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Dharchula Bridge Collapse : धारचूला-तवाघाट हाईवे पर कुलागाड़ बेली ब्रिज टूटा, चीन सीमा से कटा भारत का संपर्क

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Harpreet Singh Updated Thu, 20 Aug 2026 02:55 PM IST

उत्तराखंड के धारचूला-तवाघाट नेशनल हाईवे पर कुलागाड़ के पास भारी भूस्खलन और बोल्डर गिरने से रणनीतिक बेली ब्रिज टूटकर उफनती नदी में समा गया है। इस हादसे से दारमा, व्यास और चौदास घाटियों समेत चीन सीमा से सड़क संपर्क पूरी तरह ठप हो गया है और ग्रामीण जान जोखिम में डालकर नदी पार कर रहे हैं।

Bailey Bridge Collapses on Dharchula-Tawaghat Highway, India Loses Road Link to China Border

मुख्य बातें

  • कुलागाड़ के पास बेली ब्रिज भारी मलबे से टूटा
  • दारमा, व्यास और चौदास घाटियों की आवाजाही पूरी तरह बंद
  • भारत का चीन सीमा से सड़क संपर्क टूटा
  • 2013 और 2024 के बाद तीसरी बार क्षतिग्रस्त हुआ पुल

दून हॉराइज़न, पिथौरागढ़ (20 अगस्त 2026): उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ में धारचूला-तवाघाट राष्ट्रीय राजमार्ग पर कुलागाड़ के पास पहाड़ी से गिरे मलबे और भारी बोल्डरों ने रणनीतिक रूप से अहम बेली ब्रिज को तोड़ दिया है। मंगलवार रात हुए इस भीषण भूस्खलन के कारण पुल का ढांचा मुड़कर सीधे उफनते नाले में गिर गया।

पुल के ध्वस्त होने से उच्च हिमालयी क्षेत्र की तीन प्रमुख घाटियों दारमा, व्यास और चौदास का संपर्क जिला व तहसील मुख्यालय से पूरी तरह कट गया है। भारत का चीन सीमा से जुड़ने वाला यह मुख्य जमीनी मार्ग बंद होने से सीमावर्ती इलाकों में आवाजाही पूरी तरह ठप पड़ गई है।

बुधवार सुबह करीब छह बजे सीमा सड़क संगठन (BRO) के गश्ती दल ने नियमित निरीक्षण के दौरान पुल के टूटने की पुष्टि की। आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार रात के अंधेरे में पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा भरभरा कर सीधे पुल पर आ गिरा था।

घटनास्थल पर हालात बेहद जोखिम भरे बन चुके हैं। दारमा, व्यास और चौदास घाटी के ग्रामीण, तीर्थयात्री और जरूरी काम से निकले लोग उफनती नदी के ऊपर लटके लोहे के टूटे गाडरों और पत्थरों पर चढ़कर आवाजाही कर रहे हैं। नदी का जलस्तर और बहाव अत्यधिक तेज है, जिससे एक छोटी सी चूक सीधे जानलेवा साबित हो सकती है।

राहत और बचाव के लिए मौके पर एसडीआरएफ, एसएसबी और भारतीय सेना के जवान तैनात हैं। सुरक्षा बल लोहे की सीढ़ियों और मजबूत रस्सियों के सहारे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को उफनते पानी के बीच से सुरक्षित निकालने का प्रयास कर रहे हैं।

धारचूला एसडीएम ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्पष्ट किया है कि पहले छोटे वाहनों की आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए युद्धस्तर पर वैकल्पिक कच्चा रास्ता तैयार किया जा रहा है। नए बेली ब्रिज के निर्माण का तकनीकी सर्वे और कार्य जल्द शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।

कुलागाड़ का यह इलाका लंबे समय से भूगर्भीय दृष्टि से संवेदनशील बना हुआ है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार इससे पहले वर्ष 2013 की आपदा और वर्ष 2024 में भी कुलागाड़ नाले के उफान और भूस्खलन की वजह से यह बेली ब्रिज बह चुका था। सामरिक दृष्टिकोण से संवेदनशील मार्ग होने के कारण बीआरओ की टीमें लगातार मलबा हटाने और संपर्क बहाल करने में जुटी हैं।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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