Burping Home Remedies : लगातार डकार आना कई बार शर्मिंदगी का कारण बनता है, लेकिन यह शरीर का एक तरीका है जिससे वह पेट में जमा अतिरिक्त हवा को बाहर निकालता है।
अगर यह समस्या दिनभर बनी रहे, तो यह पाचन तंत्र में असंतुलन, एसिडिटी या बदहजमी का साफ संकेत है। अच्छी बात यह है कि रसोई में मौजूद कुछ सामान्य मसाले और खानपान की आदतों में बदलाव करके इसे आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है।
मसालों का जादू: अदरक, अजवाइन और सौंफ
पाचन को सुधारने में भारतीय मसाले बेहद कारगर हैं। अदरक में पाए जाने वाले ‘जिंजरोल’ और ‘शोगोल’ तत्व पाचन एंजाइम्स को एक्टिव करते हैं।
गर्म पानी में अदरक उबालकर पीने या शहद के साथ इसका रस लेने से गैस बनने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है।
इसी तरह, अजवाइन में मौजूद ‘थाइमोल’ कंपाउंड पेट के एसिड को शांत करता है। एक चम्मच अजवाइन को चुटकी भर काले नमक के साथ गुनगुने पानी से लेने पर फायदा मिलता है।
सौंफ भी पेट की ऐंठन कम करती है। भोजन के बाद आधा चम्मच सौंफ चबाना या इसका उबला पानी पीना भारीपन को दूर करता है।
पुदीना और नींबू पानी का प्रयोग
पुदीने की पत्तियों में मौजूद मेंथॉल पाचन तंत्र को ठंडक पहुंचाता है और फंसी हुई गैस को रिलीज करता है। इसके लिए पुदीने का काढ़ा या 5-6 पत्तियां उबालकर तैयार किया गया पानी पिया जा सकता है।

नींबू भी एसिडिटी कंट्रोल करने में मददगार है। इसमें मौजूद साइट्रेट पेट के पीएच लेवल को संतुलित करता है। सुबह गुनगुने पानी में आधा नींबू मिलाकर पीने से डकार की समस्या में कमी आती है।
खानपान और प्रोबायोटिक्स की भूमिका
दही, छाछ, इडली और ढोकला जैसे प्रोबायोटिक फूड्स पेट की सेहत (गट हेल्थ) के लिए बेहतरीन हैं। ये आंतों में गुड बैक्टीरिया की तादाद बढ़ाते हैं।
एक्सपर्ट्स रोजाना एक कटोरी दही या छाछ लेने की सलाह देते हैं, हालांकि रात के समय दही खाने से बचना चाहिए।
इसके अलावा, खाने की गति पर ध्यान देना जरूरी है। बहुत तेजी से खाना खाने पर भोजन के साथ हवा भी पेट में चली जाती है, जो बाद में डकार का कारण बनती है।
कार्बोनेटेड ड्रिंक्स यानी सोडा और कोल्ड ड्रिंक्स से दूरी बनाना भी जरूरी है, क्योंकि ये पेट में गैस का दबाव बढ़ा देते हैं।














