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‘जल्द आऊंगा’ कहकर गए थे बीरेश्वर, शहादत की खबर से अल्मोड़ा में पसरा मातम

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Harpreet Singh Updated Mon, 08 Jun 2026 04:09 PM IST

जम्मू-कश्मीर के राजौरी में चल रहे आतंकवाद विरोधी 'ऑपरेशन शेरूवाली' के दौरान अल्मोड़ा के लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी शहीद हो गए हैं। आज यानी 8 जून को ही उनकी पदोन्नति कैप्टन के रूप में होनी थी, लेकिन महज 48 घंटे पहले उन्होंने देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दे दिया।

'जल्द आऊंगा' कहकर गए थे बीरेश्वर, शहादत की खबर से अल्मोड़ा में पसरा मातम

मुख्य बातें

  • राजौरी में 'ऑपरेशन शेरूवाली' के दौरान अल्मोड़ा के 25 वर्षीय लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी शहीद।
  • 8 जून को पूरी हो रही थी 2 साल की सर्विस, आज ही सजने थे कैप्टन के सितारे।
  • हमीरपुर में थी तैनाती, 4 दिन पहले ही राजौरी ऑपरेशन का हिस्सा बने थे बीरेश्वर।
  • शहीद के आवास पर अंतिम दर्शन के लिए उमड़ी भीड़, सैनिक कल्याण मंत्री ने जताया शोक।

अल्मोड़ा, 8 जून (दून हॉराइज़न)। जम्मू-कश्मीर के राजौरी में चल रहे आतंकवाद विरोधी ‘ऑपरेशन शेरूवाली’ में उत्तराखंड ने अपना एक और वीर सपूत खो दिया है। अल्मोड़ा जिले के रहने वाले 25 वर्षीय लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी आतंकियों से लोहा लेते हुए शहीद हो गए हैं।

बीरेश्वर की शहादत से उनका परिवार और पूरा अल्मोड़ा शोक में डूबा है। यह सैन्य क्षति इसलिए भी बेहद मार्मिक है क्योंकि आज यानी 8 जून को ही बीरेश्वर को सेना में प्रमोट होकर ‘कैप्टन’ बनना था। उनकी वर्दी पर सजने वाले नए सितारे और प्रतीक चिह्न हेडक्वार्टर से यूनिट तक पहुंच चुके थे, लेकिन अपनी ऐतिहासिक पदोन्नति से महज 48 घंटे पहले उन्होंने राष्ट्ररक्षा में सर्वोच्च बलिदान दे दिया।

सैन्य जानकारी के अनुसार, लेफ्टिनेंट बीरेश्वर मूल रूप से 5 असम रेजिमेंट का हिस्सा थे और वर्तमान में उनकी तैनाती हमीरपुर में थी। महज चार दिन पहले ही उन्हें राजौरी में चल रहे ‘ऑपरेशन शेरूवाली’ के लिए भेजा गया था।

यूनिट में चल रही थी जश्न की तैयारी

जिला सैनिक कल्याण अधिकारियों के अनुसार, सैन्य अकादमी से पासआउट होने के बाद अधिकारियों को पहली रैंक लेफ्टिनेंट की मिलती है। बिना किसी आंतरिक परीक्षा के, दो वर्ष की सफल सेवा पूरी होने पर टाइम-स्केल प्रमोशन के तहत अधिकारी सीधे कैप्टन बन जाते हैं।

बीरेश्वर आज 8 जून 2026 को सेना में बतौर अधिकारी अपने दो साल पूरे कर रहे थे। उनका ट्रैक रिकॉर्ड शानदार था। उनकी बटालियन में इस दिन को लेकर उल्लास था और साथी अधिकारी जश्न की तैयारियों में जुटे थे।

मां-बाप और दादी का रो-रोकर बुरा हाल

शहीद बीरेश्वर मूल रूप से द्वाराहाट के बग्वालीपोखर बाड़ी के रहने वाले थे। उनका परिवार वर्तमान में अथरबनी पाण्डेखोला में रहता है। बेटे के सर्वोच्च बलिदान की खबर मिलने के बाद से ही घर में मातम है।

प्राथमिक विद्यालय वलसा में प्रधानाध्यापिका के पद पर कार्यरत उनकी मां सरस्वती गोस्वामी बेसुध हैं। वह बार-बार बस यही दोहरा रही हैं कि बेटा जल्द वापस आने का वादा करके गया था। भनोली तहसील में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी के पद पर तैनात पिता प्रमोद नाथ गोस्वामी, बड़े भाई अमित और 83 वर्षीय दादी नंदी देवी गहरे सदमे में हैं। शहीद को अंतिम विदाई देने के लिए उनके आवास पर लोगों की भारी भीड़ जुटी है।

2024 में बने थे सैन्य अधिकारी

बीरेश्वर गोस्वामी जनवरी 2023 में सेना में भर्ती हुए थे। इसके बाद जून 2024 में उन्होंने अपना कमीशन पास किया और मात्र 23 वर्ष की उम्र में सैन्य अधिकारी (लेफ्टिनेंट) बने।

सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने युवा अफसर की शहादत पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि राष्ट्र के प्रति लेफ्टिनेंट गोस्वामी का साहस और उनका बलिदान हर देशवासी के हृदय में सदैव अमर रहेगा।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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