उत्तराखंड के ऋषिकेश में सोमवार को एक खास कार्यक्रम हुआ, जहां जिलाधिकारी सविन बंसल ने आम लोगों की परेशानियों को सीधे सुनकर उनका समाधान किया। यह जन सुनवाई का ऐसा सत्र था, जो शाम साढ़े सात बजे तक चला और साढ़े पांच घंटे की मैराथन बैठक में बदल गया।
यहां 326 से ज्यादा लोग अपनी दिक्कतें लेकर पहुंचे, और ज्यादातर मामलों में तुरंत कार्रवाई हुई। यह आयोजन तहसील परिसर में हुआ, जो दिखाता है कि कैसे स्थानीय प्रशासन जनता के करीब आकर काम कर रहा है।
जन सुनवाई का महत्व
भारत में जन सुनवाई जैसे कार्यक्रम सरकारी तंत्र को ज्यादा पारदर्शी और जवाबदेह बनाते हैं। मुख्यमंत्री के निर्देशों पर चल रहे इस अभियान में प्रशासन पूरी तरह से समर्पित है, ताकि लोगों को न्याय मिले बिना देरी के। जिलाधिकारी ने कहा कि जब जनता और अधिकारियों के बीच बातचीत मजबूत होती है, तो विकास की गति तेज हो जाती है।
यहां पहुंचे लोगों ने पेयजल की कमी, सड़कों की मरम्मत, भूमि विवाद, प्रमाण पत्र, पेंशन और राजस्व से जुड़ी समस्याएं बताईं। इनमें से कई मुद्दे ऐसे थे, जो सालों से लंबित थे, लेकिन इस सत्र में उन्हें तुरंत ध्यान मिला।
समाज कल्याण से जुड़ी दिक्कतें
ऋषिकेश में समाज कल्याण विभाग से संबंधित शिकायतों की संख्या काफी ज्यादा थी। जिलाधिकारी ने इसे गंभीरता से लिया और तुरंत एक सहायक समाज कल्याण अधिकारी की तैनाती के आदेश दे दिए। यह कदम दिखाता है कि कैसे छोटी-छोटी नियुक्तियां बड़ी समस्याओं का हल बन सकती हैं। इससे स्थानीय लोगों को पेंशन, सहायता योजनाओं और अन्य सुविधाओं में आसानी होगी।
बुजुर्गों की व्यथा
कार्यक्रम में 80 साल के मनीराम जैसे बुजुर्ग ने अपनी कहानी साझा की, जहां उनके बेटे संपत्ति से उन्हें बाहर करने की कोशिश कर रहे थे। इसी तरह धर्मराज सिंह पुंडीर और विमला देवी ने भूमि से जुड़े विवाद बताए। जिलाधिकारी ने इन मामलों को विधिक सेवा प्राधिकरण को भेजा, जहां उन्हें मुफ्त कानूनी सलाह और वकील मिलेगा। यह पहल बुजुर्गों की सुरक्षा को मजबूत करती है, क्योंकि भारत में वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष कानून हैं, जैसे मेंटेनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पैरेंट्स एंड सीनियर सिटिजंस एक्ट।
विधवा की परेशानी
भट्टोवाला की अनीता ने अपनी दर्दभरी कहानी सुनाई। उनके पति ने बैंक से लोन लिया था, जो बीमित था, लेकिन 2024 में मौत के बाद बैंक उन्हें और उनके 12 साल के बच्चों को नोटिस भेज रहा था। इससे बच्चों पर मानसिक असर पड़ रहा था। जिलाधिकारी ने बैंक को रिकवरी सर्टिफिकेट जारी करने के निर्देश दिए, ताकि बीमा क्लेम मिल सके। यह मामला दिखाता है कि कैसे बीमा पॉलिसी आम लोगों की रक्षा कर सकती है, लेकिन कई बार बैंक की लापरवाही से दिक्कतें बढ़ जाती हैं।
अवैध मीट दुकानों पर कार्रवाई
ऋषिकेश में प्रतिबंध के बावजूद चल रही मीट दुकानों और बिना लाइसेंस के पशु वध की शिकायत आई। जिलाधिकारी ने नगर आयुक्त और एसडीएम को फूड सेफ्टी टीम के साथ छापेमारी के आदेश दिए। इससे न सिर्फ कानून का पालन होगा, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य भी बेहतर बनेगा। उत्तराखंड जैसे राज्य में पर्यावरण और सांस्कृतिक संवेदनशीलता को देखते हुए ऐसी कार्रवाई जरूरी है।
नशामुक्ति केंद्र की समस्या
जोगीवाला के ग्रामीणों ने नशामुक्ति केंद्र से हो रही दिक्कतों का जिक्र किया। जिलाधिकारी ने एसडीएम को जांच के निर्देश दिए, ताकि केंद्र के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा सकें। यह मुद्दा नशे की रोकथाम के साथ-साथ स्थानीय समुदाय की शांति को प्रभावित करता है।
बिजली और बुनियादी सुविधाओं पर फोकस
नगर निगम पार्षदों ने बिजली चोरी और जर्जर पोलों की बात की। जिलाधिकारी ने एक कमेटी बनाकर जांच कराने को कहा। इसके अलावा सीवर लाइन, सार्वजनिक शौचालय, गौशाला और ट्रैफिक लाइट जैसी मांगों पर संबंधित विभागों को तुरंत काम करने के निर्देश मिले। रेलवे रोड पर महिला शौचालय की कमी और ग्रामीण इलाकों में पानी के बिल की ज्यादा वसूली जैसी शिकायतों पर भी ध्यान दिया गया।
विकास की दिशा
इस जन सुनवाई में ऋषिकेश विधायक प्रेम चंद्र अग्रवाल, महापौर शंभू पासवान और मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह जैसे वरिष्ठ लोग मौजूद थे। इससे कार्यक्रम की गंभीरता बढ़ी और लोगों को विश्वास हुआ कि उनकी बात सुनी जा रही है। कुल मिलाकर, यह सत्र उम्मीद की नई किरण बना, जहां दुखी चेहरे मुस्कुराने लगे।















