home ताज़ा समाचार देश विदेश क्राइम मनोरंजन बिजनेस ऑटो गैजेट्स खेल हेल्थ लाइफस्टाइल धर्म राशिफल लव राशिफल अंक राशिफल पंचांग करियर ट्रेंडिंग वीडियो

कंटीली तारों के बाद अब खूंखार जानवरों का पहरा, सीमा पर ‘नेचुरल गार्ड्स’ तैनात करने की तैयारी

बीएसएफ भारत-बांग्लादेश सीमा के उन दुर्गम और दलदली इलाकों में सांपों और मगरमच्छों को प्राकृतिक रक्षक के रूप में तैनात करने पर विचार कर रही है जहां बाड़ लगाना मुमकिन नहीं है। इस योजना का उद्देश्य नदी और कीचड़ भरे रास्तों से होने वाली तस्करी और अवैध घुसपैठ पर पूरी तरह नकेल कसना है।

कंटीली तारों के बाद अब खूंखार जानवरों का पहरा, सीमा पर 'नेचुरल गार्ड्स' तैनात करने की तैयारी

HIGHLIGHTS

  • 4096 किलोमीटर लंबी सीमा के 175 किमी के नदी और दलदली क्षेत्र में 'प्राकृतिक बैरियर' की योजना।
  • घुसपैठ और तस्करी रोकने के लिए आधुनिक ड्रोन, सेंसर और कैमरों का भी बढ़ाया जा रहा इस्तेमाल।
  • फिलहाल प्रस्ताव केवल चर्चा के स्तर पर, संवेदनशील इलाकों की पहचान के लिए अधिकारियों को निर्देश।

नई दिल्ली/कोलकाता, 06 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। भारत-बांग्लादेश सीमा की सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए सीमा सुरक्षा बल (BSF) अब एक ऐसे अपरंपरागत और बेहद सख्त विकल्प पर विचार कर रहा है, जो घुसपैठियों के रोंगटे खड़े कर सकता है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सीमा के उन दुर्गम हिस्सों में जहां भौगोलिक परिस्थितियों के कारण भौतिक बाड़ लगाना नामुमकिन है, वहां सांपों और मगरमच्छों को ‘नेचुरल बैरियर’ के तौर पर इस्तेमाल करने की संभावनाओं पर मंथन चल रहा है।

अधिकारियों ने उन नदी और दलदली क्षेत्रों की पहचान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है जो घुसपैठ और तस्करी के लिए सबसे ज्यादा संवेदनशील माने जाते हैं। भारत और बांग्लादेश के बीच की कुल 4,096 किलोमीटर लंबी सीमा का लगभग 175 किलोमीटर का हिस्सा पानी, नदियों और दलदली जमीन से घिरा है। इन इलाकों में लोहे की कंटीली तारें टिक नहीं पातीं, जिसका फायदा उठाकर तस्कर और घुसपैठिए भारतीय सीमा में दाखिल होते रहे हैं।

BSF का यह विचार फिलहाल प्राथमिक चर्चा के स्तर पर है और अब तक कोई औपचारिक आदेश जारी नहीं किया गया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण बंगाल के सुंदरबन जैसे इलाकों में, जहां मगरमच्छ और जहरीले सांप पहले से ही मौजूद हैं, वहां उनकी संख्या का रणनीतिक इस्तेमाल घुसपैठियों के लिए एक मनोवैज्ञानिक डर पैदा करेगा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे ऐसे स्पॉट चिन्हित करें जहां इस योजना का ट्रायल या कार्यान्वयन किया जा सके।

यह सख्त कदम सीमा पर जारी निरंतर तस्करी के जवाब में देखा जा रहा है। इसी साल जनवरी में पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में तैनात 32वीं बटालियन के जवानों ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की थी। खुफिया जानकारी के आधार पर की गई इस कार्रवाई में एक सोना तस्कर को रंगे हाथों दबोचा गया था। पकड़े गए आरोपी के पास से करीब एक करोड़ रुपये की कीमत के सोने के बिस्कुट बरामद किए गए थे। सीमा पर ऐसी वारदातें सुरक्षा बलों के लिए लगातार सिरदर्द बनी हुई हैं।

पुरानी चुनौतियों से निपटने के लिए BSF केवल प्रकृति पर निर्भर नहीं है, बल्कि तकनीक को भी अपना ढाल बना रही है। सीमा की निगरानी को ‘स्मार्ट’ बनाने के लिए थर्मल इमेजर्स, अत्याधुनिक ड्रोन, जमीन के नीचे लगने वाले सेंसर और हाई-डेफिनिशन कैमरों का जाल बिछाया जा रहा है। यह मल्टी-लेयर सुरक्षा तंत्र न केवल घुसपैठियों को ट्रैक करेगा, बल्कि नदी के रास्तों से होने वाली पशु तस्करी और जाली नोटों की आवाजाही पर भी लगाम कसेगा।


देश और दुनिया की ताज़ा ख़बरों (Latest Hindi News) के लिए जुड़े रहें Doon Horizon के साथ। राजनीति (Politics), खेल, मनोरंजन, टेक्नोलॉजी और एजुकेशन से जुड़े हर लाइव अपडेट (Live Updates) और ब्रेकिंग न्यूज़ (Breaking News in Hindi) सबसे पहले पाएं। पढ़िए आपके काम की हर बड़ी खबर, सिर्फ एक क्लिक पर।


Shailendra Pokhriyal

शैलेन्द्र पोखरियाल 'दून हॉराइज़न' में वरिष्ठ राष्ट्रीय संवाददाता के तौर पर देश की सियासत और प्रमुख राष्ट्रीय घटनाओं को कवर करते हैं। केंद्र सरकार की नीतियों, संसद के सत्रों और बड़े राजनीतिक घटनाक्रमों पर उनकी गहरी पकड़ है। शैलेन्द्र का उद्देश्य राजनीतिक बयानों और सरकारी फैसलों के पीछे की असली सच्चाई को निष्पक्ष रूप से पाठकों के सामने रखना है। उनका लंबा पत्रकारीय अनुभव उन्हें जटिल राष्ट्रीय मुद्दों का आसान हिंदी में विश्लेषण करने में मदद करता है। वे पूरी तरह से शोध-आधारित (Fact-checked) और जनहित से जुड़ी बेबाक पत्रकारिता करने के लिए जाने जाते हैं।

Leave a Comment