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किचन में छिपे हैं ये साइलेंट किलर, आज ही निकाल बाहर करें वरना घेर लेगी खतरनाक बीमारी

रसोई और घर में रोजाना इस्तेमाल होने वाली कई सामान्य चीजें कैंसर और नर्वस सिस्टम की बीमारियों का कारण बन रही हैं। नॉन-स्टिक बर्तनों की कोटिंग से लेकर प्लास्टिक की बोतलों में मौजूद जहरीले तत्व शरीर में धीरे-धीरे जहर घोल रहे हैं।

Published On: April 4, 2026 3:26 AM
Healthy Kitchen Tips

HIGHLIGHTS

  • नॉन-स्टिक कोटिंग में मौजूद PFOA गर्म होने पर कैंसरकारी रसायनों का उत्सर्जन करता है।
  • माइक्रोवेव में प्लास्टिक के बर्तनों का उपयोग भोजन में टॉक्सिक केमिकल्स घोल देता है।
  • रिफाइंड तेल को बार-बार गर्म करने से निकलने वाले फ्री-रेडिकल्स सेहत के लिए बेहद घातक हैं।

हेल्थ डेस्क, 04 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। Healthy Kitchen Tips : आधुनिक जीवनशैली में हम जिन सुविधाओं को आरामदायक मानकर अपना चुके हैं, वे असल में हमारे स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही हैं।

आमतौर पर लोग कैंसर से बचने के लिए केवल तंबाकू और धूम्रपान से दूरी बनाते हैं, लेकिन घर के भीतर मौजूद साइलेंट किलर जैसे प्लास्टिक, एल्युमिनियम फॉयल और रिफाइंड तेल पर ध्यान नहीं देते।

रसोई के ‘नॉन-स्टिक’ बर्तनों का काला सच

आजकल हर घर में नॉन-स्टिक कुकवेयर का चलन बढ़ा है क्योंकि इसमें खाना चिपकता नहीं है और तेल कम लगता है। हालांकि, इन बर्तनों पर चढ़ी टेफ्लॉन की परत बनाने के लिए परफ्लुओरोऑक्टेनोइक एसिड (PFOA) जैसे खतरनाक रसायनों का इस्तेमाल होता है।

जब ये बर्तन तेज आंच पर गर्म होते हैं, तो इनसे जहरीला धुआं और टॉक्सिक कंपाउंड निकलते हैं जो सीधे कैंसर को बढ़ावा देते हैं।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सेहत की सुरक्षा के लिए लोहे, स्टेनलेस स्टील या मिट्टी के पारंपरिक बर्तनों का रुख करना ही समझदारी है।

प्लास्टिक की बोतलों और माइक्रोवेव का जोखिम

प्लास्टिक की बोतलें सुविधा तो देती हैं, लेकिन इनमें मौजूद केमिकल पानी के साथ घुलकर शरीर में पहुंच जाते हैं। विशेष रूप से धूप में रखी या पुरानी प्लास्टिक की बोतलों से कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।

इससे भी अधिक घातक माइक्रोवेव में प्लास्टिक कंटेनर्स का इस्तेमाल है। गर्मी के संपर्क में आते ही प्लास्टिक से बीपीए (BPA) जैसे रसायन निकलने लगते हैं जो हार्मोनल असंतुलन और कैंसर की वजह बनते हैं। इसकी जगह कांच या सिरेमिक बर्तनों का उपयोग ही सुरक्षित विकल्प है।

एल्युमिनियम फॉयल और नर्वस सिस्टम पर चोट

टिफिन पैक करने के लिए इस्तेमाल होने वाला एल्युमिनियम फॉयल खाने के सीधे संपर्क में आकर एल्युमिनियम की मात्रा भोजन में बढ़ा देता है।

लंबे समय तक इसका सेवन करने से नर्वस सिस्टम यानी तंत्रिका तंत्र पर बुरा असर पड़ता है।

गर्म रोटियों को फॉयल में लपेटने के बजाय सूती कपड़े या पेपर रैप का इस्तेमाल करना कहीं अधिक सुरक्षित है।

प्लास्टिक चॉपिंग बोर्ड: हर कट के साथ जा रहा प्लास्टिक

सब्जियां काटने के लिए इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक चॉपिंग बोर्ड पर जब चाकू चलता है, तो प्लास्टिक के माइक्रो-पार्टिकल्स अलग होकर सब्जियों में मिल जाते हैं।

ये सूक्ष्म कण शरीर के अंदर जाकर टॉक्सिसिटी पैदा करते हैं। इसके स्थान पर लकड़ी के मजबूत चॉपिंग बोर्ड का उपयोग करना चाहिए, जो प्राकृतिक और सुरक्षित होता है।

रिफाइंड तेल का जानलेवा इस्तेमाल

रिफाइंड तेल को बनाने की प्रक्रिया में कई रसायनों का उपयोग होता है। जब इसे पूड़ी या पराठा तलने के लिए बार-बार गर्म किया जाता है, तो इसमें ‘फ्री रेडिकल्स’ की मात्रा बढ़ जाती है।

हाइड्रोजेनेटेड ऑयल में मौजूद ट्रांस फैट शरीर में सूजन और कैंसर कोशिकाओं को सक्रिय करने का काम करता है। स्वस्थ रहने के लिए ऑर्गेनिक सरसों का तेल, कोल्ड प्रेस्ड नारियल तेल या जैतून के तेल को प्राथमिकता देनी चाहिए।


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Rama Pun

रमा पुन 'दून हॉराइज़न' में हेल्थ और लाइफस्टाइल संपादक के रूप में अपनी अहम जिम्मेदारी निभा रही हैं। स्वास्थ्य, फिटनेस, खानपान और मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) के विषयों पर उनकी पकड़ बेहद मजबूत है। रमा का फोकस हमेशा मेडिकल एक्सपर्ट्स की पुख्ता सलाह और वैज्ञानिक शोध पर आधारित (Evidence-based) खबरें लिखने पर रहता है। उनका स्पष्ट मानना है कि सेहत से जुड़ी कोई भी जानकारी शत-प्रतिशत प्रामाणिक होनी चाहिए। अपनी आकर्षक और तथ्यपरक लेखनी से वे पाठकों को एक स्वस्थ, तनावमुक्त और संतुलित जीवनशैली अपनाने के लिए निरंतर प्रेरित और जागरूक करती हैं।

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