देहरादून के लाखों परिवारों को इस समय सस्ते राशन में चावल मिलने का इंतजार है। जिले में करीब 3.75 लाख राशन कार्ड धारक विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत सब्सिडी वाला अनाज लेते हैं, लेकिन गोदामों में चावल का स्टॉक अभी खाली पड़ा है। इससे न सिर्फ घरों में राशन की दिक्कत हो रही है, बल्कि सरकारी स्कूलों में बच्चों के मध्याह्न भोजन पर भी असर पड़ रहा है।
फोर्टीफाइड चावल क्या है और क्यों जरूरी?
भारत सरकार ने कुपोषण और एनीमिया जैसी समस्याओं से लड़ने के लिए फोर्टीफाइड चावल की योजना शुरू की है। इसमें सामान्य चावल में आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन बी-12 जैसे पोषक तत्व मिलाए जाते हैं। यह चावल सार्वजनिक वितरण प्रणाली यानी राशन की दुकानों, मध्याह्न भोजन योजना और अन्य कल्याणकारी कार्यक्रमों में दिया जाता है। सरकार ने इसे 2028 तक जारी रखने का फैसला किया है, ताकि करोड़ों लोगों का पोषण स्तर बेहतर हो सके।
लेकिन फोर्टीफाइड चावल बनाने के लिए राइस मिलों को विशेष कर्नेल्स मिलना जरूरी है। सामान्य चावल में इनको मिलाकर ही सप्लाई की जा सकती है। केंद्र से ये कर्नेल्स समय पर नहीं पहुंचने की वजह से मिलें चावल की डिलीवरी रोक रही हैं।
देहरादून में क्या हो रहा है?
जिले के कई सस्ते गल्ला दुकानदार पूर्ति विभाग के दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, क्योंकि उनके पास बांटने को चावल ही नहीं है। इसी तरह, करीब 30 सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन के लिए चावल की जरूरत पड़ती है, जो राशन दुकानों से ही आता है। स्टॉक न होने से बच्चों का पौष्टिक भोजन प्रभावित हो रहा है।
विभाग के वरिष्ठ अधिकारी हरेंद्र सिंह रावत ने बताया कि सभी गोदाम फिलहाल खाली हैं। समस्या जल्द सुलझाने के लिए खाद्य विभाग ने केंद्र सरकार को पत्र लिखा है। राइस मिलों को भी साफ निर्देश दिए गए हैं कि जैसे ही फोर्टीफाइड सामग्री मिले, तुरंत सप्लाई शुरू कर दें।
कब तक मिल सकता है राहत?
अधिकारियों की मानें तो इस महीने के आखिरी हफ्ते तक राशन दुकानों में चावल पहुंचने की संभावना है। तब तक उपभोक्ताओं को थोड़ा धैर्य रखना होगा। यह देरी पूरे देश के कुछ हिस्सों में देखी जा रही है, जहां फोर्टीफाइड चावल की सप्लाई चेन में रुकावट आई है।
ऐसी स्थितियों में परिवार बाजार से चावल खरीदने को मजबूर हो जाते हैं, जो महंगा पड़ता है। उम्मीद है कि केंद्र और राज्य के प्रयासों से जल्द ही सब कुछ सामान्य हो जाएगा।















