नाम बन गई हैं।

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