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1961 का इनकम टैक्स एक्ट खत्म, अब इन नए नियमों से भरा जाएगा आपका रिटर्न

भारत में 1 अप्रैल 2026 से नया इनकम टैक्स एक्ट 2025 प्रभावी हो गया है, जिसने छह दशक पुराने 1961 के कानून की जगह ले ली है। टैक्सपेयर्स की सुविधा के लिए ई-फाइलिंग पोर्टल पर इंटीग्रेटेड पेमेंट मॉड्यूल और 7 महत्वपूर्ण क्विक लिंक्स एक्टिव किए गए हैं।

1961 का इनकम टैक्स एक्ट खत्म, अब इन नए नियमों से भरा जाएगा आपका रिटर्न

HIGHLIGHTS

  • 1961 का पुराना इनकम टैक्स एक्ट आधिकारिक तौर पर निरस्त, अब नए नियमों के तहत होगी फाइलिंग।
  • असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए जारी हुए नए फॉर्म्स, पुराने और नए सिस्टम का हाइब्रिड मॉडल लागू।
  • ई-फाइलिंग पोर्टल पर 'क्विक लिंक्स' के जरिए आधार लिंकिंग से लेकर नोटिस रिप्लाई तक सब कुछ हुआ आसान।

नई दिल्ली, 06 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। देश की प्रत्यक्ष कर व्यवस्था में अब तक का सबसे बड़ा विधायी बदलाव जमीन पर उतर चुका है। 1 अप्रैल 2026 से दशकों पुराने इनकम टैक्स एक्ट, 1961 को आधिकारिक तौर पर विदाई दे दी गई है और इसकी जगह ‘नया इनकम टैक्स एक्ट, 2025’ पूरी तरह प्रभावी हो गया है।

इस ट्रांजिशन फेज में टैक्सपेयर्स को किसी भी तरह की कानूनी पेचीदगी से बचाने के लिए ई-फाइलिंग पोर्टल को पूरी तरह अपग्रेड कर दिया गया है। असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए नए फॉर्म्स की सीरीज लॉन्च की गई है, जिन्हें चुनते समय अब करदाताओं को अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी।

सरकार ने इस बदलाव को सुगम बनाने के लिए एक ‘हाइब्रिड फ्रेमवर्क’ तैयार किया है, जहां पुराने और नए सिस्टम के प्रावधान कुछ समय के लिए समानांतर चलेंगे। सबसे बड़ी राहत ई-फाइलिंग पोर्टल पर आए ‘इंटीग्रेटेड पेमेंट मॉड्यूल’ से मिली है।

यह मॉड्यूल यूजर्स को एक ही इंटरफेस के भीतर दोनों टैक्स व्यवस्थाओं के तहत भुगतान की सुविधा देता है। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि गलत चालान भरने की संभावना भी लगभग खत्म हो जाएगी। पोर्टल पर मौजूद ‘Quick Links’ सेक्शन अब महज एक शॉर्टकट नहीं, बल्कि टैक्सपेयर्स के लिए एक लाइफलाइन बन गया है।

इन 7 लिंक्स को समझना है बेहद जरूरी

इनकम टैक्स विभाग ने पोर्टल के ‘क्विक लिंक्स’ सेक्शन में सात ऐसी सुविधाएं दी हैं, जिनके बिना फाइलिंग अधूरी है:

  • e-Pay Tax: यह नया फीचर पुराने और नए दोनों टैक्स स्ट्रक्चर के लिए पेमेंट गेटवे का काम करता है। यह सुनिश्चित करता है कि ट्रांजिशन पीरियड के दौरान आप सही हेड में टैक्स जमा कर रहे हैं।
  • e-Verify Return: सिर्फ रिटर्न फाइल करना काफी नहीं है। आधार ओटीपी या नेट बैंकिंग के जरिए तुरंत वेरिफिकेशन जरूरी है, ताकि आपका रिफंड समय पर प्रोसेस हो सके।
  • Know Tax Payment Status: भुगतान सफल हुआ या नहीं, इसे लेकर अब संशय की जरूरत नहीं है। यह टूल रियल-टाइम ट्रांजैक्शन ट्रैकिंग की सुविधा देता है।
  • Link Aadhaar/View Status: आधार और पैन को लिंक करना अब अनिवार्य शर्त है। इसके बिना न तो टैक्स जमा होगा और न ही रिटर्न प्रोसेस किया जाएगा।
  • इनकम टैक्स कैलकुलेटर: नए कानून के संशोधनों को ध्यान में रखते हुए यह कैलकुलेटर आपकी सटीक देनदारी बताता है, जिससे आप पुरानी और नई स्कीम के बीच तुलना कर सकते हैं।
  • नोटिस का पालन करें: अगर विभाग से कोई नोटिस आता है, तो इस लिंक के जरिए आप सीधे डॉक्यूमेंट्स अपलोड कर सकते हैं और पेनाल्टी से बच सकते हैं।
  • इंस्टेंट e-PAN: नए करदाताओं के लिए यह सबसे तेज रास्ता है, जिससे बिना किसी कागजी कार्रवाई के तुरंत डिजिटल पैन हासिल किया जा सकता है।

बदलते वित्तीय परिवेश में इन डिजिटल टूल्स का सही इस्तेमाल ही आपको टैक्स डिफॉल्टर बनने से बचा सकता है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए फॉर्म का चुनाव करते समय नए एक्ट की धाराओं को ध्यान में रखना अनिवार्य है।


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Rajat Sharma

रजत शर्मा 'दून हॉराइज़न' में लीड बिज़नेस एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड्स, क्रिप्टोकरेंसी और सरकारी आर्थिक नीतियों को कवर करने में उनका लंबा और जमीनी अनुभव है। रजत की सबसे बड़ी खासियत जटिल आर्थिक आंकड़ों और मार्केट ट्रेंड्स को सरल, आम बोलचाल की हिंदी में डिकोड करना है। वे तथ्य-आधारित (Fact-based) और गहराई से रिसर्च की गई स्टोरीज लिखते हैं, ताकि आम निवेशक और व्यापारी सही वित्तीय फैसले ले सकें। रजत की पत्रकारिता हमेशा सत्य, निष्पक्षता और पाठकों के आर्थिक हितों को प्राथमिकता देते हुए आगे बढ़ती है।

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