नई दिल्ली, 06 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। बढ़ती महंगाई की मार झेल रहे लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए अप्रैल का महीना आर्थिक खुशहाली की नई किरण लेकर आ रहा है। मोदी सरकार अप्रैल के दूसरे सप्ताह में होने वाली महत्वपूर्ण कैबिनेट बैठक में महंगाई भत्ते (DA Hike April 2026) और महंगाई राहत (DR) में 2 प्रतिशत की अतिरिक्त वृद्धि पर अंतिम मुहर लगा सकती है।
सबसे राहत की बात यह है कि यह फैसला पिछली तारीख यानी 1 जनवरी 2026 से ही प्रभावी माना जाएगा, जिससे कर्मचारियों को पिछले तीन महीनों का एरियर भी मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
सरकार के इस कदम से कर्मचारियों की ‘टेक-होम सैलरी’ में सीधा उछाल देखने को मिलेगा। वर्तमान में केंद्रीय कर्मियों को उनकी बेसिक सैलरी पर 58 प्रतिशत की दर से महंगाई भत्ता मिल रहा है, जो इस संभावित फैसले के बाद बढ़कर 60 प्रतिशत हो जाएगा।
हालांकि प्रतिशत के लिहाज से यह आंकड़ा छोटा लग सकता है, लेकिन 8वें वेतन आयोग के लागू होने की सुगबुगाहट के बीच यह वृद्धि मध्यम वर्गीय सरकारी परिवारों के घरेलू बजट को काफी सहारा देगी। खास तौर पर उन पेंशनभोगियों के लिए यह बड़ी राहत है जो अपनी दवाओं और दैनिक जरूरतों के लिए पूरी तरह पेंशन पर निर्भर हैं।
महंगाई भत्ते के ऐलान में इस बार हुई देरी के पीछे एक बड़ी तकनीकी वजह रही है। दरअसल, 7वें वेतन आयोग का कार्यकाल 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो चुका है और 1 जनवरी 2026 से कर्मचारी सैद्धांतिक रूप से 8वें वेतन आयोग के दायरे में आ चुके हैं। नवंबर 2025 में गठित 8वें वेतन आयोग को अपनी सिफारिशें सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है।
इस संक्रमण काल (ट्रांजिशन पीरियड) के दौरान भत्ते की गणना कैसे की जाए, इसे लेकर वित्त मंत्रालय के भीतर लंबी चर्चा चली। अंततः सरकार ने तय किया है कि जब तक नए आयोग की अंतिम रिपोर्ट नहीं आती, तब तक महंगाई भत्ते का भुगतान पुराने स्वीकृत फॉर्मूले के आधार पर ही जारी रहेगा।
इस बढ़ोतरी का सीधा फायदा देश के 1 करोड़ से अधिक सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को मिलेगा। भविष्य की रणनीति के लिहाज से भी यह फैसला अहम है, क्योंकि नियमानुसार जब भी नया वेतन आयोग पूरी तरह जमीन पर उतरता है, तब तक संचित हुए कुल महंगाई भत्ते को बेसिक सैलरी (मूल वेतन) में मर्ज कर दिया जाता है।
इसके बाद नए सिरे से DA की गणना शून्य से शुरू होती है, जिससे वेतन ढांचे में एक बड़ा स्ट्रक्चरल बदलाव आता है। फिलहाल, अप्रैल की कैबिनेट बैठक पर पूरे देश के सरकारी महकमों की नजरें टिकी हुई हैं।










