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DM Savin Bansal के निर्देश पर अलर्ट मोड में प्रशासन, चार जगहों पर एक साथ हुई मॉक ड्रिल

देहरादून में चारधाम यात्रा 2026 की तैयारियों को पुख्ता करने के लिए एनडीएमए और यूएसडीएमए के नेतृत्व में चार प्रमुख स्थानों पर व्यापक मॉक ड्रिल आयोजित की गई। इस अभ्यास के दौरान आगजनी, बाढ़ और भीड़ नियंत्रण जैसे गंभीर परिदृश्यों में राहत एवं बचाव दलों की प्रतिक्रिया समय और समन्वय का परीक्षण किया गया।

डीएम सविन बंसल के निर्देश पर अलर्ट मोड में प्रशासन, चार जगहों पर एक साथ हुई मॉक ड्रिल

HIGHLIGHTS

  • ऋषिकेश ट्रांजिट कैंप, रिस्पना नदी और गांधी शताब्दी अस्पताल समेत 4 केंद्रों पर एक साथ अभ्यास।
  • रिस्पना नदी में बादल फटने और सपेरा बस्ती में बाढ़ जैसे चुनौतीपूर्ण हालात का कृत्रिम परिदृश्य तैयार किया गया।
  • एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और आईटीबीपी सहित विभिन्न विभागों के बीच संचार और निर्णय क्षमता की जांच।

देहरादून, 10 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। आगामी चारधाम यात्रा 2026 को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए शुक्रवार को देहरादून जिले के चार संवेदनशील स्थानों पर एक साथ मेगा मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) के तत्वावधान में हुए इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य वास्तविक आपदा की स्थिति में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और प्रतिक्रिया समय (Response Time) को मापना था।

सुबह ठीक 9:45 बजे जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र से आपदा का अलर्ट जारी होते ही पूरा प्रशासनिक अमला सक्रिय हो गया। जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देशन में एडीएम (वित्त एवं राजस्व) के.के. मिश्रा ने कंट्रोल रूम से कमान संभाली और तत्काल रेस्क्यू टीमों को घटनास्थलों के लिए रवाना किया।

ऋषिकेश ट्रांजिट कैंप और रिस्पना में ‘रेस्क्यू ऑपरेशन’

अभ्यास के दौरान ऋषिकेश यात्रा ट्रांजिट कैंप में भीषण आग लगने का दृश्य तैयार किया गया। यहाँ तैनात टीमों ने न केवल कैंप को सुरक्षित खाली कराया, बल्कि आग में फंसे 5 गंभीर घायलों को तत्काल एम्स ऋषिकेश पहुँचाया। वहीं, मौसम विभाग द्वारा ‘रेड अलर्ट’ जारी होने के बाद उमड़ने वाली भीड़ को होटलों और धर्मशालाओं में सुरक्षित शिफ्ट करने का भी सफल अभ्यास किया गया।

दूसरे बड़े परिदृश्य में, रिस्पना नदी में बादल फटने से सपेरा बस्ती में आई बाढ़ की स्थिति पैदा की गई। यहाँ एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पुलिस की संयुक्त टीमों ने नदी के बहाव के बीच फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। प्रभावितों के लिए मौके पर ही राहत शिविर स्थापित कर भोजन और चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित की गई।

स्वास्थ्य सेवाओं और संचार तंत्र का परीक्षण

राजधानी के गांधी शताब्दी अस्पताल में आपदा के दौरान घायलों के त्वरित उपचार की व्यवस्थाओं को परखा गया। एनडीएमए के विशेषज्ञों ने ड्रिल के समापन पर टीमों के प्रदर्शन की सराहना की, हालांकि उन्होंने भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए संचार व्यवस्था (Communication Network) और त्वरित निर्णय क्षमता को और अधिक सुदृढ़ करने पर जोर दिया।

इस मॉक अभ्यास में सेना, आईटीबीपी, पुलिस, होमगार्ड और स्वास्थ्य विभाग सहित जनपद के सभी प्रमुख अधिकारी शामिल रहे। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि चारधाम यात्रा के दौरान किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए यह तैयारी निरंतर जारी रहेगी।

मॉक ड्रिल के 4 प्रमुख केंद्र:

स्थान आपदा का स्वरूप (कृत्रिम) मुख्य कार्यवाही
ऋषिकेश ट्रांजिट कैंप भीषण आगजनी कैंप खाली कराना और घायलों का एयर/रोड लिफ्ट
ऋषिकेश (भीड़ नियंत्रण) मौसम का रेड अलर्ट यात्रियों को सुरक्षित आश्रयों में शिफ्ट करना
रिस्पना नदी क्षेत्र बादल फटना व बाढ़ सपेरा बस्ती में रेस्क्यू और राहत शिविर संचालन
गांधी शताब्दी अस्पताल सामूहिक हताहत स्थिति घायलों का त्वरित उपचार और ट्रॉमा मैनेजमेंट

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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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