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Paper Leak : जंतर-मंतर पर पेपर लीक का दावा करने वाला सिपाही शेर सिंह निकला दागी, पिथौरागढ़ से हुआ था सस्पेंड

दिल्ली के जंतर-मंतर पर पुलिस वर्दी पहनकर कथित तौर पर इस्तीफा देने वाला सिपाही शेर सिंह पहले से निलंबित और आपराधिक छवि का आरोपी निकला। कुमाऊं आईजी निवेदिता कुकरेती ने स्पष्ट किया कि आरोपी सिपाही कुख्यात गैंगस्टर प्रवीण वाल्मीकि के गिरोह से जुड़ा रहा है और जेल भी जा चुका है।

Paper Leak : जंतर-मंतर पर पेपर लीक का दावा करने वाला सिपाही शेर सिंह निकला दागी, पिथौरागढ़ से हुआ था सस्पेंड

HIGHLIGHTS

  • जंतर-मंतर पर वर्दी पहनकर सिपाही ने दिया इस्तीफा
  • आरोपी सिपाही शेर सिंह 20 जुलाई 2026 से निलंबित
  • कुख्यात अपराधी प्रवीण वाल्मीकि से सीधे कनेक्शन का आरोप
  • 15 सितंबर 2025 को पुलिस ने भेजा था जेल

देहरादून, 24 जुलाई, 2026 (दून हॉराइज़न)।

Paper Leak : राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित कॉकरोच जनता पार्टी और छात्रों के प्रदर्शन के दौरान उत्तराखंड पुलिस की वर्दी पहनकर पहुंचे एक व्यक्ति ने मंच से अजीबोगरीब दावे किए। खुद को पुलिस महकमे का सिपाही बताते हुए उसने मंच पर माइक संभालकर बयान दिया कि उत्तराखंड में परचून की दुकान पर पटवारी भर्ती के पेपर बिकते हैं। इतना ही नहीं, उसने अपनी वर्दी से पुलिस का बैज उतारकर मंच पर ही अपनी नौकरी से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया। इस वाकये की तस्वीर और वीडियो सामने आते ही पुलिस महकमे में खलबली मच गई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस विभाग ने तुरंत जांच बैठाई और आरोपी का सच सामने ला दिया। जांच में सामने आया कि जंतर-मंतर पर माइक संभालकर युवाओं को भड़काने वाला व्यक्ति पिथौरागढ़ जिले में तैनात निलंबित सिपाही शेर सिंह है। शेर सिंह काफी लंबे समय से पुलिस सेवा से बाहर चल रहा है और उसका पुराना आपराधिक रिकॉर्ड दर्ज है। महकमे का कहना है कि आरोपी युवाओं के बीच जाकर झूठे और उकसाने वाले बयानबाजी में शामिल हुआ है।

कुमाऊं रेंज की आईजी निवेदिता कुकरेती ने आरोपी सिपाही के पूरे मामले की जानकारी सार्वजनिक की है। उन्होंने बताया कि सिपाही शेर सिंह 28 जून 2026 से बिना किसी पूर्व सूचना या आधिकारिक अनुमति के पिथौरागढ़ स्थित अपने ड्यूटी स्थल से गायब था। इस गैरहाजिरी पर पिथौरागढ़ पुलिस अधीक्षक की ओर से सिपाही को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। नोटिस का तय सीमा के भीतर कोई जवाब न देने के कारण महकमे ने सख्त कदम उठाते हुए उसे 20 जुलाई 2026 को आधिकारिक रूप से सस्पेंड कर दिया था।

आईजी कुमाऊं निवेदिता कुकरेती के अनुसार शेर सिंह कोई आम सिपाही नहीं है बल्कि उसका अतीत गंभीर अपराधों से भरा रहा है। वह अपने एक अन्य साथी के साथ मिलकर क्षेत्र के नामी गैंगस्टर प्रवीण वाल्मीकि के साथ संगठित अपराध का नेटवर्क चला रहा था। ये लोग मिलकर सीधे-साधे और असहाय लोगों को डरा-धमकाकर उनकी कीमती जमीनों पर अवैध रूप से कब्जा करने का काम करते थे। इस सिलसिले में हरिद्वार जिले के गंगनहर थाने में उसके खिलाफ गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज है।

आरोपी सिपाही शेर सिंह की गिरफ्तारी भी पहले हो चुकी है। जमीन कब्जाने और रंगदारी मांगने के पुख्ता सुबूत मिलने के बाद 15 सितंबर 2025 को पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा था। वह कई महीनों तक सलाखों के पीछे रहा और वर्तमान में अदालत से जमानत मिलने के बाद बाहर आया हुआ था। जेल जाने के तुरंत बाद से ही उसके खिलाफ पुलिस महकमे से बर्खास्तगी (डिसमिसल) की विभागीय प्रक्रिया लगातार जारी है।

गैंगस्टर प्रवीण वाल्मीकि और सिपाही शेर सिंह के बीच सांठगांठ बेहद गहरी पाई गई है। हरिद्वार और रुड़की क्षेत्र में आतंक का पर्याय बना गैंगस्टर प्रवीण वाल्मीकि हत्या, जानलेवा हमला, अपहरण और अवैध वसूली जैसे दर्जनों मामलों में वर्तमान में जेल में बंद है। जेल में रहते हुए भी उसका गिरोह सक्रिय था, जिसमें सिपाही शेर सिंह अहम भूमिका निभा रहा था। वर्दी की आड़ में शेर सिंह गिरोह के आर्थिक और भू-माफिया से जुड़े कामों को संभालता था।

गंगनहर थाने में दर्ज मुकदमे के मुताबिक सिपाही शेर सिंह ने मनीष बॉलर और हसन अब्बास जैदी जैसे अन्य आरोपियों के साथ मिलकर जमीनों का अवैध कारोबार फैलाया। गिरोह ने रुड़की की रहने वाली एक लाचार विधवा महिला और उसके परिवार को अपना निशाना बनाया था। पीड़िता के भाई और देवर पर गिरोह के गुर्गों ने जानलेवा फायरिंग की थी, जिसके डर से महिला अपने छोटे बच्चों को लेकर शहर छोड़कर दूसरी जगह छुपने पर मजबूर हो गई थी।

पीड़िता के पलायन करते ही सिपाही और उसके साथियों ने विधवा महिला की जमीन पर जबरन कब्जा कर लिया और फर्जी दस्तावेज तैयार कर उसे बाजार में बेच दिया। जांच में यह भी तथ्य सामने आया कि पुलिस सेवा में तैनात रहते हुए शेर सिंह अपने पद और वर्दी का सीधा दुरुपयोग करता था। वह सितारगंज जेल और रुड़की न्यायालय परिसर में जाकर बंद गैंगस्टर प्रवीण वाल्मीकि से नियमित मुलाकातें करता था और गिरोह के निर्देशों का पालन करता था।

न्यायालय में पेशी के दौरान भी सिपाही पीड़िता और उसके परिवार पर लगातार दबाव बनाता था। आरोपी सिपाही पीड़िता को गैंगस्टर के सामने ले जाकर डराता था ताकि वह पुलिस में दर्ज अपना केस वापस ले ले। इस पूरी साजिश और फर्जी सौदे से सिपाही शेर सिंह ने लाखों रुपये का मुनाफा कमाया था। इन सभी तथ्यों की जांच रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपी गई थी, जिसके बाद 15 सितंबर 2025 को उसकी गिरफ्तारी संभव हो सकी थी।

जेल में रहने के बाद आरोपी को 7 नवंबर 2025 को नैनीताल उच्च न्यायालय से जमानत मिली थी। जमानत पर छूटने के बावजूद वह लगातार अपनी हरकतों से बाज नहीं आया। विभागीय जांचों का सामना कर रहा सिपाही ड्यूटी से गायब होकर दिल्ली पहुंच गया और जंतर-मंतर पर माहौल खराब करने की कोशिश करने लगा। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी के खिलाफ बर्खास्तगी की प्रक्रिया को अब और तेज किया जाएगा।

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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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