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ढाका में सत्ता परिवर्तन के बाद पहली बड़ी कूटनीतिक पहल, भारत आएंगे विदेश मंत्री खलीलुर रहमान

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Ansh Goyal Updated Fri, 20 Mar 2026 02:12 PM IST

बांग्लादेश में तारिक रहमान सरकार के गठन के बाद दोनों देशों के बीच रिश्तों को सामान्य करने की पहली बड़ी कोशिश शुरू हो गई है। विदेश मंत्री खलीलुर रहमान 8 अप्रैल को मॉरीशस जाते समय नई दिल्ली में रुकेंगे, जहाँ भारतीय नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा संभव है।

ढाका में सत्ता परिवर्तन के बाद पहली बड़ी कूटनीतिक पहल, भारत आएंगे विदेश मंत्री खलीलुर रहमान

मुख्य बातें

  • तनावपूर्ण संबंधों के बीच 8 अप्रैल को नई दिल्ली में संक्षिप्त प्रवास करेंगे बांग्लादेशी विदेश मंत्री।
  • प्रधानमंत्री तारिक रहमान फिलहाल भारत या चीन के बजाय भूटान या मालदीव की यात्रा कर सकते हैं।
  • भारतीय उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने हाल ही में ढाका में विदेश मंत्री से मिलकर एस. जयशंकर का निमंत्रण सौंपा था।

नई दिल्ली। बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल और 18 महीने की अंतरिम सरकार के शासन के बाद अब ढाका और नई दिल्ली के बीच कूटनीतिक रिश्तों में नई गर्माहट महसूस की जा रही है। बांग्लादेश के नवनियुक्त विदेश मंत्री खलीलुर रहमान अगले महीने भारत की संक्षिप्त यात्रा पर आ सकते हैं। प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व वाली नई सरकार की ओर से भारत के साथ उच्च स्तरीय संवाद की यह पहली औपचारिक शुरुआत होगी।

सूत्रों के अनुसार, विदेश मंत्री खलीलुर रहमान 8 अप्रैल को मॉरीशस में आयोजित होने वाले ‘हिंद महासागर सम्मेलन’ में शामिल होने जा रहे हैं। इसी यात्रा के दौरान वे नई दिल्ली में एक ‘स्टॉपओवर’ करेंगे। माना जा रहा है कि इस संक्षिप्त प्रवास के दौरान उनकी भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ महत्वपूर्ण मुलाकात हो सकती है।

हाल ही में ढाका में भारतीय उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने खलीलुर रहमान से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने भारत की ओर से द्विपक्षीय संबंधों को फिर से मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई और उन्हें जल्द भारत आने का औपचारिक निमंत्रण भी दिया। गौरतलब है कि खलीलुर रहमान इससे पहले यूनुस सरकार में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की भूमिका निभा चुके हैं, जिससे वे दोनों सरकारों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में उभरे हैं।

बांग्लादेश की नई विदेश नीति में एक बड़ा बदलाव भी देखने को मिल रहा है। प्रधानमंत्री तारिक रहमान अपनी पहली आधिकारिक विदेश यात्रा के लिए भारत या चीन जैसे क्षेत्रीय दिग्गजों के बजाय भूटान या मालदीव को चुन सकते हैं। जानकारों का कहना है कि बांग्लादेश की नई सरकार यह संदेश देना चाहती है कि उसकी विदेश नीति किसी एक क्षेत्रीय शक्ति की ओर झुकी हुई नहीं होगी, बल्कि वह सभी पड़ोसियों के साथ समान सम्मान के आधार पर संबंध बनाना चाहती है।

भारत और बांग्लादेश के बीच पिछले 18 महीनों में सीमा विवाद, तीस्ता जल बंटवारे और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर काफी तनाव देखा गया था। हालांकि, तारिक रहमान ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे एक पत्र में ‘विकसित भारत 2047’ का जिक्र करते हुए आर्थिक और तकनीकी सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई है। खलीलुर रहमान की यह दिल्ली यात्रा इसी विश्वास बहाली की दिशा में पहला ठोस कदम मानी जा रही है।

Ansh Goyal

अंश गोयल 'दून हॉराइज़न' में अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ (International Desk) की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। वैश्विक राजनीति, युद्ध के हालात, कूटनीति (Diplomacy) और ग्लोबल इकॉनमी पर उनकी गहरी पकड़ है। अंश का मुख्य फोकस अमेरिका, रूस, मध्य पूर्व और पड़ोसी देशों की हलचल का भारतीय दृष्टिकोण से सटीक विश्लेषण करना है। विदेशी मंचों पर भारत के बढ़ते दबदबे और वैश्विक नीतियों का आम आदमी पर पड़ने वाले प्रभाव को वे बेहद सरल हिंदी में समझाते हैं। उनकी डीप-रिसर्च वाली रिपोर्टिंग पाठकों को दुनिया भर की विश्वसनीय खबरें प्रदान करती है।

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