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White Sugar vs Brown Sugar : सफेद चीनी छोड़ें या ब्राउन शुगर अपनाएं? जानिए सेहत के लिए कौन-सा विकल्प बेहतर

ब्राउन शुगर को अक्सर सफेद चीनी से ज्यादा हेल्दी माना जाता है, लेकिन दोनों में कैलोरी और सुक्रोज की मात्रा लगभग बराबर होती है। वजन घटाने या ब्लड शुगर कंट्रोल करने के लिए सिर्फ चीनी का रंग बदलना काफी नहीं है, बल्कि कुल मीठे का सेवन कम करना जरूरी है।

Published On: August 16, 2026 10:55 AM
White Sugar vs Brown Sugar

White Sugar vs Brown Sugar : चाय, कॉफी या कोई मीठी डिश बनाते वक्त हम अक्सर यह सोचते हैं कि सफेद चीनी की जगह ब्राउन शुगर का इस्तेमाल करना ज्यादा सेहतमंद विकल्प है।

फिटनेस और डाइट को लेकर बढ़ती चर्चाओं के बीच ब्राउन शुगर को ‘नेचुरल’ और ‘हेल्दी’ बताकर खूब प्रचारित किया जाता है।

लेकिन क्या सिर्फ रंग बदलने से चीनी पौष्टिक हो जाती है? आइए समझते हैं कि दोनों के बनने के तरीके, कैलोरी और आपकी सेहत पर इनके असर में कितना वास्तविक अंतर है।

दोनों के बनने का तरीका कितना अलग?

सफेद चीनी गन्ने या चुकंदर के रस को पूरी तरह रिफाइन करके तैयार की जाती है। इस प्रक्रिया में रस से मोलासेस (शीरा या गाढ़ा तरल) पूरी तरह बाहर निकाल दिया जाता है, जिससे चीनी का रंग साफ सफेद हो जाता है।

वहीं बाजार में मिलने वाली ज्यादातर ब्राउन शुगर भी सामान्य रिफाइंड चीनी ही होती है। बस इसे तैयार करते समय इसमें थोड़ा सा मोलासेस वापस मिला दिया जाता है।

इसी वजह से इसका रंग भूरा दिखता है और इसका स्वाद हल्का कैरामेल जैसा महसूस होता है।

कैलोरी और न्यूट्रिशन: क्या वाकई कोई बड़ा फायदा है?

पोषण के नजरिए से देखें तो दोनों ही प्रकार की चीनी में मुख्य रूप से सुक्रोज (Sucrose) होता है:

समान कैलोरी: दोनों में कैलोरी की मात्रा लगभग एक बराबर होती है। एक चम्मच सफेद चीनी और एक चम्मच ब्राउन शुगर के ऊर्जा स्तर में कोई खास अंतर नहीं होता।

मिनरल्स का सच: मोलासेस मिले होने की वजह से ब्राउन शुगर में कैल्शियम, पोटैशियम और आयरन की थोड़ी मात्रा पाई जाती है। हालांकि, यह मात्रा इतनी कम होती है कि इससे शरीर को कोई अतिरिक्त पोषण लाभ नहीं मिलता।

डायबिटीज और वजन घटाने पर असर

अगर आप वजन कम करने की कोशिश कर रहे हैं या डायबिटीज से पीड़ित हैं, तो ब्राउन शुगर को सुरक्षित विकल्प मानना गलत है।

दोनों ही प्रकार की चीनी का ग्लाइसेमिक इंडेक्स लगभग समान होता है, यानी दोनों ब्लड शुगर लेवल को तेजी से बढ़ा सकती हैं।

शरीर दोनों को एक ही तरह से पचाता है, इसलिए वजन घटाने के लिए सिर्फ चीनी का प्रकार बदलना नहीं, बल्कि मीठे की कुल मात्रा घटाना जरूरी है।

दिनभर में कितनी चीनी खाना सुरक्षित है?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दिशानिर्देशों के अनुसार, दैनिक जीवन में एडेड शुगर (अतिरिक्त चीनी) का सेवन कुल कैलोरी के 5% से 10% के भीतर ही होना चाहिए।

सामान्य रूप से एक दिन में लगभग 25 ग्राम (करीब 6 छोटे चम्मच) तक सीमित रखना सेहत के लिए सही माना जाता है।

ध्यान रखें कि इसमें केवल चाय या कॉफी की चीनी नहीं, बल्कि बिस्किट, कोल्ड ड्रिंक्स, पैकेज्ड जूस, बेकरी प्रोडक्ट्स और मिठाइयों में मौजूद छिपी हुई चीनी भी शामिल है।

मीठा कम करने के आसान और व्यावहारिक तरीके

अगर आप दिनभर में चीनी का इस्तेमाल सीमित करना चाहते हैं, तो इन आसान आदतों को अपना सकते हैं:

  • चाय या कॉफी में धीरे-धीरे चीनी की मात्रा आधी करें।
  • पैकेज्ड फूड्स खरीदते वक्त लेबल पर ‘एडेड शुगर’ की जांच करें।
  • कार्बोनेटेड ड्रिंक्स और पैकेट वाले जूस की जगह सादा पानी या नारियल पानी पिएं।
  • मीठा खाने की तलब होने पर ताजे फल या मुट्ठी भर मेवे खाएं।

गुड़ और शहद में भी प्राकृतिक मिठास अधिक होती है, इसलिए उनका इस्तेमाल करते समय भी मात्रा का ध्यान रखना उतना ही जरूरी है।

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Rama Pun

रमा पुन 'दून हॉराइज़न' में हेल्थ और लाइफस्टाइल संपादक के रूप में अपनी अहम जिम्मेदारी निभा रही हैं। स्वास्थ्य, फिटनेस, खानपान और मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) के विषयों पर उनकी पकड़ बेहद मजबूत है। रमा का फोकस हमेशा मेडिकल एक्सपर्ट्स की पुख्ता सलाह और वैज्ञानिक शोध पर आधारित (Evidence-based) खबरें लिखने पर रहता है। उनका स्पष्ट मानना है कि सेहत से जुड़ी कोई भी जानकारी शत-प्रतिशत प्रामाणिक होनी चाहिए। अपनी आकर्षक और तथ्यपरक लेखनी से वे पाठकों को एक स्वस्थ, तनावमुक्त और संतुलित जीवनशैली अपनाने के लिए निरंतर प्रेरित और जागरूक करती हैं।

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