नई दिल्ली, 06 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। नौकरी के दौरान सबसे बड़ा डर भविष्य की आर्थिक तंगी का होता है, लेकिन सही समय पर लिया गया एक फैसला बुढ़ापे को ‘गोल्डन डेज़’ में बदल सकता है। अगर आपकी योजना रिटायरमेंट के तुरंत बाद हर महीने ₹50,000 की नियमित आय सुनिश्चित करने की है, तो इसके लिए आपको पारंपरिक निवेश के दायरे से बाहर निकलकर रणनीति बनानी होगी।
महंगाई की मार के बीच महज फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) या सोने में पैसा लगाना आपकी बचत की वैल्यू कम कर सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, एक सुरक्षित भविष्य के लिए इक्विटी म्यूचुअल फंड, पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) और नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) का मिश्रण सबसे कारगर हथियार साबित होता है।
अगर आप 25 वर्ष की उम्र से निवेश की शुरुआत करते हैं, तो आपको ‘पावर ऑफ कंपाउंडिंग’ का सीधा फायदा मिलता है। इसमें मूलधन पर मिलने वाले ब्याज पर भी ब्याज जुड़ता है, जिससे समय के साथ एक छोटा निवेश भी पहाड़ जैसा बड़ा फंड बन जाता है। उदाहरण के लिए, यदि आप रिटायरमेंट तक ₹1.5 करोड़ का फंड जुटा लेते हैं, तो इसे म्यूचुअल फंड में रखकर सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान (SWP) के जरिए आसानी से ₹50,000 मासिक निकाल सकते हैं।
SWP की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें आपका मूल निवेश मार्केट में बना रहता है और वहां से रिटर्न जेनरेट करता रहता है, जबकि आप अपनी जरूरत के हिसाब से एक निश्चित राशि हर महीने निकाल लेते हैं। यह उन लोगों के लिए बेहतरीन विकल्प है जो सरकारी पेंशन के दायरे में नहीं आते।
बाजार के मौजूदा रुझानों को देखें तो महंगाई दर (Inflation) औसतन 6% के करीब रहती है। ऐसे में केवल 7-8% का रिटर्न देने वाली योजनाएं आपकी क्रय शक्ति को बचा नहीं पाएंगी। इसलिए पोर्टफोलियो में इक्विटी का हिस्सा होना जरूरी है, जो लंबी अवधि में 12-15% तक का औसत रिटर्न देने की क्षमता रखता है। साथ ही, NPS में निवेश करने पर इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C और 80CCD (1B) के तहत अतिरिक्त टैक्स छूट का लाभ भी मिलता है।
निवेश करते समय टैक्स लायबिलिटी को समझना भी बेहद जरूरी है। म्यूचुअल फंड में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) के नियम और NPS के विड्रॉल नियमों को ध्यान में रखकर ही फंड का चुनाव करना चाहिए। सही वित्तीय अनुशासन और एसेट एलोकेशन के जरिए आप बिना किसी पर निर्भर हुए स्वाभिमान के साथ अपनी रिटायरमेंट लाइफ एन्जॉय कर सकते हैं।










