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Gold Price Festive Outlook : फेस्टिव सीजन में सोना सस्ता होगा या महंगा? खरीदारी से पहले समझें बाजार का गणित

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Parul Sharma Updated Fri, 02 Oct 2026 10:04 AM IST

त्योहारों और शादियों के सीजन से पहले सोने-चांदी के दामों में हलचल तेज हो गई है। घरेलू मांग और ग्लोबल बाजार के मिले-जुले असर के बीच बजट फ्रेंडली खरीदारी के नए तरीके सामने आ रहे हैं।

Gold Price Festive Outlook

मुख्य बातें

  • घरेलू वायदा बाजार में दिसंबर गोल्ड 0.51% और सिल्वर 0.40% मजबूत हुआ।
  • त्योहारों और शादियों के दौरान रिटेल डिमांड में 15 से 20 प्रतिशत बढ़त का अनुमान।
  • ऊंचे भावों के चलते ग्राहकों का रुझान लाइटवेट और मॉडर्न डिजाइन वाले गहनों की तरफ बढ़ा।
  • डॉलर इंडेक्स और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़त से बुलियन पर दबाव बरकरार।
  • शादियों में प्रति परिवार औसत खरीदारी 1.5 लाख से 3 लाख रुपये के बीच सिमटी।

Gold Price Festive Outlook : फेस्टिव सीजन की शुरुआत के साथ ही भारतीय बुलियन मार्केट (Bullion Market) में हलचल तेज हो गई है। घरेलू सर्राफा बाजार में अक्टूबर की शुरुआत मजबूती के साथ हुई, जहां घरेलू स्तर पर त्योहारों व शादियों की मांग और वैश्विक स्तर पर अमेरिकी ब्याज दरों के अनुमानों ने कीमतों को रफ्तार दी है।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर दिसंबर एक्सपायरी का सोना 0.51% की बढ़त के साथ हरे निशान में दिखा, जबकि चांदी के वायदा सौदों में भी 0.40% की मजबूती दर्ज की गई।

क्यों हो रहा है कीमतों में उतार-चढ़ाव?

सोने के भाव सिर्फ घरेलू मांग पर तय नहीं होते। अंतरराष्ट्रीय बाजार की गतिविधियां इसमें बड़ा रोल निभाती हैं। मजबूत अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में मजबूती के चलते कीमतों पर समय-समय पर दबाव भी बनता है।

वेंचुरा के कमोडिटी प्रमुख एनएस रामास्वामी के मुताबिक, आने वाले समय में अमेरिकी केंद्रीय बैंक के ब्याज दरों से जुड़े फैसले और वैश्विक आर्थिक आंकड़े सोने की दिशा तय करेंगे। हालांकि, दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की लगातार खरीदारी और गोल्ड ईटीएफ में निवेशकों की रुचि से इसे एक मजबूत आधार भी मिल रहा है।

त्योहारों में कैसी रहेगी खरीदारी?

कीमतें भले ही ऊंचाई पर हों, लेकिन त्योहारों के दौरान पारंपरिक और सांस्कृतिक महत्व के कारण भारतीय परिवारों में खरीदारी की रफ्तार धीमी नहीं पड़ती।

कामा ज्वैलरी के एमडी कॉलिन शाह का मानना है कि धनतेरस और दिवाली पर मांग में 15 से 20 फीसदी तक की तेजी आ सकती है। शादी-ब्याह के लिए होने वाली खरीदारी में लोग औसतन 1.5 लाख से 3 लाख रुपये तक का बजट लेकर चल रहे हैं।

ग्राहकों की पसंद में आया बड़ा बदलाव

बढ़ती कीमतों को देखते हुए आम खरीदार अब स्मार्ट तरीके अपना रहे हैं:

हल्की और मॉडर्न ज्वैलरी: भारी-भरकम गहनों की जगह अब लाइटवेट और रोजमर्रा में पहनने लायक डिजाइन्स की मांग बढ़ रही है, ताकि बजट संतुलित रहे।

गोल्ड एक्सचेंज: घर में रखे पुराने सोने के बदले नए जेवर बनवाने का चलन काफी लोकप्रिय हो रहा है। इससे बिना अतिरिक्त नकदी खर्च किए नए डिजाइन मिल जाते हैं।

सिक्के और बार: कई लोग मेकिंग चार्ज से बचने के लिए त्योहारों पर सिर्फ सोने के सिक्के लेना पसंद कर रहे हैं।

चांदी में क्या बन रही है रणनीति?

चांदी की कीमतों में सोने के मुकाबले ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। रिद्धि-सिद्धि बुलियन के एमडी और आईबीजेए के प्रेसिडेंट पृथ्वीराज कोठारी बताते हैं कि चांदी की मांग निवेश के साथ-साथ उद्योगों से भी जुड़ी होती है, इसलिए इसमें हलचल थोड़ी तेज रहती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि रुपये की स्थिति और वैश्विक रुझानों के कारण घरेलू बाजार में कीमती धातुओं के दाम मजबूत बने रह सकते हैं।

खरीदारों के लिए आसान सलाह

त्योहारी सीजन में खरीदारी करते समय केवल भाव देखकर जल्दबाजी न करें। हॉलमार्किंग (BIS Hallmark) जरूर जांचें और मेकिंग चार्ज की तुलना कई दुकानों से कर लें। अगर गहने केवल निवेश के नजरिए से ले रहे हैं, तो डिजिटल गोल्ड, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड या गोल्ड ईटीएफ जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है।

Parul Sharma

पारुल शर्मा 'दून हॉराइज़न' के बिज़नेस सेक्शन की एक अनुभवी आर्थिक एवं व्यापार संवाददाता हैं। राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था, बैंकिंग सेक्टर और पर्सनल फाइनेंस उनकी मुख्य बीट (Beat) है। पारुल को मार्केट के उतार-चढ़ाव और कंज्यूमर ट्रेंड्स का सटीक विश्लेषण करने में खास महारत हासिल है। वह अपनी रिपोर्टिंग में हमेशा प्रामाणिक सरकारी आंकड़ों और विश्वसनीय स्रोतों का ही इस्तेमाल करती हैं। पारुल का मुख्य उद्देश्य बजट, टैक्स नियमों और निवेश से जुड़ी अहम खबरों को बिना किसी लाग-लपेट के सीधे पाठकों तक पहुंचाना है, जिससे आम आदमी का वित्तीय ज्ञान और अधिक मजबूत हो सके।

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