8th Pay Commission : केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए आने वाले कुछ दिन काफी हलचल भरे रहने वाले हैं। 8वें वेतन आयोग की टीम 7 और 8 अक्टूबर को बेंगलुरु में एक अहम बैठक करने जा रही है। देश भर के लाखों कर्मचारी यह जानने को उत्सुक हैं कि उनके वेतन में होने वाले बदलावों को लेकर आयोग का काम कहां तक पहुंचा है।
आयोग देश के 14 बड़े शहरों का दौरा कर चुका है और कई कर्मचारी संगठनों के साथ चर्चाएं पूरी हो चुकी हैं। अब बेंगलुरु बैठक के बाद रिपोर्ट के ड्राफ्ट को अंतिम रूप देने की दिशा में तेजी आने की उम्मीद है।
रिपोर्ट सौंपने की तय मियाद और मौजूदा स्थिति

वेतन आयोग को अपनी अंतिम सिफारिशें तैयार करने के लिए कुल 18 महीने का समय मिला हुआ है। इसमें से करीब 11 महीने का समय बीत चुका है। कर्मचारी संगठन अब इसी बात पर नजर बनाए हुए हैं कि रिपोर्ट तय समय सीमा यानी मई 2027 तक आ जाएगी या उससे पहले।
ऑल इंडिया न्यू पेंशन स्कीम एम्प्लॉइज एसोसिएशन के अध्यक्ष मनजीत सिंह पटेल का आकलन है कि अगर नवंबर तक सभी औपचारिकताएं निपट गईं, तो फरवरी या मार्च 2027 तक रिपोर्ट सामने आ सकती है।
वहीं, ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन के महासचिव सी. श्रीकुमार को भरोसा है कि आयोग मई 2027 की अंतिम समय सीमा तक अपना काम पूरा कर लेगा।
सिफारिशें आने के बाद भी तुरंत नहीं मिलता नया वेतन
आमतौर पर यह समझा जाता है कि आयोग ने रिपोर्ट दी और अगले महीने से बढ़ी हुई सैलरी मिलने लगेगी, लेकिन प्रक्रिया इतनी सीधी नहीं होती। कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉइज एंड वर्कर्स के अध्यक्ष एसबी यादव बताते हैं कि रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार को उसकी समीक्षा करने में 4 से 6 महीने लग जाते हैं।
पूरी प्रक्रिया कुछ इस तरह चलती है:
- आयोग अपनी फाइनल सिफारिशें केंद्र सरकार को सौंपता है।
- इसके बाद वित्त मंत्रालय और मंत्रियों का समूह (GoM) इन सिफारिशों का अध्ययन करता है।
- कैबिनेट की अंतिम मंजूरी मिलने के बाद ही इसे गजट में अधिसूचित किया जाता है।
खाते में बढ़ा हुआ वेतन आने में कितना वक्त लगेगा?
नियमों के तहत वेतन बढ़ोतरी का असर 1 जनवरी 2026 से ही मान्य माना जाता है। हालांकि, कागजी प्रक्रिया से लेकर बैंक खाते में राशि क्रेडिट होने तक का फासला काफी लंबा होता है।
इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन के केवी कामेश का मानना है कि जमीनी तौर पर नया वेतनमान 2027 के अंत तक ही दिख पाएगा।
वहीं, भारत पेंशनर्स समाज के अविनाश राजपूत का कहना है कि पुराने अनुभवों को देखें तो सभी स्तरों पर व्यवस्था लागू होने में दो से तीन साल का वक्त लग जाता है। ऐसे में कई जानकार मानते हैं कि कर्मचारियों को पूरी तरह से नया वेतन हाथ में आने के लिए थोड़ा सब्र रखना पड़ सकता है।
पुराने वेतन आयोगों का अनुभव क्या कहता है?
अगर हम पहले के वेतन आयोगों का रिकॉर्ड देखें, तो हर बार रिपोर्ट तैयार होने और लागू होने में वक्त लगा है:
- 7वां वेतन आयोग: फरवरी 2014 में बना और रिपोर्ट नवंबर 2015 में आई।
- छठा वेतन आयोग: अक्टूबर 2006 में गठन हुआ और मार्च 2008 में रिपोर्ट सौंपी गई।
- 5वां वेतन आयोग: इसे अपनी सिफारिशें देने में लगभग 3 साल का समय लग गया था।
बेंगलुरु की बैठक के बाद यह साफ होने लगेगा कि आयोग अपने तय 18 महीनों के अंदर काम खत्म कर पाता है या उसे कुछ और वक्त की जरूरत पड़ेगी।












