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Chardham Yatra 2026: 50 की उम्र पार? अब ईसीजी रिपोर्ट के बिना आगे बढ़ना होगा मुश्किल

उत्तराखंड सरकार ने 19 अप्रैल से शुरू हो रही चारधाम यात्रा के लिए हेल्थ और सुरक्षा का 'फुल प्रूफ' प्लान तैयार किया है। 50 वर्ष से अधिक उम्र के श्रद्धालुओं के लिए अनिवार्य ईसीजी जांच और लैंडस्लाइड जोन में जेसीबी की तैनाती जैसे कड़े कदम उठाए गए हैं।

Chardham Yatra 2026: 50 की उम्र पार? अब ईसीजी रिपोर्ट के बिना आगे बढ़ना होगा मुश्किल

HIGHLIGHTS

  • 50+ आयु वाले यात्रियों की यात्रा रूट के अस्पतालों में होगी अनिवार्य ईसीजी जांच।
  • 10 अप्रैल को सात जिलों में गृह मंत्रालय के निर्देश पर होगी बड़ी मॉक ड्रिल।
  • ड्यूटी शुरू होने से 7 दिन पहले ही अपने पॉइंट्स पर पहुंच जाएंगे पुलिसकर्मी।

देहरादून, 08 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने आगामी चारधाम यात्रा को लेकर अपनी पूरी ताकत झोंक दी है, जहां एक ओर केदारनाथ और बदरीनाथ धाम में बिछी बर्फ की सफेद चादर को काटकर रास्ता बनाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर श्रद्धालुओं की सेहत को लेकर इस बार नियम काफी सख्त कर दिए गए हैं।

स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने विधानसभा में हुई उच्च स्तरीय बैठक के दौरान स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि 50 वर्ष से अधिक आयु के हर श्रद्धालु की ईसीजी (ECG) जांच कराई जाएगी। यात्रा मार्ग पर पड़ने वाले प्रमुख अस्पतालों में तत्काल प्रभाव से ईसीजी मशीनें स्थापित की जा रही हैं। गंभीर मरीजों को एयरलिफ्ट करने के लिए विशिष्ट हेली एंबुलेंस की सुविधा भी सुनिश्चित कर दी गई है।

यात्रा मार्ग पर तैनात होने वाली सभी एंबुलेंस की फिटनेस जांच और उपकरणों की परख पहले ही पूरी करने के आदेश दिए गए हैं। इस बार बदरीनाथ और केदारनाथ धाम में दो नए आधुनिक अस्पतालों का संचालन शुरू हो रहा है, जिसमें डॉक्टरों की संख्या में भी इजाफा किया गया है। यात्रा 19 अप्रैल से शुरू होनी है, जिसे लेकर प्रशासन समय के साथ रेस लगा रहा है।

आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक के अनुसार, किसी भी आपात स्थिति या भूस्खलन से निपटने के लिए ‘सेफ प्लान’ तैयार है। गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों पर 10 अप्रैल को उत्तराखंड के सात संवेदनशील जिलों में एक व्यापक मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी। इसमें राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) मिलकर तालमेल परखेंगे।

सरकार ने जोखिम कम करने के लिए यात्रा मार्ग के सभी डेंजर जोन्स की जीआईएस (GIS) मैपिंग अनिवार्य कर दी है। इसके अलावा, यात्रियों के लिए एक रियल-टाइम वेदर अलर्ट सिस्टम विकसित किया गया है। यदि रास्ता बंद होता है, तो यात्रियों को ठहराने के लिए होटलों और धर्मशालाओं की क्षमता का ऑडिट किया जा रहा है ताकि भीड़ अनियंत्रित न हो।

आईजी गढ़वाल रेंज राजीव स्वरूप ने पुलिस व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए निर्देश दिया है कि सभी जवानों को उनकी ड्यूटी लोकेशन पर यात्रा शुरू होने से एक सप्ताह पहले ही तैनात कर दिया जाएगा। इससे पुलिसकर्मी स्थानीय भूगोल, आपातकालीन निकासी रास्तों और स्थानीय लोगों से बेहतर तालमेल बैठा सकेंगे। केदारनाथ-बदरीनाथ में तैनात होने वाले जवानों को विशेष स्नो-किट और हीटिंग उपकरण दिए जा रहे हैं।

टिहरी एसएसपी श्वेता चौबे ने मुनिकीरेती जैसे भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों का निरीक्षण कर ट्रैफिक मैनेजमेंट सुधारने के निर्देश दिए हैं। संवेदनशील पॉइंट्स पर सीसीटीवी कैमरों का जाल बिछाया गया है। भूस्खलन की स्थिति में रास्तों को तुरंत खोलने के लिए संवेदनशील मोड़ों पर जेसीबी और पोकलैंड मशीनें स्टैंडबाय मोड में रहेंगी, जिनके ऑपरेटरों के नंबर सीधे कंट्रोल रूम से लिंक रहेंगे।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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