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देहरादून नीट फर्जी दाखिला मामला, देहरादून पुलिस ने दबोचा मास्टरमाइंड

देहरादून पुलिस की एसआईटी ने फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी प्रमाण पत्र के जरिए एमबीबीएस दाखिला दिलाने वाले गिरोह के सदस्य धीरज श्रीवास्तव को गिरफ्तार कर 5.58 लाख कैश व कार बरामद की।

Published On: September 24, 2026 5:58 PM
Dehradun NEET Fake Admission Case

HIGHLIGHTS

  • भोपाल से संचालित 'एमबीबीएस वे' कंसल्टेंसी का संचालक धीरज श्रीवास्तव देहरादून में गिरफ्तार।
  • आरोपी के पास से 5.58 लाख कैश और टाटा नेक्सन कार जब्त की गई।
  • रायपुर और क्लेमेंटटाउन थानों में दर्ज मुकदमों की जांच के लिए गठित हुई थी एसआईटी।
  • उत्तराखंड 'अपनी सरकार' पोर्टल पर फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र लगाए गए थे।
  • मामले में कुल 13.58 लाख रुपये की नकदी अब तक बरामद हो चुकी है।

दून हॉराइज़न, देहरादून (24 सितंबर) : उत्तराखंड के सरकारी पोर्टल पर जाली स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र तैयार कराकर मेडिकल कॉलेजों में सीटें दिलवाने वाले अंतरराज्यीय रैकेट की कमर टूटती नजर आ रही है। इस गिरोह का जाल मध्य प्रदेश की राजधानी तक फैला हुआ था। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) ने भोपाल से सक्रिय शिक्षा कंसल्टेंट धीरज कुमार श्रीवास्तव को 5.58 लाख रुपये नकदी और एक टाटा नेक्सन कार के साथ दबोच लिया।

पूरे मामले की जड़ें 13 सितंबर को खुलीं, जब रायपुर और क्लेमेंटटाउन थानों में ‘अपनी सरकार’ पोर्टल पर जाली दस्तावेजों से प्रमाण पत्र बनवाने के संबंध में अलग-अलग एफआईआर (FIR) दर्ज की गईं। जांच में पाया गया कि आवेदकों द्वारा दिए गए पते पूरी तरह फर्जी थे। फर्जीवाड़े की गंभीरता को देखते हुए एसपी देहात जया बलोनी के नेतृत्व में गठित एसआईटी ने जब शिक्षण संस्थानों से रिकॉर्ड खंगाले, तो अभ्यर्थियों के मूल पते सामने आ गए।

पुलिस इससे पहले 21 सितंबर को गिरोह के दो मुख्य किरदारों—रूपेश पंडित और अरविंद कुमार—को गिरफ्तार कर चुकी थी। रूपेश के मेरठ स्थित आवास से 8 लाख रुपये की रिकवरी पहले ही की जा चुकी है।

भोपाल से चल रहा था दाखिले का धंधा

पकड़ा गया 37 वर्षीय धीरज श्रीवास्तव भोपाल के इंद्रपुरी में ‘एमबीबीएस वे’ (MBBS WAY) नाम से दफ्तर चलाता था। पूछताछ में सामने आया कि वह विभिन्न निजी विश्वविद्यालयों में इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट और मेडिकल जैसे पाठ्यक्रमों में कमीशन पर एडमिशन कराता था। रूपेश पंडित से उसकी जान-पहचान दो साल पहले उत्तरकाशी के हिताणु स्थित श्रीमती मंजरी देवी आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज में हुई थी। इसके बाद से दोनों लगातार संपर्क में थे।

तहसील और कचहरी की मिलीभगत से रची गई साजिश

जब अभियुक्त अरविंद ने अपनी बेटी और दो परिचितों के बच्चों के दाखिले के लिए रूपेश से संपर्क साधा, तब कम मेरिट होने के कारण उत्तराखंड के फ्रीडम फाइटर कोटे का सहारा लेने की योजना बनी। धीरज और रूपेश ने अपने स्थानीय संपर्कों, जिनकी तहसील व कचहरी में पैठ थी, के जरिए तीनों छात्रों के फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र बनवा दिए। इन्हीं फर्जी दस्तावेजों के दम पर छात्रों ने मेडिकल कॉलेजों में दाखिला हासिल भी कर लिया। अब एसआईटी इस बात की तहकीकात कर रही है कि तहसील स्तर पर किन कर्मचारियों या मध्यस्थों ने इन फर्जी प्रमाणपत्रों को जारी कराने में मदद की थी।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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