रामनगर। देवभूमि उत्तराखंड के विश्वप्रसिद्ध बदरीनाथ और केदारनाथ धाम सहित 47 मंदिरों में अब गैर-हिंदुओं (Non Hindu Ban) के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगाने का निर्णय लिया गया है। बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) की बोर्ड बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगने के बाद प्रदेश में सियासी पारा चढ़ गया है।
इस बीच कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि रसोई गैस किल्लत (LPG Shortage) और बेरोजगारी जैसे बुनियादी मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे विवाद पैदा किए जा रहे हैं।
मंदिरों में ‘नो-एंट्री’ पर छिड़ा सियासी घमासान
रामनगर के पीएनजीपीजी कॉलेज में आयोजित ‘युवा आकांक्षा’ कार्यक्रम में पहुंचे हरीश रावत ने मंदिर समिति के फैसले को महज एक ‘प्रचार तंत्र’ का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म अपनी उदारता और सर्वधर्म समभाव के लिए जाना जाता है, लेकिन भाजपा इसे संकुचित कर रही है। रावत के मुताबिक, हर की पैड़ी जैसी जगहों पर स्थानीय परंपराएं पहले से लागू हैं जिनका सभी सम्मान करते हैं, ऐसे में नए सिरे से इस मुद्दे को तूल देना केवल ध्रुवीकरण की कोशिश है।
गैरसैंण को ‘बारात घर’ बनाने के बयान पर तंज
पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज द्वारा गैरसैंण स्थित भराड़ीसैंण विधानसभा भवन को पर्यटन या बारात घर के रूप में इस्तेमाल करने के सुझाव पर रावत ने कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि जिस गैरसैंण से करोड़ों उत्तराखंडियों की भावनाएं और राज्य आंदोलन का इतिहास जुड़ा है, उसे बारात घर कहना जनता का अपमान है। रावत ने चुटकी लेते हुए कहा कि अगर सरकार के पास कोई विजन नहीं है तो इसे बारात घर नहीं बल्कि ‘सत्संग भवन’ घोषित कर देना चाहिए।

युद्ध की आग में झुलसा उत्तराखंड का रसोई बजट
ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का सीधा असर अब उत्तराखंड के पहाड़ों में भी दिखने लगा है। रावत ने चिंता जताते हुए कहा कि रसोई गैस किल्लत (LPG Shortage) के कारण चारधाम यात्रा से पहले ही पर्यटन व्यवसायियों और आम जनता की कमर टूट रही है। वैश्विक आपूर्ति बाधित होने से होटलों को कमर्शियल सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं, जिससे आगामी पर्यटन सीजन पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।









