Uttarakhand : उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में पिछले दो दिनों से गुस्सा सड़कों पर दिख रहा है। वजह बनी एक वायरल वीडियो, जिसमें एक महिला पुलिसकर्मी ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रही बेरोजगार नर्सिंग कर्मी को जोरदार थप्पड़ मार दिया। यह घटना 8 दिसंबर की है और इसके बाद से पूरे राज्य में आक्रोश फैल गया।
आखिर हुआ क्या था?
सोमवार को सैकड़ों बेरोजगार नर्सिंग स्टाफ अपनी लंबित मांगों को लेकर मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च कर रहे थे। उनकी मुख्य मांग थी कि नर्सिंग भर्ती फिर से पुराने तरीके से साल-दर-साल आधार पर हो, स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता मिले और जिनकी उम्र सीमा खत्म हो गई है, उन्हें एक बार की छूट दी जाए।
न्यू कैंट रोड पर पुलिस ने बैरिकेड लगा दिए। प्रदर्शनकारी जब आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे, तभी एक महिला कॉन्स्टेबल ने एक युवती नर्स को थप्पड़ जड़ दिया। पल भर में यह वीडियो सोशल मीडिया पर छा गया और लाखों लोगों ने देखा।
अगले दिन पुलिस मुख्यालय के बाहर बवाल
इस घटना से आहत होकर मंगलवार को महिला कांग्रेस और नर्सिंग एकता मंच ने मिलकर पुलिस मुख्यालय घेरने का ऐलान किया। प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष ज्योति रौतेला खुद सड़क पर उतरीं। सुभाष रोड पर भारी पुलिस बल तैनात था। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए फिर बैरिकेड लगाए गए।
जब बात नहीं बनी तो ज्योति रौतेला और उपाध्यक्ष आशा मनोरमा डोबरियाल शर्मा बैरिकेड पर चढ़ गईं। वहां से जोरदार नारेबाजी हुई और सरकार का पुतला फूंका गया। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। काफी देर हंगामा चलता रहा, फिर पुलिस ने सभी को बसों में बैठाकर एकता विहार धरना स्थल पर छोड़ दिया।
महिला कांग्रेस ने सरकार को घेरा
ज्योति रौतेला ने कहा कि भाजपा “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” का ढोंग कर रही है, लेकिन अपनी ही बेटियों को ही पुलिस से पिटवा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर प्रदेश की किसी भी बेटी के साथ ऐसा दुर्व्यवहार हुआ तो कांग्रेस की महिलाएं चुप नहीं बैठेंगी।
नर्सिंग एकता मंच ने पुरानी यादें ताजा की
नर्सिंग एकता मंच के प्रदेश अध्यक्ष नवल पुंडीर ने याद दिलाया कि कोरोना महामारी में ये नर्सिंग कर्मी दिन-रात मरीजों की जान बचाते रहे। तब इन्हीं पर फूल बरसाए गए थे, तारीफें हुई थीं। लेकिन आज जब ये अपनी नौकरी और हक की बात कर रही हैं तो सरकार कान में तेल डाले बैठी है।
उन्होंने साफ कहा कि जब तक भर्ती प्रक्रिया को पुराने नियमों के अनुसार नहीं किया जाता और स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता नहीं दी जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।















