Dog Attacks Dehradun : देहरादून शहर में हाल के महीनों में रॉटविलर और पिटबुल जैसे कुत्तों के हमलों की घटनाएं बढ़ गई हैं। ये नस्लें अपनी ताकत और आक्रामक स्वभाव के लिए जानी जाती हैं, जिससे स्थानीय लोगों में डर का माहौल बन गया है।
भारत में हर साल हजारों लोग कुत्तों के काटने से प्रभावित होते हैं, और सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, रेबीज जैसी बीमारियां इन हमलों से फैल सकती हैं। इसी समस्या को देखते हुए नगर निगम ने अब एक नई नियमावली तैयार की है, जो पालतू कुत्तों को रखने के तरीके को पूरी तरह बदल देगी। ये नियम 2025 से लागू होने वाले हैं, और इनका मकसद शहर को सुरक्षित बनाना है।
पालतू कुत्तों के लिए लाइसेंस: क्यों जरूरी हो गया?
पालतू जानवर रखना कई लोगों के लिए खुशी की बात है, लेकिन जब ये जानवर दूसरों के लिए खतरा बन जाएं, तो नियम बनाना जरूरी हो जाता है। देहरादून नगर निगम ने ‘श्वान लाइसेंस उपविधि 2025’ नाम से ये नई गाइडलाइंस जारी की हैं। पहले, कुत्तों के हमलों पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता था, लेकिन अब अगर आपका कुत्ता किसी को काटता है, तो निगम खुद पुलिस में शिकायत दर्ज कराएगा।
इतना ही नहीं, कुत्ता भी जब्त किया जा सकता है। ये कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि हाल में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां लोगों को गंभीर चोटें लगीं। विशेषज्ञों का कहना है कि सही ट्रेनिंग और देखभाल से ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है।
आक्रामक नस्लों पर विशेष ध्यान: पंजीकरण और शुल्क
कुछ कुत्तों की नस्लें, जैसे पिटबुल, रॉटविलर, डोगो अर्जेंटीनो और अमेरिकन बुलडॉग, अपनी प्राकृतिक आक्रामकता के कारण ज्यादा जोखिम वाली मानी जाती हैं। इनके लिए नई नियमावली में सख्त प्रावधान हैं। पंजीकरण कराने से पहले इन कुत्तों का बधियाकरण (स्टरलाइजेशन) और रेबीज वैक्सीनेशन अनिवार्य है। पंजीकरण का शुल्क 2000 रुपये रखा गया है, जो सामान्य कुत्तों से चार गुना ज्यादा है।
ये इसलिए क्योंकि ये नस्लें विदेशी मूल की हैं और शहर में इनकी ब्रीडिंग पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। अगर कोई इन नियमों का पालन नहीं करता, तो जुर्माना या कानूनी कार्रवाई हो सकती है। वहीं, सड़क पर घूमने वाले लावारिस कुत्तों को गोद लेने पर पंजीकरण फ्री होगा, जो जानवरों के कल्याण को बढ़ावा देगा।
रोजमर्रा के नियम: भौंकना, शौच और पट्टा
शहर की शांति बनाए रखने के लिए नियमावली में छोटी-छोटी बातों पर भी फोकस किया गया है। रात के समय अगर आपका कुत्ता बार-बार भौंकता है और आप उसे रोकने की कोशिश नहीं करते, तो पहली शिकायत पर नोटिस मिलेगा। दोबारा होने पर चालान कटेगा। ऐसे में कुत्ते को मजल (मास्क जैसा उपकरण) पहनाना जरूरी होगा, जो भौंकने और काटने दोनों को रोकेगा।
इसी तरह, कुत्ते को खुले में शौच कराने या बिना पट्टे के सार्वजनिक जगहों पर छोड़ने पर सख्त सजा मिलेगी। घर से बाहर ले जाते समय चेन और मजल लगाना अनिवार्य है। ये नियम इसलिए बने हैं क्योंकि बार-बार शिकायतें आने से पड़ोसियों का जीवन प्रभावित होता है।
ज्यादा कुत्ते रखने वाले ध्यान दें: शेल्टर की जरूरत
अगर कोई व्यक्ति पांच या इससे ज्यादा कुत्ते रखता है, तो इसे प्राइवेट शेल्टर माना जाएगा। ऐसे में उत्तराखंड पशु कल्याण बोर्ड से अनुमति लेनी होगी, साथ ही आस-पास के घरों से एनओसी (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) भी। शेल्टर में देखभाल की पूरी व्यवस्था होनी चाहिए, जैसे पर्याप्त जगह और निगरानी। ये प्रावधान इसलिए हैं ताकि जानवरों की संख्या बढ़ने से कोई समस्या न हो।
सामान्य घरेलू कुत्तों के लिए पंजीकरण दो कैटेगरी में होगा: नॉन-ब्रीडिंग और ब्रीडिंग। नॉन-ब्रीडिंग वाले सामान्य कुत्तों का शुल्क 500 रुपये प्रति कुत्ता है, और ये एक साल के लिए वैध रहेगा। तीन महीने से बड़े सभी कुत्तों का पंजीकरण जरूरी है, जिसमें पशु चिकित्सक का सर्टिफिकेट लगेगा।
कैसे बनी ये नियमावली: पृष्ठभूमि और प्रक्रिया
ये नियमावली बनाने का विचार तब आया जब स्थानीय पार्षदों ने बोर्ड मीटिंग में इस मुद्दे को उठाया। एक प्रमुख समाचार पत्र की पहल से ये चर्चा शुरू हुई, और नगर आयुक्त नमामी बंसल ने सख्त दिशानिर्देश देने का फैसला किया। सोमवार को इसका प्रारंभिक प्रकाशन हो चुका है, और अब एक महीने तक लोगों से सुझाव और आपत्तियां मांगी जा रही हैं। उसके बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा।
आयुक्त का कहना है कि देहरादून में खूंखार कुत्तों के हमलों की कई घटनाएं सामने आने के बाद ये कदम उठाया गया है। उनका मानना है कि सख्त नियमों से शहर सुरक्षित बनेगा, और पालतू जानवर रखने वाले जिम्मेदार बनेंगे।
ये नई व्यवस्था न सिर्फ लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी, बल्कि जानवरों के स्वास्थ्य और कल्याण पर भी जोर देगी। अगर आप कुत्ता पालते हैं, तो इन नियमों को समझना और अपनाना जरूरी है, ताकि कोई अनचाही परेशानी न आए।















