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Kitchen Vastu Direction : क्या किचन की दिशा बिगाड़ सकती है घर का सुख-समृद्धि, जानें वास्तु के अनुसार कौन-सी दिशा है शुभ

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Ganga Updated Sat, 12 Sep 2026 10:41 AM IST

वास्तु शास्त्र के अनुसार रसोई घर केवल आग्नेय कोण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके अलावा 5 अन्य शुभ दिशाएं भी मौजूद हैं।

Kitchen Vastu Direction

Kitchen Vastu Direction : घर का नक्शा बनाते समय सबसे ज्यादा ध्यान रसोई की जगह पर दिया जाता है। माना जाता है कि भोजन बनने की जगह अगर सही दिशा में हो, तो घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और परिवार के सदस्यों का स्वास्थ्य भी ठीक रहता है।

आम तौर पर लोग मानते हैं कि किचन सिर्फ आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व) में ही होना चाहिए, लेकिन कई बार छोटे या अलग लेआउट वाले मकानों में ऐसा करना संभव नहीं हो पाता।

शास्त्रीय वास्तु के महत्वपूर्ण ग्रंथ ‘मनुष्यालय चंद्रिका’ में रसोई निर्माण के लिए आग्नेय कोण के अलावा 5 अन्य शुभ स्थानों का भी स्पष्ट उल्लेख मिलता है।

ईशान कोण के पास का स्थान

आमतौर पर उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) को पूजा या हल्के निर्माण के लिए तय माना जाता है। हालांकि, शास्त्रीय नियमों के अनुसार ईशान कोण के ठीक किनारे वाले दूसरे हिस्से में भी किचन बनाया जा सकता है।

यह व्यवस्था घर में संतुलन और प्रगति के लिए अच्छी मानी जाती है।

पूर्व दिशा का मध्य भाग

पूर्व दिशा को सूर्य का स्थान माना गया है। सुबह की ताजी धूप और रोशनी इस दिशा से सबसे पहले घर में आती है।

पूर्व के मध्य भाग में रसोई बनाने से प्राकृतिक रोशनी पर्याप्त मिलती है, जो स्वच्छता और स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद मुफीद है।

दक्षिण दिशा का मध्य भाग

यदि आपके पास आग्नेय कोण का विकल्प नहीं है, तो दक्षिण दिशा का मध्य क्षेत्र भी चुना जा सकता है।

वास्तु परंपरा में इसे स्थिरता और अन्न की समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। इस स्थान पर बना किचन गृहस्थी में संतुलन बनाए रखने में मददगार होता है।

पश्चिम दिशा का मध्य क्षेत्र

पश्चिम दिशा के मध्य भाग (तरुण पद) में भी रसोई की व्यवस्था की जा सकती है।

जिन मकानों का प्रवेश द्वार पूर्व मुखी नहीं होता या जहां जगह की सीमाएं होती हैं, वहां पश्चिम दिशा का यह हिस्सा एक व्यावहारिक और वास्तु सम्मत समाधान देता है।

वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम)

उत्तर-पश्चिम यानी वायव्य कोण वायु तत्व का स्थान है। अग्नि और वायु के प्राकृतिक तालमेल के कारण इस दिशा को भी भोजनालय या किचन के लिए उपयुक्त माना गया है। यहां रसोई होने से घर में वायु संचार बेहतर रहता है और नकारात्मक ऊर्जा नहीं ठहरती।

किचन बनाते समय इन बातों का भी रखें ध्यान

  • खाना बनाते समय मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रहे, यह लेआउट सबसे सुविधाजनक माना जाता है।
  • सिंक (पानी का नल) और गैस चूल्हा (अग्नि) को एक-दूसरे से थोड़ी दूरी पर रखें।
  • रसोई में वेंटिलेशन और खिड़कियों की पर्याप्त व्यवस्था रखें ताकि धुआं और भाप आसानी से बाहर निकल सके।

Ganga

गंगा 'दून हॉराइज़न' में धर्म और ज्योतिष संवाददाता के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें वैदिक ज्योतिष, पंचांग, व्रत-त्योहार और वास्तु शास्त्र का गहरा ज्ञान और वर्षों का अनुभव है। गंगा का उद्देश्य सिर्फ दैनिक राशिफल बताना नहीं, बल्कि धर्म और अध्यात्म से जुड़ी सटीक, शोध-आधारित और प्रामाणिक जानकारी आम जनमानस तक पहुंचाना है। वह ज्योतिषीय गणनाओं और धार्मिक मान्यताओं का गहराई से विश्लेषण करती हैं। उनकी तथ्यपरक लेखनी पाठकों को अंधविश्वास से दूर रखकर एक सकारात्मक मार्गदर्शन प्रदान करती है, जिससे वे डिजिटल पाठकों के बीच एक बेहद भरोसेमंद नाम बन गई हैं।

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