जम्मू। केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में हर घर तक नल से जल पहुंचाने का संकल्प अब धरातल पर दिखने लगा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश की प्यास बुझाने के लिए कुल 3253 जलापूर्ति योजनाओं पर युद्धस्तर पर काम जारी है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इनमें से 1469 परियोजनाओं को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है, जबकि बाकी बची योजनाएं प्रगति के अलग-अलग चरणों में हैं।
पिछले पांच सालों का हिसाब देखें तो जल जीवन मिशन के तहत प्रदेश में अब तक 7094.05 करोड़ रुपये का निवेश किया जा चुका है, जो विकास की नई इबारत लिख रहा है।
यह महत्वपूर्ण खुलासा जम्मू उत्तर के विधायक शाम लाल शर्मा द्वारा पूछे गए एक सवाल के लिखित जवाब में हुआ है। सरकार ने सदन को बताया कि जम्मू संभाग में कुल 1861 जलापूर्ति योजनाएं स्वीकृत हैं। इनमें से 637 का काम शत-प्रतिशत पूरा हो चुका है। बाकी योजनाओं की स्थिति देखें तो 14 स्कीमों पर 25 प्रतिशत, 71 पर 50 प्रतिशत, 528 पर 75 प्रतिशत और 611 योजनाओं पर 75 से 99 प्रतिशत तक काम निपटा लिया गया है। क्या आपको नहीं लगता कि पाइपलाइनों का यह जाल आने वाले समय में पहाड़ों की तकदीर बदल देगा?

कश्मीर संभाग में योजनाओं की रफ्तार
वहीं अगर कश्मीर संभाग की बात करें तो यहां कुल 1392 जलापूर्ति योजनाएं पाइपलाइन में हैं। घाटी में काम की रफ्तार काफी अच्छी है और अब तक 832 योजनाओं को पूरा किया जा चुका है। आंकड़ों के फेरबदल को समझें तो 10 योजनाओं पर 25 फीसदी और 32 पर लगभग आधा काम हो चुका है। इसके अलावा 141 योजनाओं पर 75 फीसदी और 377 प्रोजेक्ट्स ऐसे हैं जो 99 प्रतिशत तक पूरे हो चुके हैं। सरकार का दावा है कि बहुत जल्द इन इलाकों के हर घर में नल से पानी टपकने लगेगा।
जम्मू उत्तर विधानसभा का रिपोर्ट कार्ड

विधायक शाम लाल शर्मा के अपने क्षेत्र जम्मू उत्तर की बात करें तो यहां जल जीवन मिशन और नाबार्ड के तहत 9 बड़ी योजनाएं मंजूर हैं। इनमें से 8 पर फिलहाल काम चल रहा है और एक पूरी हो चुकी है। पीएचई रूरल डिवीजन के तहत पुरखू मिश्रीवाला स्कीम का 80 प्रतिशत काम पूरा है, जिसकी लागत 505.15 लाख रुपये है।
इसी तरह डक्कू चक पुन: संयोजन योजना पर 1407.60 करोड़ रुपये खर्च होने हैं, जिसका 60 फीसदी काम हो गया है। खैरी रायपुर में हालांकि अभी 30 प्रतिशत काम ही हुआ है, पर नारदनी स्कीम 75 प्रतिशत तैयार है।
अखनूर और भलवाल में पानी का संकट होगा दूर
पीएचई डिवीजन अखनूर के तहत आने वाली असरवां पुन:संयोजन स्कीम ने बाजी मार ली है और इसका 100 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। इस पर सरकार ने 132.23 लाख रुपये लगाए हैं। वहीं काला काम योजना का 60 फीसदी और भलवाल-ए व बी स्कीम का 55 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। नाबार्ड के सहयोग से चल रही कोट स्कीम 75 फीसदी और करवंडा स्कीम 90 फीसदी तक मुकम्मल है। कैपेक्स बजट से चल रही पुरखू स्कीम भी 60 प्रतिशत की दहलीज पार कर चुकी है। क्या इन योजनाओं से वाकई ग्राउंड लेवल पर बदलाव आएगा?
दिसंबर 2028 तक का मिला समय
बजट और समय सीमा की बात करें तो केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन की डेडलाइन को बढ़ाकर अब दिसंबर 2028 कर दिया है। यूटी प्रशासन का कहना है कि वह इस बढ़ी हुई अवधि के भीतर बाकी बची सभी योजनाओं को पूरा करने की पूरी कोशिश करेगी। पिछले पांच वर्षों के वित्तीय आंकड़े गवाह हैं कि 2023-24 में सबसे ज्यादा 3875.47 करोड़ रुपये खर्च किए गए। कुल खर्च हुए 7094 करोड़ रुपये में से 3109.41 करोड़ रुपये तो सिर्फ पाइपों की खरीद पर व्यय हुए हैं, ताकि गुणवत्ता में कोई कमी ना रहे।













