दून हॉराइज़न, नई दिल्ली (30 सितंबर) : उत्तर भारत के औद्योगिक हब को पश्चिमी तट के बड़े बंदरगाहों से जोड़ने वाला महत्वाकांक्षी अमृतसर-जामनगर इकोनॉमिक कॉरिडोर (Amritsar-Jamnagar Economic Corridor) अब अपने मुकम्मल होने के बेहद करीब है। करीब 80 हजार करोड़ रुपये के निवेश से तैयार हो रहा यह 1,257 किलोमीटर लंबा सिक्स-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड महामार्ग चार अहम राज्यों-पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात को एक सूत्र में पिरोएगा।
निर्माण एजेंसी भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अनुसार परियोजना का 90 फीसदी से ज्यादा काम पूरा कर लिया गया है। राजस्थान के बड़े हिस्से पर यातायात पहले ही शुरू हो चुका है, जबकि बाकी बचे खंडों को इसी वर्ष के अंत तक पूरी तरह आवाजाही के लिए खोलने की तैयारी है।
इस एक्सप्रेसवे के शुरू होते ही सबसे बड़ा बदलाव यात्रा के समय में दिखेगा। वर्तमान में अमृतसर से गुजरात के जामनगर की 1,430 किलोमीटर की दूरी तय करने में भारी वाहनों और सामान्य मुसाफिरों को करीब 26 से 28 घंटे का वक्त लग जाता है। नए संरेखण के बाद यह फासला घटकर 1,316 किलोमीटर रह जाएगा। नतीजा यह होगा कि 120 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार सीमा वाले इस कॉरिडोर पर यह फासला महज 13 घंटे में तय किया जा सकेगा।
चार राज्यों का रूट नेटवर्क और ग्रीनफील्ड का दायरा
इस महागलियारे का 917 किलोमीटर हिस्सा पूरी तरह ग्रीनफील्ड है, यानी इसे मौजूदा सड़कों को चौड़ा करने के बजाय एकदम नई जमीन अधिग्रहित कर बनाया गया है। रूट की बात करें तो पंजाब में इसका 155 किलोमीटर का हिस्सा कपूरथला जिले के टिब्बा से शुरू होकर मोगा, धर्मकोट और बठिंडा होते हुए संगत कलां तक जाता है। इसके बाद हरियाणा के सिरसा जिले में मंडी डबवाली से चौटाला गांव तक 85 किलोमीटर की सड़क गुजरती है।
कॉरिडोर का सबसे बड़ा हिस्सा राजस्थान की झोली में आया है। यहां कुल 637 किलोमीटर लंबा मार्ग हनुमानगढ़, सूरतगढ़, बीकानेर, नागौर, जोधपुर, बाड़मेर, सांचोर और जालौर जैसे 8 जिलों को चीरता हुआ निकलता है। देवगढ़ से गुजरात सीमा के बीच हाल ही में 27 किलोमीटर का हिस्सा खोला गया है। गुजरात में यह थराद, वासरदा, राधनपुर, संतालपुर और मालिया होते हुए जामनगर में समाप्त होता है, जिसकी कुल लंबाई 380 किलोमीटर है।

दिल्ली के यात्रियों के लिए कैसे आसान होगा सफर?
राजधानी दिल्ली से जामनगर जाने वालों को अमूमन जयपुर, उदयपुर और अहमदाबाद के पुराने राष्ट्रीय राजमार्गों से गुजरना पड़ता था, जिसमें 24 से 26 घंटे बर्बाद होते थे। नए तंत्र के तहत दिल्ली से जामनगर की दूरी घटकर 15 से 16 घंटे रह जाएगी। इसके लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से दो प्रमुख रास्ते उपलब्ध होंगे। पहला विकल्प वेस्टर्न पेरिफेरल (KMP) या NH-44 के जरिए रोहतक होकर 152D (ट्रांस-हरियाणा एक्सप्रेसवे) पकड़ना और फिर डबवाली इंटरचेंज से सीधे अमृतसर-जामनगर कॉरिडोर पर उतर जाना है।
दूसरा रास्ता दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे से होकर निकलता है, जहां संगरूर-मोगा के नजदीक लुधियाना-बठिंडा लिंक से मुड़कर सीधे बठिंडा या टिब्बा में इस मार्ग में प्रवेश किया जा सकता है। इसके अलावा दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के पचपदरा-जोधपुर लिंक से भी वैकल्पिक कनेक्टिविटी दी गई है।
तीन रिफाइनरियों का संगम और सीमा पर रणनीतिक मजबूती
यह देश का पहला ऐसा एक्सप्रेसवे है जो सीधे तौर पर तीन विशाल पेट्रोलियम रिफाइनरियों को आपस में जोड़ता है—पंजाब के बठिंडा स्थित एचएमईएल (HMEL), राजस्थान के बाड़मेर में बन रही एचपीसीएल (HPCL) रिफाइनरी और गुजरात के जामनगर में स्थित रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) का रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स। इससे न केवल कच्चे तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों की ढुलाई सस्ती होगी, बल्कि राजस्थान के पारंपरिक उत्पादों-जैसे बीकानेर के पापड़-भुजिया, जोधपुर का काष्ठ और हस्तशिल्प और जालौर का ग्रेनाइट-को सीधे कांडला और मुंद्रा पोर्ट तक त्वरित पहुंच मिलेगी।
रणनीतिक दृष्टिकोण से देखें तो यह हाईवे भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के समानांतर चलता है। किसी भी सैन्य तनाव या युद्ध की स्थिति में थार रेगिस्तान के अग्रिम मोर्चों तक बख्तरबंद गाड़ियों, भारी तोपों और सैन्य साजो-सामान को 24 घंटे के भीतर पहुंचाना मुमकिन होगा। सुरक्षा के लिहाज से पूरे मार्ग पर एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ATMS) और प्रत्येक एक किलोमीटर की दूरी पर एसओएस इमरजेंसी कॉलिंग बॉक्स लगाए गए हैं, ताकि आपात स्थिति में त्वरित मदद मिल सके।











