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पौड़ी जिला अस्पताल में करोड़ों की CT स्कैन मशीन बनी कबाड़, स्वास्थ्य मंत्री ने लिया बड़ा एक्शन

उत्तराखंड सरकार ने पौड़ी जिला अस्पताल में करोड़ों की सीटी स्कैन मशीन के रखरखाव में लापरवाही बरतने पर प्रमुख अधीक्षक को निलंबित कर दिया है। स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल के कड़े रुख के बाद शासन ने यह अनुशासनात्मक कार्रवाई की है।

Published On: अप्रैल 6, 2026 6:13 अपराह्न
पौड़ी जिला अस्पताल में करोड़ों की CT स्कैन मशीन बनी कबाड़, स्वास्थ्य मंत्री ने लिया बड़ा एक्शन

HIGHLIGHTS

  • वर्ष 2022 से खुले में रखी गई थी करोड़ों की लागत वाली सीटी स्कैन मशीन।
  • जांच में प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर डॉ. विजयेन्द्र भारद्वाज सस्पेंड।
  • स्वास्थ्य मंत्री ने सरकारी संपत्ति के नुकसान पर सख्त विभागीय जांच के दिए आदेश।

पौड़ी, 06 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड के पौड़ी जिला अस्पताल में करोड़ों रुपये की लागत से आई सीटी स्कैन मशीन को धूल फांकने और उसे कबाड़ में तब्दील करने के मामले में शासन ने बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक की है। स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल के कड़े निर्देशों के बाद चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने तत्कालीन प्रमुख अधीक्षक डॉ. विजयेन्द्र भारद्वाज को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

मशीन के रख-रखाव में बरती गई यह लापरवाही कितनी गंभीर थी, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि साल 2022 से यह कीमती जीवन रक्षक उपकरण बिना किसी शेड या सुरक्षा के खुले आसमान के नीचे पड़ा था। बारिश, धूप और धूल की मार झेलते-झेलते करोड़ों की यह मशीन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है।

शासन को मिली जांच रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ है कि अस्पताल प्रशासन और संबंधित अधिकारियों ने सरकारी संपत्ति के संरक्षण में घोर उदासीनता दिखाई। डॉ. विजयेन्द्र भारद्वाज पर अपने दायित्वों के निर्वहन में विफल रहने और जनता के पैसे की बर्बादी का सीधा आरोप लगा है।

इस पूरे प्रकरण पर नाराजगी जताते हुए स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने साफ कर दिया है कि राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रबंधन की जिम्मेदारी है और दोषियों के खिलाफ सख्त विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।

उल्लेखनीय है कि यह मशीन दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र के मरीजों को कम खर्च में जांच की सुविधा देने के लिए खरीदी गई थी। अस्पताल प्रबंधन की इस लापरवाही के कारण अब तक हजारों मरीजों को प्राइवेट सेंटरों का रुख करना पड़ा है, जिससे उन पर आर्थिक बोझ भी बढ़ा।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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