नई दिल्ली, 04 अप्रैल 2026 (आरएनएस)। पश्चिम एशिया में इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच भड़की युद्ध की चिंगारी अब सीधे भारतीय आम आदमी के निजी जीवन और बेडरूम तक पहुंच गई है। वैश्विक तनाव और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अनिश्चित नीतियों के बीच ईरान ने दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री व्यापारिक मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पर ताला जड़ दिया है।
इस नाकेबंदी ने भारत के पेट्रोकेमिकल आयात की कमर तोड़ दी है, जिससे कंडोम बनाने वाली कंपनियों की लागत में भारी उछाल आने वाला है। भारत इस रूट के जरिए न केवल कच्चा तेल, बल्कि लुब्रिकेंट निर्माण के लिए जरूरी सिलिकॉन ऑयल और अमोनिया का भी बड़ा हिस्सा मंगवाता है।
8,000 करोड़ रुपये से अधिक के भारतीय कंडोम बाजार में इस वक्त खलबली मची हुई है क्योंकि उत्पादन के लिए जरूरी कच्चे माल की किल्लत पैदा हो गई है। कारोबारियों का दावा है कि अमोनिया की कीमतों में 50 फीसदी तक की वृद्धि देखी जा सकती है, जिसका सीधा असर रीटेल कीमतों पर पड़ेगा।
कंडोम को मुलायम और इस्तेमाल के लायक बनाने के लिए सिलिकॉन ऑयल की कोटिंग अनिवार्य होती है, जिसकी सप्लाई अब अनिश्चित हो गई है। इसके साथ ही पैकेजिंग के लिए इस्तेमाल होने वाली एल्युमिनियम और पीवीसी फाइल की कमी ने मैन्युफैक्चरर्स की नींद उड़ा दी है।
लॉजिस्टिक्स का संकट इतना गहरा है कि जो समुद्री कंटेनर सात दिनों में भारतीय बंदरगाहों पर पहुंच जाते थे, उन्हें अब घूमकर आने में 21 दिन से ज्यादा का समय लग रहा है। देरी और बढ़ते भाड़े ने सरकार के परिवार नियोजन कार्यक्रमों के बजट पर भी संकट के बादल मंडरा दिए हैं।
हालात की गंभीरता को भांपते हुए मोदी सरकार ने महंगाई के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को डूबने से बचाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। वित्त मंत्रालय ने एक इमरजेंसी नोटिफिकेशन जारी कर 41 प्रमुख पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी को शून्य कर दिया है।
यह छूट 2 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो चुकी है और आगामी 30 जून 2026 तक लागू रहेगी ताकि प्लास्टिक, फार्मा, टेक्सटाइल और कंडोम जैसी इंडस्ट्रीज को राहत मिल सके। सरकार का उद्देश्य इन तीन महीनों में सप्लाई चेन को स्थिर करना है ताकि युद्ध का बोझ सीधा जनता की जेब पर न पड़े।










