Tattoos Health Risk : आजकल टैटू बनवाना और बॉडी पियर्सिंग कराना युवाओं के बीच एक पॉपुलर ट्रेंड बन चुका है। अपनी पसंद और पर्सनालिटी को एक्सप्रेस करने का यह तरीका जितना देखने में आकर्षक लगता है, सेहत के लिहाज से उतनी ही सावधानी की मांग भी करता है।
अगर टैटू बनवाते समय थोड़ी सी भी लापरवाही हो जाए, तो यह आपके लिवर के लिए गंभीर समस्या खड़ी कर सकता है।
दरअसल, टैटू या पियर्सिंग के दौरान इस्तेमाल होने वाली सुई अगर संक्रमित है, तो इससे हेपेटाइटिस B और हेपेटाइटिस C का वायरस सीधे खून में प्रवेश कर सकता है।
यह वायरस लिवर पर हमला करता है और धीरे-धीरे उसे नुकसान पहुंचाता है।
बिना लक्षण के बढ़ता है खतरा
हेपेटाइटिस की सबसे खतरनाक बात यह है कि इसके शुरुआती संकेत तुरंत दिखाई नहीं देते। कई बार मरीज को वर्षों तक पता ही नहीं चलता कि उसका लिवर इंफेक्शन से प्रभावित हो रहा है।
लंबे समय तक इलाज न मिलने पर यह स्थिति लिवर सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारी का रूप ले सकती है।
इसलिए, किसी भी तरह का बॉडी आर्ट कराने से पहले स्टूडियो और आर्टिस्ट की चुनाव में समझदारी दिखाना बेहद जरूरी है।
टैटू बनवाते समय जरूर चेक करें ये 4 बातें
अगर आप टैटू या पियर्सिंग कराने जा रहे हैं, तो इन बेसिक हाइजीन रूल्स का ध्यान रखकर जोखिम को काफी हद तक कम कर सकते हैं:
प्रमाणित और साफ स्टूडियो चुनें: हमेशा लाइसेंस प्राप्त और अनुभवी स्टूडियो से ही टैटू बनवाएं। घर पर या किसी अस्थायी जगह पर टैटू बनवाने से पूरी तरह बचें।
नई और सीलबंद सुई: आर्टिस्ट आपके सामने ही नई सुई (Sterilized Needle) का पैकेट खोले। इस बात की पुष्टि करने में बिल्कुल न झिझकें।
इंक कप का सही इस्तेमाल: टैटू की स्याही छोटी सी सिंगल-यूज डिस्पोजेबल कटोरी (इंक कप) में निकाली जानी चाहिए। अगर आर्टिस्ट बार-बार मुख्य बोतल में सुई डुबो रहा है, तो इससे पूरी बोतल संक्रमित हो सकती है।
हाथों की सफाई और ग्लव्स: आर्टिस्ट ने काम शुरू करने से पहले हाथ धोए हों और नए डिस्पोजेबल ग्लव्स पहने हों।
अगर पहले से बनवा चुके हैं टैटू तो क्या करें?
यदि आपने हाल ही में या पहले कभी टैटू या पियर्सिंग कराई है और आपको इस्तेमाल किए गए उपकरणों की शुद्धता पर संदेह है, तो घबराने की जरूरत नहीं है।
आप अपने डॉक्टर की सलाह से एक सामान्य हेपेटाइटिस ब्लड टेस्ट करवा सकते हैं। इससे किसी भी इंफेक्शन का समय रहते पता चल जाता है।
इसके अलावा, हेपेटाइटिस B से बचाव के लिए असरदार वैक्सीन उपलब्ध है, जबकि हेपेटाइटिस C का सही समय पर पता चलने पर इलाज संभव है।















