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Haj Yatra 2026 : अंतरराष्ट्रीय तनाव के चलते बढ़ा हवाई किराया, उत्तराखंड के जायरीनों को देने होंगे 10 हजार रुपये अतिरिक्त

ईरान-इजराइल संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विमान ईंधन (ATF) की कीमतों में उछाल आने से हज यात्रा महंगी हो गई है। उत्तराखंड के 1348 जायरीनों समेत देश भर के यात्रियों को अब 10,000 रुपये की अतिरिक्त राशि जमा करनी होगी।

Haj Yatra 2026 : अंतरराष्ट्रीय तनाव के चलते बढ़ा हवाई किराया, उत्तराखंड के जायरीनों को देने होंगे 10 हजार रुपये अतिरिक्त

HIGHLIGHTS

  • हवाई किराए में 10 हजार रुपये की बढ़ोतरी, 15 मई तक भुगतान अनिवार्य।
  • उत्तराखंड के सर्वाधिक 471 यात्री देहरादून से शामिल।
  • ईरान-अमेरिका तनाव के बीच तेल की वैश्विक कीमतों में अस्थिरता प्रमुख कारण।

देहरादून, 30 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। ईरान और इजराइल के बीच जारी सैन्य संघर्ष का सीधा असर अब उत्तराखंड के हज यात्रियों (Haj Yatra 2026) की जेब पर पड़ने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में विमान ईंधन (एटीएफ) की कीमतों में हुई अचानक वृद्धि के कारण हज कमेटी ऑफ इंडिया ने हवाई किराए में बढ़ोतरी का फैसला लिया है। इसके तहत, यात्रा पर जाने वाले प्रत्येक जायरीन को अब 10,000 रुपये की अतिरिक्त राशि जमा करनी होगी।

देहरादून, उत्तराखंड हज अधिशासी अधिकारी मोहम्मद आरिफ खान ने बुधवार को इस संबंध में आधिकारिक निर्देश जारी कर दिए हैं। उत्तराखंड से इस वर्ष कुल 1348 जायरीन पवित्र हज यात्रा पर जा रहे हैं। इसमें सबसे बड़ी संख्या राजधानी देहरादून की है, जहां से 471 यात्री रवाना होंगे। हालांकि यात्रा की उड़ानें 18 अप्रैल से ही शुरू हो चुकी हैं, लेकिन बीच सफर में बढ़े किराए ने यात्रियों के बजट को प्रभावित किया है।

भुगतान की समयसीमा और प्रक्रिया

हज कमेटी ने स्पष्ट किया है कि बढ़ी हुई राशि को जमा करने के लिए 15 मई 2026 तक का समय दिया गया है। जायरीन इस राशि का भुगतान स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), यूनियन बैंक या ‘हज सुविधा ऐप’ के जरिए ऑनलाइन कर सकते हैं। बैंक के माध्यम से ऑफलाइन पैसा जमा करते समय यात्रियों को अपना विशिष्ट बैंक रेफरेंस नंबर अंकित करना अनिवार्य होगा ताकि उनके खाते का मिलान सही ढंग से हो सके।

वैश्विक संघर्ष की बढ़ती आर्थिक लागत

ईरान के साथ जारी तनाव का असर केवल यात्रा टिकटों तक सीमित नहीं है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) के मुख्य वित्तीय अधिकारी ने प्रतिनिधि सभा की सशस्त्र सेवा समिति के समक्ष खुलासा किया है कि इस युद्ध पर अब तक अनुमानित 25 अरब डॉलर की भारी-भरकम लागत आ चुकी है।

पेंटागन के कार्यवाहक अवर सचिव जूल्स हर्स्ट तृतीय ने बताया कि इस खर्च का बड़ा हिस्सा हथियारों, गोला-बारूद और सैन्य अभियानों के संचालन पर व्यय हुआ है। इसी सैन्य अस्थिरता ने वैश्विक सप्लाई चेन और ईंधन कीमतों को अस्थिर कर दिया है, जिसका खामियाजा अब आम नागरिकों और यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है।

क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पर संकट

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने भी इस युद्ध पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ऊर्जा कीमतों में तेज वृद्धि ने उनके देश की आर्थिक प्रगति को बाधित किया है। शरीफ ने कैबिनेट ब्रीफिंग के दौरान कहा कि पेट्रोलियम कीमतों में उछाल से चुनौतियां बढ़ी हैं। उन्होंने संकेत दिया कि पाकिस्तान, अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता कर तनाव कम करने के प्रयास कर रहा है ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था को राहत मिल सके।


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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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