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उत्तराखंड में वक्फ संपत्तियों पर बढ़ेगा जिलाधिकारियों का दखल, धामी सरकार की बड़ी तैयारी

उत्तराखंड सरकार वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और विवादों के निपटारे के लिए केंद्र सरकार की मॉडल नियमावली अपनाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। शासन स्तर पर इसके अध्ययन के लिए जल्द ही एक विशेष समिति गठित की जाएगी और वक्फ बोर्ड से इस पर विस्तृत प्रस्ताव मांगा गया है।

उत्तराखंड में वक्फ संपत्तियों पर बढ़ेगा जिलाधिकारियों का दखल, धामी सरकार की बड़ी तैयारी

HIGHLIGHTS

  • वक्फ संपत्तियों के सर्वे, सत्यापन और कानूनी विवादों में जिलाधिकारियों (DM) की शक्ति बढ़ेगी।
  • केंद्र सरकार के वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2005 के तहत तैयार मॉडल नियमावली पर मंथन शुरू।
  • अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने वक्फ बोर्ड से संशोधनों और सुझावों पर मांगी औपचारिक संस्तुतियां।

देहरादून, 04 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। प्रदेश में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और उनसे जुड़े कानूनी विवादों को सुलझाने के लिए धामी सरकार अब केंद्र सरकार की ‘मॉडल नियमावली’ को लागू करने की योजना बना रही है। इस प्रक्रिया को गति देने के लिए शासन स्तर पर एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित की जा रही है, जो नियमावली के तकनीकी पहलुओं का बारीकी से अध्ययन करेगी।

केंद्र की मोदी सरकार द्वारा लिए गए निर्णयों और बनाए गए कानूनों को जमीन पर उतारने में उत्तराखंड हमेशा से अग्रणी रहा है। इसी कड़ी में राज्य सरकार पहले ही वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2005 को लागू कर चुकी है। अब इस अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए केंद्र द्वारा तैयार की गई मॉडल नियमावली को अपनाने पर विचार हो रहा है, जिससे वक्फ संपत्तियों के रख-रखाव में पारदर्शिता आने की उम्मीद है।

इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद प्रदेश की वक्फ संपत्तियों के सर्वे और उनके भौतिक सत्यापन में जिलाधिकारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाएगी। विवादित संपत्तियों के निपटारे और अतिक्रमण जैसे मामलों में यह नियमावली एक मार्गदर्शक के रूप में कार्य करेगी। सरकार के सामने फिलहाल दो विकल्प हैं—या तो केंद्र की नियमावली को बिना किसी बदलाव के स्वीकार किया जाए, या फिर राज्य की स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार उसमें आवश्यक संशोधन किए जाएं।

अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अपर सचिव गिरधारी सिंह रावत ने इस संबंध में स्पष्ट किया है कि शासन ने उत्तराखंड वक्फ बोर्ड से इस पूरी नियमावली पर एक विस्तृत प्रस्ताव तलब किया है। यदि वक्फ बोर्ड की ओर से कोई विशिष्ट सुझाव या संशोधन पेश किए जाते हैं, तो शासन उन पर गंभीरता से विचार करेगा। इसके बाद ही अंतिम नियमावली का स्वरूप तय कर उसे कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

जानकारों की मानें तो उत्तराखंड में वक्फ संपत्तियों पर अवैध कब्जों और उनके पंजीकरण को लेकर लंबे समय से शिकायतें आती रही हैं। नई नियमावली आने से न केवल रिकॉर्ड डिजिटल और व्यवस्थित होंगे, बल्कि संपत्तियों से होने वाली आय का हिसाब-किताब भी प्रशासन की सीधी निगरानी में रहेगा। शासन स्तर पर गठित होने वाली कमेटी केंद्र की नियमावली का राज्य के भौगोलिक और सामाजिक परिप्रेक्ष्य में विश्लेषण करेगी।


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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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