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35 की उम्र के बाद वजन घटाना क्यों हो जाता है मुश्किल? जानें असली वजह

35 की उम्र के बाद बिना खान-पान बदले भी वजन बढ़ना या वजन न घटना एक सामान्य समस्या है, जिसका मुख्य कारण मांसपेशियों का कम होना (सार्कोपेनिया) है। सही मात्रा में प्रोटीन, रेजिस्टेंस ट्रेनिंग और तनाव प्रबंधन अपनाकर आप अपने मेटाबॉलिज्म को दोबारा बेहतर बना सकते हैं।

Published On: August 9, 2026 11:31 AM
Weight Loss After 35

Weight Loss After 35 : उम्र के 35वें पड़ाव पर पहुंचते ही अक्सर महिलाओं को यह शिकायत होने लगती है कि पुरानी डाइट और रूटीन फॉलो करने के बाद भी वजन कम नहीं हो रहा, बल्कि पेट और कमर के आसपास फैट जमा होने लगा है।

दरअसल, यह सिर्फ आपकी दिनचर्या की लापरवाही नहीं, बल्कि शरीर के अंदर होने वाला एक कुदरती जैविक बदलाव है, जिसे वक्त रहते समझना बेहद जरूरी है।

क्या है मसल्स लॉस का असली खेल?

35 की उम्र के बाद शरीर में खामोशी से ‘सार्कोपेनिया’ की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। आसान शब्दों में कहें तो उम्र के साथ मांसपेशियों का घनत्व (मांसपेशियों का द्रव्यमान) धीरे-धीरे कम होने लगता है।

अगर इसे रोकने के लिए ध्यान न दिया जाए, तो हर दशक में लगभग 3 से 8 प्रतिशत तक मसल्स मास घटने लगता है।

चूंकि मांसपेशियां शरीर का मुख्य कैलोरी-बर्न करने वाला इंजन होती हैं, इनके कम होने से शरीर की फैट बर्न करने की क्षमता सीधे तौर पर प्रभावित होती है।

मेटाबॉलिज्म और हार्मोन्स का बदलता समीकरण

जब शरीर में मांसपेशियां कम होती हैं, तो ‘रेस्टिंग मेटाबॉलिक रेट’ (RMR) यानी आराम की स्थिति में कैलोरी बर्न करने की गति धीमी हो जाती है। एक पाउंड मसल्स, फैट की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक कैलोरी बर्न करती हैं।

जब मसल्स कम होती हैं, तो शरीर को कम कैलोरी की आवश्यकता होती है। ऐसे में अगर आप 28 की उम्र वाला खान-पान 38 की उम्र में भी जारी रखते हैं, तो बची हुई अतिरिक्त कैलोरी शरीर फैट के रूप में जमा करने लगता है।

इसके अलावा, 30 के दशक के उत्तरार्ध में एस्ट्रोजन हार्मोन के स्तर में आने वाला उतार-चढ़ाव भी फैट जमा करने की इस प्रक्रिया को बढ़ा देता है।

35 के बाद फिट रहने के लिए क्या करें?

रेजिस्टेंस ट्रेनिंग को दें तरजीह: हफ्ते में 2 से 3 बार वेट लिफ्टिंग, रेजिस्टेंस बैंड्स या बॉडीवेट एक्सरसाइज (जैसे स्क्वैट्स और पुश-अप्स) जरूर करें। इससे मांसपेशियों को सिग्नल मिलता है कि उनका मजबूत रहना जरूरी है।

प्रोटीन की मात्रा को बांटें: सिर्फ रात के खाने में प्रोटीन लेने के बजाय दिन के तीनों मुख्य आहारों (नाश्ता, लंच, डिनर) में 25 से 30 ग्राम अच्छी गुणवत्ता वाला प्रोटीन शामिल करें। इससे मसल सिंथेसिस बेहतर होता है।

नींद और तनाव पर नियंत्रण रखें: लगातार तनाव में रहने से कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ता है, जो मांसपेशियों को तोड़ता है और पेट के पास फैट जमा करता है। रोजाना 7-8 घंटे की गहरी नींद बेहद जरूरी है।

35 की उम्र के बाद वजन संतुलित रखने का मतलब खुद को भूखा रखना नहीं, बल्कि अपने शरीर को मजबूत बनाना है।

कम खाने की जगह सही पोषण और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग पर ध्यान देकर आप अपने मेटाबॉलिज्म को दोबारा सक्रिय कर सकते हैं।

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Rama Pun

रमा पुन 'दून हॉराइज़न' में हेल्थ और लाइफस्टाइल संपादक के रूप में अपनी अहम जिम्मेदारी निभा रही हैं। स्वास्थ्य, फिटनेस, खानपान और मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) के विषयों पर उनकी पकड़ बेहद मजबूत है। रमा का फोकस हमेशा मेडिकल एक्सपर्ट्स की पुख्ता सलाह और वैज्ञानिक शोध पर आधारित (Evidence-based) खबरें लिखने पर रहता है। उनका स्पष्ट मानना है कि सेहत से जुड़ी कोई भी जानकारी शत-प्रतिशत प्रामाणिक होनी चाहिए। अपनी आकर्षक और तथ्यपरक लेखनी से वे पाठकों को एक स्वस्थ, तनावमुक्त और संतुलित जीवनशैली अपनाने के लिए निरंतर प्रेरित और जागरूक करती हैं।

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