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Dehradun Lok Adalat : देहरादून में 12 सितंबर को लगेगी राष्ट्रीय लोक अदालत, 11 सितंबर तक स्वीकार किए जाएंगे आवेदन

देहरादून जिले में 12 सितंबर 2026 को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा, जिसके लिए पक्षकार 11 सितंबर तक आवेदन कर सकते हैं। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव सीमा डुंगराकोटी ने बताया कि इस मंच से विभिन्न समझौता योग्य मामलों का शीघ्र और स्थायी समाधान संभव है।

National Lok Adalat to be Held in Dehradun on 12 September 2026

HIGHLIGHTS

  • 12 सितंबर 2026 को लगेगी राष्ट्रीय लोक अदालत।
  • आवेदन करने की अंतिम तिथि 11 सितंबर है।
  • बैंक ऋण, बिजली, पानी व एनआई एक्ट मामले सुलझेंगे।
  • लोक अदालत के फैसले अंतिम और बाध्यकारी होंगे।

देहरादून, 03 अगस्त, 2026 (दून हॉराइज़न)।

Dehradun Lok Adalat : उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल के निर्देशानुसार जनपद देहरादून में आगामी 12 सितंबर 2026, शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन होने जा रहा है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से पूरी प्रशासनिक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। अदालतों में लंबित मुकदमों के बोझ को कम करने और नागरिकों को सुलभ न्याय दिलाने के उद्देश्य से यह आयोजन किया जा रहा है।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, देहरादून की सचिव सीमा डुंगराकोटी ने जनपद के सभी नागरिकों और वादकारियों से इस लोक अदालत का ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाने की आधिकारिक अपील जारी की है। उन्होंने कहा कि जो लोग लंबे समय से अदालती चक्करों से परेशान हैं, वे इस अवसर का उपयोग करके अपने विवादों का शांतिपूर्ण समाधान निकाल सकते हैं।

लोक अदालत में आपसी सहमति के आधार पर फौजदारी के समझौता योग्य मामलों का त्वरित निस्तारण किया जाएगा। इसके साथ ही चेक बाउंस से जुड़े धारा 138 एनआई एक्ट के केसों को प्रमुखता से सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जा रहा है। इन मामलों में शामिल पक्षकार बिना लंबी कानूनी प्रक्रिया के आपसी तालमेल से केस खत्म कर सकते हैं।

मोटर दुर्घटना प्रतिकर वाद यानी सड़क हादसों के मुआवजे से जुड़े दावों का निपटारा भी इसी मंच पर होगा। दुर्घटना पीड़ितों और बीमा कंपनियों के बीच बातचीत के जरिए मुआवजे की राशि तय कराई जाएगी ताकि पीड़ितों को तुरंत आर्थिक राहत मिल सके।

बैंक ऋण एवं वसूली संबंधी मामले, वैवाहिक विवाद और श्रम व दीवानी मुकदमों की सुनवाई भी 12 सितंबर को आयोजित होने वाली लोक अदालत में की जाएगी। परिवार से जुड़े मुकदमों में आपसी सहमति से रिश्ते सुधारने और विवाद समाप्त करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

विद्युत एवं जल आपूर्ति से जुड़े बकाये और अन्य विवादित प्रकरणों को भी लोक अदालत के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। बिजली और पानी के बिलों से संबंधित लंबे समय से अटके मामलों का मौके पर ही समाधान कराने की योजना बनाई गई है।

इच्छुक पक्षकार आगामी 11 सितंबर 2026 तक संबंधित न्यायालय में स्वयं जाकर या अपने नियुक्त अधिवक्ता के माध्यम से प्रार्थना पत्र जमा कर सकते हैं। निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन करने वाले मुकदमों को ही लोक अदालत की बेंचों के समक्ष सुनवाई के लिए रखा जाएगा।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अनुसार लोक अदालत के माध्यम से मुकदमों का निपटारा बेहद सरल, त्वरित और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न होता है। औपचारिक अदालती बहसों और बार-बार की तारीखों से मुक्ति मिलने के कारण पक्षकारों को मानसिक तनाव से राहत मिलती है।

इस वैकल्पिक न्याय व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इससे पक्षकारों के कीमती समय और धन की सीधी बचत होती है। लंबी सुनवाई में लगने वाला वकील का खर्च और अदालती चक्करों का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पूरी तरह समाप्त हो जाता है।

पात्र मामलों में नियमनुसार न्यायालय शुल्क (कोर्ट फीस) वापसी का कानूनी लाभ भी पक्षकारों को प्रदान किया जाता है। यदि कोई मुकदमा कोर्ट में लंबित था और उसे लोक अदालत के माध्यम से निपटा लिया जाता है, तो जमा की गई फीस नियमानुसार वापस कर दी जाती है।

राष्ट्रीय लोक अदालत का फैसला दोनों पक्षों के लिए पूरी तरह से अंतिम और बाध्यकारी होता है। इस फैसले के खिलाफ किसी भी ऊपरी अदालत में अपील दाखिल नहीं की जा सकती, जिससे मुकदमों का स्थायी अंत हो जाता है और भविष्य की रंजिश खत्म होती है।

सचिव सीमा डुंगराकोटी ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय लोक अदालत केवल मुकदमों को बंद करने का एक औपचारिक तरीका मात्र नहीं है। यह मंच समाज में आपसी संवाद, समझौते की भावना और सामाजिक सौहार्द को व्यावहारिक रूप से बढ़ावा देने का सबसे प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है।

उन्होंने देहरादून जिले के आम नागरिकों से फिर से आग्रह किया है कि जिन भी मुकदमों में आपसी बातचीत से समाधान की थोड़ी सी भी संभावना दिखाई देती है, उन्हें बिना किसी हिचकिचाहट के राष्ट्रीय लोक अदालत में प्रस्तुत किया जाना चाहिए ताकि शीघ्र न्याय की प्राप्ति हो सके।

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Rajat Sharma

रजत शर्मा 'दून हॉराइज़न' में लीड बिज़नेस एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड्स, क्रिप्टोकरेंसी और सरकारी आर्थिक नीतियों को कवर करने में उनका लंबा और जमीनी अनुभव है। रजत की सबसे बड़ी खासियत जटिल आर्थिक आंकड़ों और मार्केट ट्रेंड्स को सरल, आम बोलचाल की हिंदी में डिकोड करना है। वे तथ्य-आधारित (Fact-based) और गहराई से रिसर्च की गई स्टोरीज लिखते हैं, ताकि आम निवेशक और व्यापारी सही वित्तीय फैसले ले सकें। रजत की पत्रकारिता हमेशा सत्य, निष्पक्षता और पाठकों के आर्थिक हितों को प्राथमिकता देते हुए आगे बढ़ती है।

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