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क्या आप भी हेल्दी समझकर खा रहे हैं ये चीजें? वेट लॉस की जगह बढ़ सकती है चर्बी

हेल्दी डाइट लेने के बावजूद वजन बढ़ना अक्सर मेटाबॉलिज्म की सुस्ती और गलत खान-पान के तरीकों का परिणाम होता है। आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों ही मानते हैं कि पोषण के साथ-साथ पाचन शक्ति और लाइफस्टाइल का संतुलन वजन घटाने के लिए अनिवार्य है।

Published On: April 4, 2026 9:37 AM
Weight Loss Tips

HIGHLIGHTS

  • हेल्दी फूड्स में मौजूद छिपी हुई कैलोरी और शुगर अनजाने में वजन बढ़ाती हैं।
  • नींद की कमी और हार्मोनल असंतुलन (PCOS/थायराइड) मेटाबॉलिज्म को धीमा कर देते हैं।
  • मांसपेशियों की कमी और शारीरिक निष्क्रियता के कारण कैलोरी बर्न होना कम हो जाता है।

हेल्थ डेस्क, 04 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। Weight Loss Tips : फिटनेस के प्रति बढ़ती जागरूकता के बीच एक बड़ा वर्ग इस बात से परेशान है कि पौष्टिक खाना खाने के बाद भी उनका वजन कम होने का नाम नहीं ले रहा।

यह समस्या केवल खान-पान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे शरीर की आंतरिक कार्यप्रणाली और छिपी हुई आदतें जिम्मेदार हैं।

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में सोशल मीडिया से प्रभावित होकर लोग हेल्दी डाइट तो अपना रहे हैं, लेकिन वे अक्सर ‘पोर्शन कंट्रोल’ और ‘पाचन क्षमता’ को नजरअंदाज कर देते हैं।

आयुर्वेद के अनुसार, हमारा शरीर भोजन से नहीं बल्कि ‘अग्नि’ यानी पाचन शक्ति से चलता है, जिसे आधुनिक विज्ञान मेटाबॉलिज्म कहता है।

अग्नि मंद होने का खतरा

जब शरीर की पाचन अग्नि कमजोर पड़ती है, तो सबसे शुद्ध और सात्विक भोजन भी शरीर में जाकर चर्बी (मेद धातु) का रूप ले लेता है।

विज्ञान स्पष्ट करता है कि मेटाबॉलिज्म धीमा होने पर कैलोरी जलने की प्रक्रिया रुक जाती है और शरीर ऊर्जा को फैट के रूप में स्टोर करना शुरू कर देता है।

हेल्दी फूड्स की अधिकता

अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि अगर कोई चीज हेल्दी है, तो उसे कितनी भी मात्रा में खाया जा सकता है। ड्राई फ्रूट्स, देसी घी, शहद, मूंगफली का मक्खन (पीनट बटर) और एवोकाडो जैसे खाद्य पदार्थ पोषक तत्वों से भरपूर तो हैं, लेकिन ये कैलोरी में बहुत ऊंचे होते हैं।

आयुर्वेद इन्हें ‘गुरु’ यानी भारी भोजन की श्रेणी में रखता है, जिन्हें पचाने में शरीर को काफी मशक्कत करनी पड़ती है। यदि आप अपनी शारीरिक मेहनत से ज्यादा इन भारी चीजों का सेवन करते हैं, तो वजन बढ़ना तय है।

बाजार के ‘हेल्दी’ प्रोडक्ट्स का मायाजाल

बाजार में मिलने वाले लो-फैट दही, मल्टीग्रेन बिस्कुट और एनर्जी बार अक्सर सेहत के नाम पर धोखा होते हैं।

इनमें स्वाद बढ़ाने के लिए छिपी हुई चीनी का इस्तेमाल किया जाता है, जो इंसुलिन लेवल को बढ़ाकर शरीर में फैट स्टोरेज को सक्रिय कर देती है।

आयुर्वेद में मीठे को कफ बढ़ाने वाला माना गया है, जो सीधे तौर पर मोटापे का कारक है।

हार्मोनल असंतुलन और तनाव

कई बार वजन बढ़ने के पीछे डाइट नहीं बल्कि शरीर के अंदर चल रहा हार्मोनल असंतुलन होता है। थायरॉइड, पीसीओएस (PCOS) या लंबे समय तक रहने वाला मानसिक तनाव मेटाबॉलिज्म को सुस्त कर देता है।

कोर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन शरीर को इमरजेंसी मोड में डाल देते हैं, जिससे व्यक्ति कम खाकर भी फूलने लगता है।

नींद और भूख का विज्ञान

नींद की कमी सीधे तौर पर ‘घ्रेलिन’ (भूख बढ़ाने वाला हार्मोन) को बढ़ाती है और ‘लेप्टिन’ (पेट भरने का संकेत देने वाला हार्मोन) को कम कर देती है। आयुर्वेद कहता है कि रात की अधूरी नींद पित्त और वात को बिगाड़ती है, जिससे पाचन तंत्र ध्वस्त हो जाता है।

इसके चलते लोग बिना भूख के भी खाने लगते हैं और उनका शरीर ऊर्जा जलाने में असमर्थ हो जाता है।

उम्र और निष्क्रियता

जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, शरीर की मांसपेशियां कम होने लगती हैं। चूंकि मांसपेशियां आराम की स्थिति में भी कैलोरी बर्न करती हैं, उनकी कमी से मेटाबॉलिज्म सुस्त पड़ जाता है।

सिर्फ डाइट बदलने से काम नहीं चलेगा, मांसपेशियों को सक्रिय रखने के लिए शारीरिक व्यायाम अनिवार्य है।

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Rama Pun

रमा पुन 'दून हॉराइज़न' में हेल्थ और लाइफस्टाइल संपादक के रूप में अपनी अहम जिम्मेदारी निभा रही हैं। स्वास्थ्य, फिटनेस, खानपान और मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) के विषयों पर उनकी पकड़ बेहद मजबूत है। रमा का फोकस हमेशा मेडिकल एक्सपर्ट्स की पुख्ता सलाह और वैज्ञानिक शोध पर आधारित (Evidence-based) खबरें लिखने पर रहता है। उनका स्पष्ट मानना है कि सेहत से जुड़ी कोई भी जानकारी शत-प्रतिशत प्रामाणिक होनी चाहिए। अपनी आकर्षक और तथ्यपरक लेखनी से वे पाठकों को एक स्वस्थ, तनावमुक्त और संतुलित जीवनशैली अपनाने के लिए निरंतर प्रेरित और जागरूक करती हैं।

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