home ताज़ा समाचार देश विदेश क्राइम मनोरंजन बिजनेस ऑटो गैजेट्स खेल हेल्थ लाइफस्टाइल धर्म राशिफल लव राशिफल अंक राशिफल पंचांग करियर ट्रेंडिंग वीडियो

Haridwar Veg Biryani Controversy : हरिद्वार में ‘वेज बिरयानी’ पर विवाद, संतों ने ठेले-दुकानों पर चिपकाए ‘वेज पुलाव’ के स्टिकर

हरिद्वार में अखंड परशुराम अखाड़े ने 'वेज बिरयानी', 'कबाब' और 'चाप' जैसे शब्दों को मांसाहारी बताते हुए इनका नाम बदलने की मुहिम शुरू कर दी है। संतों ने ठेलों पर 'वेज बिरयानी' के पोस्टर पर 'वेज पुलाव' के स्टिकर लगाने के साथ ही ऑनलाइन फूड डिलीवरी ऐप्स पर भी पाबंदी की मांग उठाई है।

Haridwar Veg Biryani Controversy : हरिद्वार में 'वेज बिरयानी' पर विवाद, संतों ने ठेले-दुकानों पर चिपकाए 'वेज पुलाव' के स्टिकर

HIGHLIGHTS

  • अखंड परशुराम अखाड़े ने 'वेज बिरयानी' को 'वेज पुलाव' कहने की मांग की।
  • शहर में ठेलों और पोस्टरों पर चिपकाए जा रहे हैं नए नाम के स्टिकर।
  • होटलों के मेन्यू से 'कबाब' और 'चाप' शब्द हटाने के लिए नगर आयुक्त को पत्र।
  • प्रतिबंधित क्षेत्रों में ऑनलाइन फूड ऐप्स के जरिए नॉनवेज सप्लाई का गंभीर आरोप।

हरिद्वार, 9 जून 2026 (दून हॉराइज़न)। धर्मनगरी हरिद्वार में अब खाने के नामों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। यहां के संतों ने ‘वेज बिरयानी’, ‘कबाब’ और ‘चाप’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर कड़ी आपत्ति जताते हुए एक जमीनी अभियान शुरू कर दिया है। संतों का तर्क है कि ये शब्द मूल रूप से मांसाहारी व्यंजनों से जुड़े हैं, जिससे पवित्र शहर में आने वाले तीर्थयात्रियों की धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं।

अखंड परशुराम अखाड़े के नेतृत्व में चल रही इस मुहिम के तहत शहर में रेहड़ी-पटरी और दुकानों के पोस्टरों पर बदलाव किए जा रहे हैं। अखाड़े के सदस्य खुद सड़कों पर उतरकर ‘वेज बिरयानी’ लिखे बोर्ड पर ‘वेज पुलाव’ के स्टिकर चिपका रहे हैं। उनका स्पष्ट कहना है कि दुकानदार अब बिरयानी की जगह पुलाव शब्द का ही इस्तेमाल करें।

अखाड़े के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने इस कदम के पीछे का कारण स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि भले ही स्थानीय दुकानदार मांस का प्रयोग नहीं कर रहे हों, लेकिन ‘बिरयानी’ शब्द सीधे तौर पर मांसाहारी भोजन का अहसास कराता है। चूंकि हरिद्वार के कई प्रमुख क्षेत्रों में मांस-मदिरा की बिक्री पर सख्त पाबंदी है, इसलिए शाकाहारी भोजन को भी मांसाहारी नामों से बेचना अनुचित है।

‘कबाब’ और ‘चाप’ पर भी निशाना, प्रशासन को लिखा पत्र

अखाड़े का यह अभियान केवल बिरयानी तक सीमित नहीं है। पंडित कौशिक के अनुसार, जल्द ही ‘कबाब’ और ‘चाप’ जैसे नामों के खिलाफ भी कार्रवाई तेज की जाएगी। इस संबंध में संगठन की ओर से नगर आयुक्त और जिलाधिकारी को एक औपचारिक पत्र सौंपा गया है, जिसमें होटलों और रेस्टोरेंट के मेन्यू से इन शब्दों को पूरी तरह हटाने की मांग की गई है।

इसके अलावा संतों ने ऑनलाइन फूड डिलीवरी ऐप्स को लेकर भी एक गंभीर दावा किया है। उनका आरोप है कि कुछ ऐप्स के माध्यम से कनखल और हर की पौड़ी जैसे पूर्ण प्रतिबंधित क्षेत्रों में भी मांसाहारी भोजन की आपूर्ति की जा रही है। जिला प्रशासन से इन ऑनलाइन डिलीवरी सेवाओं पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने की गुजारिश की गई है।

हरिद्वार में आजादी के पहले से ही कड़े नियम लागू हैं। प्रशासन के नियमों के तहत पूरे शहर में भले ही मांस पर पूर्ण प्रतिबंध न हो, लेकिन धार्मिक महत्व वाले मुख्य क्षेत्रों (जैसे कनखल और हर की पौड़ी) में मांस और अंडे की बिक्री व सेवन पूरी तरह से प्रतिबंधित है।


देश और दुनिया की ताज़ा ख़बरों (Latest Hindi News) के लिए जुड़े रहें Doon Horizon के साथ। राजनीति (Politics), खेल, मनोरंजन, टेक्नोलॉजी और एजुकेशन से जुड़े हर लाइव अपडेट (Live Updates) और ब्रेकिंग न्यूज़ (Breaking News in Hindi) सबसे पहले पाएं। पढ़िए आपके काम की हर बड़ी खबर, सिर्फ एक क्लिक पर।


Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

Leave a Comment