रुड़की। (Water Conclave 2026) जल सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के क्षेत्र में एक नए अध्याय की शुरुआत करते हुए, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की ने आज 4वें रुड़की वाटर कॉन्क्लेव (RWC 2026) का उद्घाटन किया। राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान (NIH) के सहयोग से आयोजित यह तीन दिवसीय सम्मेलन 25 फरवरी तक चलेगा। इस मंच पर दुनिया भर के नीति-निर्माता, वैज्ञानिक और शोधकर्ता इस बात पर मंथन कर रहे हैं कि कैसे ‘नेक्सस दृष्टिकोण’ अपनाकर सीमापार नदियों और जल संसाधनों का न्यायसंगत प्रबंधन किया जा सकता है।
विज्ञान और नीति के बीच सेतु का निर्माण
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. कमल किशोर पंत ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में जल सुरक्षा केवल संसाधनों का प्रबंधन नहीं, बल्कि अस्तित्व की लड़ाई है। उन्होंने रेखांकित किया कि आधुनिक तकनीक, विशेष रूप से एआई (AI) डेटा सेंटरों के विस्तार के कारण पानी की खपत में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। ऐसे में डेटा, जलवायु सहनशीलता और जल सुरक्षा के बीच एक मजबूत सेतु बनाना अनिवार्य है। सम्मेलन का उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान और नीतिगत ढाँचे को एक धरातल पर लाना है।
नेक्सस दृष्टिकोण: जल, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा का संगम
आरडब्ल्यूसी 2026 के संयोजक प्रो. आशीष पांडे ने ‘नेक्सस दृष्टिकोण’ की महत्ता पर जोर दिया। इस मॉडल के तहत जल को अलग करके देखने के बजाय इसे ऊर्जा और खाद्य प्रणालियों के अभिन्न अंग के रूप में देखा जाता है। कॉन्क्लेव के तकनीकी सत्रों में सीमापार नदी बेसिन प्रबंधन, भूजल स्थिरता और हाइड्रो-मौसमीय चरम घटनाओं (जैसे बाढ़ और सूखा) से निपटने के लिए एकीकृत समाधानों पर चर्चा की जा रही है।
सामुदायिक सहभागिता और जमीनी नेतृत्व

इस बार के कॉन्क्लेव की सबसे बड़ी विशेषता इसका ‘कम्युनिटी-सेंट्रिक’ होना है। एक उच्च-स्तरीय पैनल में पद्मश्री सम्मानित श्री सवजीभाई धोलकिया, श्री पोपटराव पवार और श्री उमाशंकर पांडे जैसे विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक जल प्रबंधन में स्थानीय समुदायों की भागीदारी नहीं होगी, तब तक अंतरराष्ट्रीय नीतियां प्रभावी नहीं हो सकतीं। नीति आयोग के सदस्य डॉ. विनोद के. पॉल ने अपने मुख्य व्याख्यान में समावेशी और संस्थागत जल शासन ढाँचों की आवश्यकता पर बल दिया।
13 देशों का प्रतिनिधित्व और वैश्विक साझेदारी
कॉन्क्लेव में वैश्विक भागीदारी का स्तर अत्यंत व्यापक है। संयुक्त राज्य अमेरिका, जर्मनी, इज़राइल, कनाडा, और जापान सहित 13 देशों के 42 प्रमुख वक्ता अपने विचार रख रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय जल प्रबंधन संस्थान (IWMI) के महानिदेशक डॉ. मार्क स्मिथ की उपस्थिति यह दर्शाती है कि आईआईटी रुड़की द्वारा प्रस्तुत किए गए मॉडल वैश्विक स्तर पर कितने प्रासंगिक हैं। यह द्विवार्षिक आयोजन अब अंतरराष्ट्रीय जल कूटनीति का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है।










