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उपनल कर्मियों के लिए ‘समान वेतन’ बना जी का जंजाल, नई शर्तों ने बढ़ाई धामी सरकार की मुश्किलें

उत्तराखंड की धामी सरकार द्वारा उपनल कर्मचारियों के लिए जारी नया अनुबंध प्रारूप विवादों के केंद्र में आ गया है, जिसमें 'समान कार्य-समान वेतन' के बदले नियमितीकरण की मांग छोड़ने जैसी शर्तें शामिल हैं। नाराज कर्मचारी संगठन ने इसे न्यायालय के आदेशों की अवहेलना बताते हुए प्रदेशव्यापी आंदोलन और कानूनी लड़ाई की चेतावनी दी है।

उपनल कर्मियों के लिए 'समान वेतन' बना जी का जंजाल, नई शर्तों ने बढ़ाई धामी सरकार की मुश्किलें

HIGHLIGHTS

  • नए एग्रीमेंट में कर्मचारियों से भविष्य में नियमितीकरण की मांग न करने का शपथ पत्र मांगा गया है।
  • उपनल संगठन का आरोप है कि शासन स्तर पर सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के 8 साल पुराने आदेशों को दबाया जा रहा है।
  • कांग्रेस ने इस मामले को 'विश्वासघात' करार दिया, जबकि सरकार ने संवाद के जरिए समाधान का भरोसा दिलाया है।

देहरादून, 07 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड में लगभग 25 हजार उपनल कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने की कवायद एक नए और गहरे विवाद में फंस गई है। धामी कैबिनेट द्वारा ‘समान कार्य के लिए समान वेतन’ देने के ऐतिहासिक फैसले के ठीक एक महीने बाद, शासन द्वारा जारी किए गए नए अनुबंध (Agreement) प्रारूप ने खुशियों को आक्रोश में बदल दिया है। कर्मचारी इसे सरकार की ‘चाल’ बता रहे हैं, जिसमें लाभ देने की आड़ में उनके बुनियादी अधिकारों पर चोट की गई है।

सरकार की ओर से प्रस्तावित नए अनुबंध में कुछ ऐसी शर्तें शामिल की गई हैं, जिन्होंने कर्मचारियों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। सबसे विवादास्पद शर्त यह है कि समान वेतन का लाभ लेने वाले कर्मचारी को यह लिखित हलफनामा देना होगा कि वह भविष्य में कभी भी नियमितीकरण (Regularization) का दावा नहीं करेगा।

इसके अलावा, एग्रीमेंट के ड्राफ्ट में मेडिकल सुविधा, बोनस और सामाजिक सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण लाभों पर चुप्पी साध ली गई है। कर्मचारियों का आरोप है कि यह अनुबंध उन्हें स्थायी तौर पर ‘अस्थायी’ बनाए रखने की एक सोची-समझी साजिश है।

मामले की जड़ें साल 2018 के नैनीताल हाईकोर्ट के उस आदेश में हैं, जिसमें अदालत ने सरकार को दो टूक निर्देश दिए थे कि उपनल कर्मियों के नियमितीकरण की नियमावली बनाई जाए और तब तक उन्हें समान वेतन दिया जाए। राज्य सरकार इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गई थी, लेकिन वहां भी उसकी याचिका खारिज हो गई। अब जब कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल की समिति की सिफारिश पर वेतन बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ, तो अनुबंध की शर्तों ने फिर से पेंच फंसा दिया है।

उत्तराखंड विद्युत संविदा कर्मचारी संगठन के प्रदेश अध्यक्ष विनोद कवि ने 2 अप्रैल 2026 को जारी शासनादेश पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने सीधे तौर पर अधिकारियों को निशाने पर लेते हुए कहा कि कुछ ब्यूरोक्रेट्स जानबूझकर न्यायालय की भावना के विपरीत काम कर रहे हैं। कवि के अनुसार, यह अनुबंध श्रम कानूनों, ईएसआई और ईपीएफ अधिनियम का स्पष्ट उल्लंघन है। संगठन का कहना है कि यह शर्तें उन्हें ‘बंधुआ मजदूरी’ की स्थिति में धकेल रही हैं और वे इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे।

राजनीतिक गलियारों में भी इस मुद्दे पर तपिश बढ़ गई है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि बीजेपी शुरुआत से ही उपनल कर्मियों के साथ छल कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सर्वोच्च न्यायालय का आदेश स्पष्ट है, तो सरकार शर्तों की आड़ में कर्मचारियों को क्यों डरा रही है।

दूसरी ओर, सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने डैमेज कंट्रोल की कोशिश करते हुए कहा कि सरकार बातचीत के लिए तैयार है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अगर अनुबंध में कोई विसंगति है, तो उसे संवाद के जरिए दूर किया जाएगा।

उपनल कर्मचारियों की मुख्य मांग अब ‘विनियमितीकरण नियमावली-2025’ के तहत उन कर्मियों को स्थायी करने की है, जो 10 साल की सेवा पूरी कर चुके हैं। इस बीच, हाईकोर्ट ने भी एक ताजा हस्तक्षेप करते हुए नियमितीकरण के मुद्दे पर सरकार से जवाब तलब किया है। यदि सरकार अपने रुख में नरमी नहीं लाती, तो 25 हजार कर्मचारियों का यह असंतोष उत्तराखंड की सड़कों पर एक बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।


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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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