नई दिल्ली, 04 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बादलों ने भारत की रसोई और व्यापारियों की तिजोरी पर सीधा हमला बोल दिया है। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाला व्यापार पूरी तरह चरमरा गया है।
खारी बावली, जो एशिया की सबसे बड़ी ड्राई फ्रूट मंडी है, वहां अफगानिस्तान और ईरान से आने वाले सूखे मेवों की आवक लगभग रुक गई है। सप्लाई चेन टूटने का असर यह है कि महज कुछ दिनों के भीतर बादाम, पिस्ता और अंजीर जैसी जरूरी चीजों के दाम 25 से 30 फीसदी तक चढ़ गए हैं।
दिल्ली के प्रमुख कारोबारी सनी के मुताबिक, ईरान से आयात होने वाले मामरा बादाम, पिस्ता मगज और हींग की सप्लाई पोर्ट्स पर डंप हो गई है। मुनक्का, ईरानी रिंग और शाहजीरा के दाम भी 15 फीसदी तक बढ़ चुके हैं, जिससे खरीदार और दुकानदार दोनों परेशान हैं।
युद्ध के कारण बढ़ी इस महंगाई का सबसे बड़ा असर 19 अप्रैल से शुरू हो रहे वेडिंग सीजन पर पड़ेगा। व्यापारियों का अनुमान है कि शादी की खरीदारी बढ़ने पर कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत की अतिरिक्त तेजी आ सकती है, जो आम आदमी की जेब खाली कर देगी।
| ड्राई फ्रूट | वर्तमान भाव (प्रति किलो) | संभावित बढ़ोतरी |
| बादाम | ₹1240 | 10-15% |
| पिस्ता | ₹1500 | 12-15% |
| अंजीर | ₹1600 | 10-20% |
| हींग | ₹6000 | 15% |
| खुबानी | ₹800 | 10% |
निर्यात के मोर्चे पर भी भारत को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक है और ईरान बासमती का प्रमुख खरीदार। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से चावल का एक्सपोर्ट 35% तक गिर गया है और स्टॉक कंटेनरों में ही सड़ रहा है।
दिल्ली ग्रेन मर्चेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेश गुप्ता ने खुलासा किया कि जोखिम बढ़ते देख लंदन की एक प्रमुख इंश्योरेंस कंपनी ने चावल का बीमा करना बंद कर दिया है। अब व्यापारी ओमान के रास्ते सड़क मार्ग का सहारा ले रहे हैं, जिससे ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट 4 गुना ज्यादा लग रही है।
मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, साल 2024 में भी लाल सागर संकट के दौरान फ्रेट चार्जेस में 150-200% की वृद्धि देखी गई थी, लेकिन मौजूदा ईरान संकट ने उन रिकॉर्ड्स को भी पीछे छोड़ दिया है। छोटे निर्यातक, जो हर महीने कम शिपमेंट भेजते थे, उनके लिए कारोबार करना अब लगभग नामुमकिन हो गया है।










